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टीचर ने कराई 100 उठक बैठक, डंडे सभी पीटा: चलना फिरना तो दूर.. खड़े भी नहीं हो पा रही तीसरी क्लास की बच्ची..

सरगुजा। शिक्षक अक्सर छात्रों को सीखाने के लिए कुछ सजा देते हैं। लेकिन जब यह सजा दायरे से बाहर हो जाए तो इसका परिणाम भयानक हो जाता है। इसका बच्चों की शारीरिक और मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसा ही एक मामला सरगुजा जिले के प्रतापगढ़ के एक प्राइवेट स्कूल में आया है। जहां एक शिक्षिका ने कक्षा तीन में पढ़ने वाली एक छात्रा को ऐसी सजा दी कि फिलहाल वह चलना फिरना तो दूर, ठीक से खड़े होने में भी असमर्थ महसूस कर रही है। दर्द के मारे उसका हाल बहुत बुरा है।

ताजा मामला सरगुजा के सीतापुर के प्रतापगढ़ स्थित डीएवीवी एमपीएस पब्लिक स्कूल का हैं। जहां कक्षा तीसरी में पढ़ने वाली 8 साल की छात्रा जिसका नाम समृद्धि गुप्ता है। कुछ पत्रकार जब इस बात की जानकारी लेने के लिए, उनके पास गए तो वह ठीक से खड़े नहीं हो पा रही थी, दर्द से कराह रही थी। तब उसके परिजनों ने उसे गोद में उठाया इसके बाद उसने मीडिया को बताया कि

“वह टॉयलेट जाने के लिए अपने क्लासरूम से बाहर झांक रही थी, तभी स्कूल के एक टीचर नम्रता गुप्ता ने उस बच्ची को देख लिया। टीचर के पूछने पर बच्ची ने बताया कि वह टॉयलेट लगी है, वह टॉयलेट जाना चाहती है। इस पर टीचर ने उससे कहा कि,  नाटक कर रही हो और उसके हाथ में दो डंडे मारे। फिर सौ बार उठक बैठक करने की सजा सुनाई। इसके साथ ही हाथ में डंडा लिए उसे तब तक डराती रही, जब तक उसने अपनी उठक- बैठक पूरी नहीं की। सजा के बाद उसके पैर में तेज दर्द होने लगा तो टीचर ने उसे बैंच पर बैठाया।”

इस मामले में परिजनों ने बताया कि छात्रा को सरकारी मेडिकल कॉलेज और प्राइवेट अस्पताल दोनों जगह दिखाया गया है। डॉक्टर ने बताया कि उसके मांसपेशिया खिंच गई है।

हुई शिकायत

सीतापुर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में जांच दल बैठने कही है। परिजनों ने इस मामले में जिला पुलिस अधीक्षक से भी शिकायत की है।

टीचर भी ना भूले सजा का दायरा

वैसे देखा जाए तो इस मामले में मामूली सी बात पर बहुत बड़ी सजा दे दी गई। 100 उठक- बैठक.. बहुत बड़ी चीज होती है। 100 उठक बैठक के बाद अच्छे-अच्छों की हालत खराब हो जाए, वह तो बस 8 साल की बच्ची है, जिसने डंडे के डर से यह सजा पूरी कर ली। इस मामले को देखा जाए तो अनुशासन सीखाने के लिए दी गई सजा… सजा के दायरे से बाहर दिखती है। सजा देने के और भी कई तरीके हो सकते थे, खास करके छोटे बच्चों के लिए। शिक्षकों को भी सजा देने से पहले बच्चों की शारीरिक और मानसिक स्थिति का भी ख्याल रखना चाहिए। ऐसा ना हो कि उनकी सजा का भविष्य में बच्चों की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर कोई दुष्प्रभाव पड़े।

नीचे घटना से संबंधित स्थानीय मीडिया का इंस्टाग्राम पोस्ट है, जिसमें बच्ची कराहती हुई नजर आई, उसके बाद परिजनों ने जब उसे गोद में  उठाया, जिसके बाद मीडिया से बोल पाई। नीचे आप वीडियो देख सकते हैं।

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