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रायगढ़ में 15 करोड़ की ‘थूक-पॉलिश’ इंजीनियरिंग! : ठेकेदारों ने ‘आटे में नमक नहीं, नमक में आटा’ मिला दिया? देवराज इंद्र बनते है भ्रष्ट ठेकेदारों के सबसे बड़े रक्षक? देखे सिंचाई विभाग के इस ‘विकास मॉडल’ का रेट-कार्ड..

रायगढ़ (RIG24)। दुनिया में एक से बढ़कर एक इंजीनियर पड़े हैं, लेकिन रायगढ़ के सिंचाई विभाग और उनके चहेते ठेकेदारों को तो ‘नोबेल प्राइज’ मिलना चाहिए! इन्होंने निर्माण की ऐसी ‘जादुई तकनीक’ ईजाद की है, जिसमें लोहे की छड़ (Iron Rod) की जरूरत नहीं पड़ती और सीमेंट ऐसा इस्तेमाल होता है जो छूते ही ‘डैंड्रफ’ की तरह झड़ने लगता है।

रायगढ़ और पुसौर ब्लॉक में तालाबों, नहरों और स्टॉप डैम के जीर्णोद्धार के नाम पर लगभग 15 करोड़ रुपये का ऐसा शानदार ‘बंदरबांट’ हुआ है, जिसे देखकर आप भी कहेंगे— “साहब ने आटे में नमक नहीं मिलाया, बल्कि नमक में ही आटा गूंथ दिया!”

नहर में नायब इंजीनियरिंग का नमूना जहां पापड़ के तरह टूटती है सीमेंट की ढलाई

15 करोड़ का ‘कागजी विकास’ और ठेकेदारों का ‘जादू’

सरकार ने सोचा था कि 15 करोड़ खर्च करके जल स्रोतों का उद्धार करेंगे, लेकिन यहाँ तो ठेकेदारों का ही ‘उद्धार’ हो गया। आइए, रायगढ़ सिंचाई विभाग के इस ‘विकास मॉडल’ का रेट-कार्ड देखते हैं:

  • कोयलंगा डायवर्सन (2 करोड़ 5 लाख): यहाँ नहरें बनने से पहले ही थक कर ‘धंस’ गई हैं। पुरानी नहरों की साफ-सफाई के नाम पर ऐसा फर्जी बिल कटा है कि बस पूछिए मत!
  • बेलरिया स्टॉप डैम (5 करोड़ 21 लाख): यहाँ ‘थूक-पॉलिश’ का ऐसा बेहतरीन काम हुआ है कि गांव वालों ने जनदर्शन में सीधे कलेक्टर से शिकायत की। लेकिन शायद ‘ऊपर तक’ सेटिंग इतनी तगड़ी है कि जांच की फाइल को ही लकवा मार गया है।
  • बासनपाली तालाब (1 करोड़ 5 लाख): यह तो इंजीनियरिंग का 8वां अजूबा है! ठेकेदार ने इतना ‘दिमाग’ लगाया कि बिना लोहे की छड़ डाले ही लकड़ी के पट्टों पर मिट्टी और मसाला थोपकर ढलाई कर दी।
  • बड़े हरदी तालाब (1 करोड़ 5 लाख): यहाँ चार खूंटिया पत्थर ऐसे ‘अल्ट्रा-टेक’ सीमेंट से चिपकाए गए हैं कि गांव वाले हाथ लगाते हैं तो वो रेत की तरह झरने लगते हैं।
  • सिहा, मंशाटार और बाघाडोला (लगभग 3 करोड़): यहाँ भी सीमेंट के घोल की ऐसी ‘लिपस्टिक’ लगाई गई है, जो पहली बारिश में ही धुल जाएगी।

“साहब, ये विकास है या हमारे मुंह पर तमाचा?”

कागजों पर भले ही काम ‘चकाचक’ हो, लेकिन जब ‘रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे रायगढ़’ और ‘जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा’ की टीम (विनय शुक्ला, वासुदेव शर्मा, राजेश त्रिपाठी, अनिल अग्रवाल चीकू आदि) जमीन पर पहुंची, तो विकास की पूरी ‘कलई’ खुल गई।

इस मामले को लेकर रायगढ़ बचाओ लड़ेंगे रायगढ़ संस्था ने कलेक्टर जनदर्शन में इसकी शिकायत भी की है.

मौके पर मौजूद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।  ग्रामीण खुद अपने हाथों से सीमेंट को खुरच कर दिखा रहे हैं कि कैसे करोड़ों का यह डैम सिर्फ रेत और मिट्टी के भरोसे खड़ा है। सवाल सीधा है.. जब ढलाई में छड़ ही नहीं है, तो क्या यह डैम ठेकेदार के ‘आशीर्वाद’ से टिकेगा?”

भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा ‘वाटरप्रूफ’ प्लान: मानसून का इंतजार!

इस पूरे घोटाले में सबसे बड़ा सस्पेंस है ‘बारिश’ का। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने युवा कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी को ज्ञापन सौंपकर साफ कह दिया है कि “जांच बरसात से पहले करा लीजिए साहब!”

देवराज इंद्र भ्रष्ट् ठेकेदारों के सबसे बड़े रक्षक?

इसके पीछे का लॉजिक समझिए— रायगढ़ के भ्रष्ट ठेकेदारों के सबसे बड़े ‘रक्षक’ भगवान इंद्रदेव होते हैं! जैसे ही पहली तेज बारिश आएगी, ये ‘थूक-पॉलिश’ वाला घटिया निर्माण पानी में बह जाएगा। और फिर ठेकेदार और अधिकारी सीना चौड़ा करके कहेंगे— “साहब हम क्या करें, प्राकृतिक आपदा आ गई, सब बह गया!” यानी सारा भ्रष्टाचार बारिश के पानी से धुलकर ‘पवित्र’ हो जाएगा।

“युवा कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के लिए यह एक ‘ओपन चैलेंज’ है। देखना यह है कि क्या प्रशासन बारिश से पहले इस 15 करोड़ की ‘रेत की दीवार’ का सच बाहर लाता है, या फिर हर बार की तरह फाइलों का यह ‘कचरा’ मानसून के पानी में बहा दिया जाएगा!

इसके पहले की ( मानसून से बाद) नायाब इंजीनियरिंग का यह करिश्मा आपकी आंखों से देखने से छूट जाए, नीचे आप तस्वीरों में देख लीजिए.. और वीडियो में ग्रामीणों की बात कम से कम आप तो सुन लीजिए,

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