बिलासपुर/रायगढ़। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और बहुचर्चित बिजली टैरिफ विवाद में CSPDCL (छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी लिमिटेड) के अफसरों की एक बड़ी लापरवाही और कानूनी शॉर्टकट ने रायगढ़ के उद्योग घराने जिंदल स्टील (जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड JSPL) को 153. 55 करोड़ रुपये की भारी-कम रिकवरी से फिलहाल बचा लिया है। बिलासपुर हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच ने एक बड़ा तकनीकी फैसला सुनाते हुए CSPDCL द्वारा जारी किए गए साल 2016 के रिकवरी नोटिस को प्रक्रियात्मक कमियों के चलते रद्द कर दिया है।
लेकिन, ग्राउंड लेवल पर इसे जिंदल की ‘क्लीन चिट’ समझने की भूल कतई नहीं की जा सकती। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभू दत्त गुरु की खंडपीठ ने इस मामले में 2 जून को अपना फैसला दिया है। फ़िलहाल लगभग 154 करोड़ का यह मामला खत्म नहीं हुआ है, बल्कि वापस ‘छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग’ (CSERC) में इसकी फिर से सुनवाई होगी, जहाँ जिंदल और CSPDCL दोनों अपना पक्ष रखेंगे। यहाँ सभी बातों और खातों के साथ बिजली सप्लाई का पूरा कच्चा-पक्का चिट्ठा खुलेगा।
क्या है 154 करोड़ का यह पूरा खेल? देखे टाइमलाइन
यह कोई मामूली विवाद नहीं है, बल्कि रायगढ़ के पतरापाली स्थित जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (JSPL) के कैप्टिव पावर प्लांट और CSPDCL के बीच जनता के पैसे के कथित ओवर-पेमेंट (अतिरिक्त भुगतान) का गंभीर मामला है।
- 2011 का वो एग्रीमेंट: नवंबर 2011 में जब जिंदल और CSPDCL के बीच 150 मेगावाट बिजली सप्लाई का करार हुआ। इसमें बिजली की दरें, लोड फैक्टर और पीक/ऑफ-पीक ऑवर्स में एक्स्ट्रा पावर सप्लाई को लेकर कुछ फॉर्मूले तय थे।
- जनता के ₹154 करोड़ का फेर: बाद में जब ऑडिट और नियामक आयोग की जांच हुई, तो पता चला कि जिंदल को तय फॉर्मूले से करीब 153.55 करोड़ रुपये ज्यादा बांट दिए गए।
- 8 साल से दबा था मामला: CSPDCL प्रबंधन ने जब जुलाई 2016 में इस रकम को वापस छीनने के लिए डिमांड नोटिस भेजा, तो कॉर्पोरेट लॉयर्स की फौज लेकर जिंदल अदालत पहुंच गया। तब से लेकर आज तक यह मोटी रकम सरकारी खजाने में आने के बजाय कोर्ट के चक्कर काट रही है।
CSPDCL के लीगल सेल और अफसरों की ‘नासमझी’ बनी जिंदल की ढाल
इसी साल 30 मार्च 2026 को हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने जिंदल को झटका देते हुए CSPDCL की रिकवरी को बिल्कुल सही ठहराया था। लेकिन जब मामला चीफ जस्टिस की डिवीज़न बेंच में गया, तो बिजली कंपनी के अफसरों की एक बुनियादी गलती ने पूरी बाजी पलट दी:
- बिना सुने ही थमा दिया नोटिस: चीफ जस्टिस की बेंच ने पाया कि 154 करोड़ रुपये जैसी विशालकाय राशि वसूलने से पहले CSPDCL के जिम्मेदार अधिकारियों ने जिंदल स्टील को अपना पक्ष रखने, आपत्तियां दर्ज कराने या डेटा रखने का कोई “उचित और प्रभावी मौका” (Opportunity of Hearing) ही नहीं दिया था।
- अफसरों की चूक का मिला फायदा: कानून की नजर में प्रक्रिया उतनी ही पवित्र है जितना कि फैसला। बिना पूरी सुनवाई के सीधे रिकवरी नोटिस जारी करना ‘प्राकृतिक न्याय’ (Natural Justice) के सिद्धांतों की धंज्जियां उड़ाने जैसा था। CSPDCL के अफसरों की इसी कागजी और प्रक्रियात्मक चूक (Technical Loophole) का फायदा जिंदल के वकीलों को मिला और कोर्ट ने नोटिस को निरस्त कर दिया।
राहत सिर्फ अस्थाई, रायपुर की चौखट पर फिर नपेगा जिंदल
लोकल स्तर पर विभिन्न विवादों और पब्लिक सेंटिमेंट को लेकर पहले से ही बैकफुट पर रहने वाले जिंदल के लिए यह राहत केवल ‘अदालती तारीखों’ को आगे बढ़ाने जैसी है। कोर्ट ने इस केस को ‘Approved for Reporting’ (AFR) बनाकर साफ कर दिया है कि खेल अभी खत्म नहीं हुआ है:
- अब पाई-पाई का हिसाब देना होगा: हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब यह केस वापस छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) के पास जाएगा। अब आयोग की बंद फाइलों में जिंदल को एक-एक इनवॉइस और बिजली सप्लाई की दरों का पूरा हिसाब देना होगा।
- खतरे में है ओपन एक्सेस: विवादित राशि पर तात्कालिक रोक लगने से भले ही जिंदल को पावर एक्सचेंज (IEX) में अपनी सरप्लस बिजली बेचने की NOC मिलने की थोड़ी उम्मीद जगी हो, लेकिन जब तक CSERC का अंतिम फैसला नहीं आता, जिंदल के पावर बिजनेस पर यह तलवार लटकती रहेगी।
फाइनली..
यह फैसला इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब CSPDCL का लीगल सेल और उसके अफसर भारी-भरकम रिकवरी के मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के बजाय ‘शॉर्टकट’ अपनाते हैं, तो बड़े कॉर्पोरेट घरानों को बचने के लिए तकनीकी रास्ते खुद-ब-खुद मिल जाते हैं। अफसरों की इस लापरवाही की वजह से 154 करोड़ रुपये के इस हाई-प्रोफाइल विवाद का अंतिम क्लाइमेक्स अब एक बार फिर रायपुर स्थित नियामक आयोग की नई सुनवाई तय करेगी, जहाँ देखना होगा कि उपभोक्ताओं के हक का पैसा वापस आता है या कॉर्पोरेट लॉबिंग एक बार फिर भारी पड़ती है।
– आशीष शर्मा, सीनियर चीफ एडिटर RIG24
(केस संदर्भ: जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड बनाम छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग व अन्य, Writ Appeal No. 379 of 2026, निर्णय दिनांक: 02 जून 2026)



