रायगढ़। कोतरारोड़ थाने से जेल भेजे गए बंदी संजय बघेल की अचानक मौत के मामले में रायगढ़ पुलिस ने अपना पक्ष साफ कर दिया है। परिजनों ने पुलिस पर थाने में मारपीट करने और केस के नाम पर पैसे (रिश्वत) मांगने का गंभीर आरोप लगाया था। इन आरोपों का जवाब देते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और थाने का पूरा सीसीटीवी (CCTV) फुटेज मीडिया के सामने रख दिया।

CCTV फुटेज में क्या दिखा?
पुलिस द्वारा जारी फुटेज और टाइमलाइन के मुताबिक, 10 जून को संजय बघेल को 30 लीटर महुआ शराब के साथ पकड़ा गया था। दोपहर करीब 12:43 बजे उसे थाने लाया गया। सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि संजय थाने के बरामदे में आराम से बैठा है। उसने पानी मांगा तो पुलिसकर्मियों ने उसे पानी दिया और दोपहर का खाना भी खिलाया। इसके बाद संजय अपने भाई अजय और एक अन्य रिश्तेदार से थाने में ही मिलता और बातचीत करता नजर आ रहा है। पुलिस का कहना है कि फुटेज इस बात का सबूत है कि थाने में संजय के साथ कोई मारपीट या बदसलूकी नहीं हुई।



मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या है?
शाम को जेल भेजने से पहले जब संजय का मेडिकल चेकअप कराया गया, तो उसने डॉक्टर को किसी भी तरह की चोट या दर्द की कोई शिकायत नहीं की थी। डॉक्टर ने उसे पूरी तरह ‘फिट’ बताया था। सबसे अहम बात यह है कि मृतक की पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट भी आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, संजय के शरीर पर जो चोटें हैं, वो उसकी मौत का कारण नहीं हैं। मौत की असली वजह जानने के लिए अब बिसरा (Viscera) की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

रिश्वत के आरोप में 2 पुलिसकर्मी लाइन अटैच
मारपीट के आरोपों को तो पुलिस ने सीसीटीवी से खारिज कर दिया, लेकिन मृतक के परिजनों ने यह भी आरोप लगाया था कि शराब के इस केस में पुलिसवालों ने उनसे पैसे लिए थे। इस आरोप को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी ने कार्रवाई करने वाले प्रधान आरक्षक श्यामदेव साहू और आरक्षक शंभू चौहान को तुरंत ‘लाइन अटैच’ कर दिया है। डीएसपी मुख्यालय को इस रिश्वत के आरोप की गहराई से जांच करने का जिम्मा सौंपा गया है।

फिलहाल संजय बघेल की मौत के इस पूरे मामले की न्यायिक जांच (मजिस्ट्रेट जांच) चल रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस रहस्य से पूरी तरह पर्दा उठ पाएगा।



