रायगढ़। कोयला और माल परिवहन के लिए बिछाई गई रेलवे लाइनें किस तरह वन्यजीवों के लिए ‘मौत का ट्रैक’ बन रही हैं, इसका एक बेहद दर्दनाक मामला रायगढ़ से सामने आया है। जिले के घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत चारमार (चारगांव) गांव के पास एक मालगाड़ी की चपेट में आने से एक जंगली मादा हाथी की मौत हो गई है। उसकी उम्र करीब 40 साल बताई जा रही है। बिलासपुर से आई एक्सपर्ट टीम ने घंटों तक घायल हाथी का उपचार किया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।

रात 8-9 बजे ट्रैक पार कर रहा था हाथियों का दल
घटना सोमवार रात करीब 8 से 9 बजे की बीच की है। जानकारी के अनुसार, चारमार क्षेत्र में 6 से 10 हाथियों का एक झुंड रेलवे ट्रैक पार करके जंगल की तरफ जा रहा था। उसी दौरान वहां से एक मालगाड़ी गुजरी। मालगाड़ी के ड्राइवर ने हाथियों को देखकर लगातार हॉर्न भी बजाया। 5 हाथी तो ट्रैक पार कर गए, लेकिन एक हाथी ट्रेन की सीधी चपेट में आ गया। ट्रेन की जोरदार टक्कर से हाथी के पिछले हिस्से और पैरों में गंभीर चोटें आईं और वह वहीं ट्रैक के पास घायल होकर गिर पड़ा।
एक्सपर्ट टीम ने किया घंटों इलाज, फिर भी हारी जिंदगी

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। घायल हाथी की हालत को देखते हुए बिलासपुर के सीसीएफ (CCF) मनोज पांडे के निर्देश पर कानन पेंडारी जू के मशहूर वन्यजीव चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन को तत्काल रायगढ़ रवाना किया गया।
डॉक्टरों की टीम ने मौके पर पहुंचकर हाथी का उपचार शुरू किया। लेकिन टक्कर इतनी भीषण थी और अंदरूनी चोटें इतनी ज्यादा थीं कि तमाम कोशिशों के बावजूद भयानक दर्द से तड़पते हुए मंगलवार सुबह करीब 9 बजे उस मादा हाथी ने दम तोड़ दिया।

इलाके में हाथियों का दल मौजूद, गांव वालों के लिए अलर्ट
इस हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि दुर्घटना का शिकार हुए हाथी के साथ मौजूद बाकी हाथियों का दल अब भी घटनास्थल के ही आस-पास मौजूद है। अपने साथी के घायल होने और मौत के कारण हाथियों का यह झुंड काफी संवेदनशील और आक्रामक हो सकता है।
इसे देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे कौतूहलवश घटना स्थल के पास भीड़ जमा न करें और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। फिलहाल वन विभाग की टीम मौके पर मुस्तैद है और हाथियों के झुंड की लगातार निगरानी की जा रही है।



