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चिराईपानी क्रेशर हादसा : गर्भवती महिला की मौत ‘प्राकृतिक आपदा’ या ‘इंडस्ट्रियल मर्डर’ ? कांग्रेस की 6 सदस्यीय जांच कमेटी गठित, रसूखदार क्रेशर संचालक की लापरवाही बेनकाब

रायगढ़। पूंजीपथरा थाना क्षेत्र के चिराईपानी में महालक्ष्मी प्लांट की 20 फीट ऊंची दीवार गिरने से एक गर्भवती महिला मजदूर की दर्दनाक मौत कोई आम हादसा नहीं है। यह सीधे तौर पर औद्योगिक लापरवाही (Industrial Negligence) का एक खौफनाक मामला है। इस ‘इंडस्ट्रियल मर्डर’ को लेकर जहां एक तरफ कांग्रेस ने जांच कमेटी का गठन कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय क्रेशर संचालक की मनमानी और रसूख ने पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

कांग्रेस ने बनाई 6 सदस्यीय जांच समिति

इस गंभीर औद्योगिक हादसे की जमीनी हकीकत जानने के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने 19 जून 2026 को एक 6 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति का संयोजक चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव को बनाया गया है। उनके साथ जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू, लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार, पूर्व विधायक प्रकाश नायक, पीसीसी महामंत्री आरती सिंह और रायगढ़ नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया बतौर सदस्य शामिल हैं। समिति जल्द ही ग्राउंड जीरो का दौरा कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

प्रदेश कांग्रेस द्वारा जांच कमेटी का गठन

हादसे की असली वजह: क्रेशर का गड्ढा और जलभराव

दीवार गिरने की वजह सिर्फ आंधी नहीं थी। RIG24 की पड़ताल में सामने आया है कि महालक्ष्मी प्लांट की दीवार के पास ही  ‘ओम रूपेश क्रेशर’ द्वारा पानी की निकासी के लिए नाली नुमा एक बड़ा लंबा गड्ढा खोदा गया था। इस गड्ढे में जमा पानी के रिसाव ने दीवार की नींव को पूरी तरह खोखला कर दिया था, जिसके चलते यह 20 फीट ऊंची दीवाल, आंधी आते ही वह एक पर्दा की तरह कंपकंपाती हुई सीधे लेबर क्वार्टर पर आ गिरी। जिसकी चपेट में एक गर्भवती महिला और अन्य दो लोग आगे और उसे गर्भवती महिला की मौत हो गई जबकि अन्य दो गंभीर रूप से घायल है।

इस मामले प्रशासन की तरफ से लेबर कमिश्नर और ऑफिसर की टीम भी जांच के लिए पहुंची थी। फिलहाल वहां से जांच से पहले ही घटनास्थल को दुरुस्त कराया जा रहा है, लेबर क्वार्टर के टीन के सैड हटाए जा रहे हैं.. कुल मिलाकर जांच पर लीपा पोती का कार्यक्रम शुरू हो गया है ।

संचालक का रसूख: प्रशासन के आदेशों को दिखाया ठेंगा

इस हादसे के बाद ओम रूपेश क्रेशर के संचालक शंकर लाल अग्रवाल का नाम सुर्खियों में है। शंकर लाल अग्रवाल का राजनीतिक रसूख इतना है कि वे पिछली दो बार कांग्रेस से विधायक पद की टिकट मांग चुके हैं और टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुके हैं। और चुनाव के अंतिम दिनों में अपने विपक्षी भाजपा के प्रत्याशी और वर्तमान विधायक ओपी चौधरी के लिए वोट मांगते भी नजर आए, जो खूब चर्चा मे रही। इन सब बातों से आप उनके राजनीतिक रसूख का अंदाजा तो लगा चुके होंगे।

​शायद इसी राजनीतिक रसूख का नतीजा है कि प्रशासन उनके सामने बेबस नजर आता है। ग्रामीणों के अनुसार, क्रेशर प्रबंधन ने मुख्य मार्ग पर भी अवैध रूप से खुदाई कर एक बड़ा गड्ढा बना दिया था। ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन ने तत्काल गड्ढा भरने और सड़क बनाने का आदेश दिया था, लेकिन संचालक ने इस आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल दिया और वह मौत का गड्ढा जस का तस बना रहा।

ग्रीन बेल्ट पर कब्जे का आरोप

इसके साथ ही ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ओम रूपेश क्रेशर का संचालन और वहां बना लेबर क्वार्टर कथित तौर पर संरक्षित ‘ग्रीन बेल्ट’ की जमीन पर है। नियमों को ताक पर रखकर मजदूरों के क्वार्टर ऐसी खतरनाक जगह पर क्यों बनाए गए?

प्रशासन और जांच टीम से बड़े सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस और प्रशासन इसे सिर्फ ‘प्राकृतिक आपदा’ का रूप देकर फाइल बंद कर देंगे? या फिर गड्ढा खोदकर दीवार की नींव कमजोर करने और प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना करने वाले दोषियों पर गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मामला दर्ज होगा?

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