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खजाने की ‘नरबलि’ या जहरीली शराब? 98 दिन और 8 लाशें… बलौदा बाजार के  खर्वे गांव में कब्रें खोदकर सच निकाल रही पुलिस!

बलौदा बाजार। मौत का एक ऐसा खौफनाक सिलसिला, जो किसी थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले की एक डरावनी हकीकत है। कसडोल थाना क्षेत्र का खर्वे गांव इन दिनों एक ऐसे खौफ से जूझ रहा है, जिसने 98 दिनों के भीतर 8 लोगों को हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया है।

मौत भी ऐसी, जिसका कारण न तो कोई बीमारी समझ आई और न ही कोई हादसा। अब जब मौतों का यह आंकड़ा गांव वालों की बर्दाश्त के बाहर हो गया, तो पुलिस को सच्चाई का पता लगाने के लिए मुर्दों को उनकी कब्र से बाहर निकालना पड़ रहा है।

खौफ के वो 98 दिन और एक-एक कर उठती अर्थियां

इस गांव में मौत का यह तांडव 6 फरवरी 2026 से शुरू हुआ और मध्य मई तक चलता रहा। बद्री पटेल, विनोद साहू, गजानन मांझी से लेकर महेतरू साहू तक… एक के बाद एक 8 लोग अचानक मौत का शिकार हो गए। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह थी कि मरने वालों में से 7 लोगों का अंतिम संस्कार कबीरपंथी रीति-रिवाजों के तहत शवों को दफना कर किया गया था। गांव में एक के बाद एक उठते जनाजों ने लोगों के दिलों में एक अनजाना डर पैदा कर दिया। शुरुआत में जिसे कुदरत का खेल माना जा रहा था, वह जल्द ही एक खौफनाक साजिश की शक्ल लेने लगा।

तंत्र-मंत्र, गुप्त खजाना और ‘नरबलि’ की डरावनी थ्योरी

जब गांव वालों ने इस सिलसिलेवार मौत के पीछे की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया, तो शक की सूई गांव के ही एक किराना व्यापारी पर जाकर अटक गई। पूरे इलाके में यह सनसनीखेज चर्चा आग की तरह फैल गई कि गांव में किसी ‘गुप्त खजाने’ की तलाश की जा रही है और उस खजाने को पाने के लिए तंत्र-मंत्र और कथित ‘नरबलि’ का खौफनाक खेल खेला जा रहा है।

​दावा तो यह भी किया जा रहा है कि मरने वाले सभी लोग शराब पीने के आदी थे और किसी न किसी तरह से उस किराना व्यापारी के संपर्क में थे। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि खजाने के लालच में इसी व्यापारी ने एक सोची-समझी साजिश के तहत उन लोगों को शराब में कोई धीमा जहर (Slow Poison) मिलाकर पिलाया, जिससे उनकी एक-एक कर मौत होती गई। हालांकि, पुलिस की पूछताछ में आरोपी व्यापारी ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है।

कब्रों से बाहर आ रहा है मुर्दों का सच

आरोपों में कितनी सच्चाई है और कितनी अफवाह, यह जानने के लिए बलौदा बाजार पुलिस, प्रशासन और फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की टीम ने अब एक बेहद संवेदनशील और डरावना कदम उठाया है। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में उन सभी कब्रों को फिर से खोदा जा रहा है, जहां इन मृतकों को दफनाया गया था। जमीन के अंदर से निकाले जा रहे इन कंकालों और अवशेषों को अब पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए रायपुर के अंबेडकर अस्पताल भेजा जा रहा है।

​अब पुलिस की जांच और फॉरेंसिक की बिसरा रिपोर्ट ही इस खौफनाक मिस्ट्री से पर्दा उठाएगी। क्या खर्वे गांव में वाकई खजाने के लिए इंसानी जानों से खिलवाड़ किया जा रहा था? क्या शराब में मिला जहर 8 मौतों का असल कातिल है? या फिर यह सिर्फ एक खौफनाक इत्तेफाक है? जवाब चाहे जो भी हो, लेकिन फिलहाल यह गांव अपनी ही जमीन में दफन मुर्दों से सच उगलवाने का इंतजार कर रहा है।

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