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‘राख’ के मुनाफे में भस्म होता लोकतंत्र! रायगढ़ में पेश हो रही खतरनाक ‘नजीर’: क्या अब फ्लाई ऐश के धन कुबेरों  की ‘पूंजी’ तय करेगी पंचायत का भविष्य?

रायगढ़। रायगढ़ जिले में फ्लाई ऐश (राख) का धंधा अब सिर्फ प्रदूषण नहीं फैला रहा, बल्कि यह लोकतंत्र की जड़ों में भी जहर घोल रहा है। इस ‘काली मलाई’ में इतना दम आ गया है कि यह अब जनता की चुनी हुई सरकार को भी अपने फायदे के लिए गिराने और बनाने लगी है। आलम यह है कि फ्लाई ऐश के इस ‘हमाम’ में पक्ष और विपक्ष, दोनों ही एक-दूसरे पर संलिप्तता का आरोप लगा रहे हैं। तमनार ब्लॉक की एक ग्राम पंचायत ‘भुईकुरी’ का ताजा मामला इसी कॉर्पोरेट दबंगई, प्रशासनिक लाचारी और राजनीतिक पतन की जीती-जागती मिसाल है।

आगामी 30 जून को इस पंचायत की एक निर्वाचित आदिवासी महिला सरपंच सुशीला बाई मांझी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होनी है। लेकिन दस्तावेजों की परतें उधेड़ने पर जो सच सामने आता है, वह किसी राजनीतिक विरोध का नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट और एक बड़े ट्रांसपोर्टर के ‘ईगो’ और ‘मुनाफे’ की लड़ाई का है।

फर्जी NOC का ‘बैकडेट’ खेल और पर्यावरण विभाग का एक्शन

दरअसल, इस पूरी सियासी नौटंकी की पटकथा फ्लाई ऐश के एक बड़े डंपिंग प्रोजेक्ट को लेकर लिखी गई है। दस्तावेजों के अनुसार, एक बड़े उद्योगपति को इस पंचायत के आश्रित ग्राम में राख डंप करने के लिए जगह चाहिए थी। जब वर्तमान सरपंच ने इस डंपिंग के लिए NOC देने से मना कर दिया, तो कॉर्पोरेट के गुर्गों ने नियमों को ही डस्टबिन में डाल दिया।

24 मार्च को किया गया डंपिंग के लिए आवेदन

​आरोप है कि ‘बैकडेट’ (दो साल पुरानी तारीख) में पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों से मिलीभगत कर एक फर्जी NOC तैयार करवा ली गई। इसके आधार पर गांव में राख का पहाड़ खड़ा कर दिया गया। लेकिन जब सरपंच ने इस फर्जीवाड़े के सबूतों के साथ पर्यावरण विभाग का दरवाजा खटखटाया, तो विभाग को भी अपना माथा पीटना पड़ा और आनन-फानन में इस फर्जी NOC को रद्द कर दिया गया।

NOC छिनते ही खुली कॉर्पोरेट की तिजोरी

जिस जमीन पर डंपिंग के लिए 24 मार्च 2026 को आवेदन किया गया था, उसे पर 2 साल पहले की डेट पर एनओसी लेकर डंपिंग का काम शुरू कर दिया गया.

फर्जी NOC रद्द होने से उद्योगपति और उनके समर्थित बड़े ट्रांसपोर्टर का खेल बिगड़ गया। आरोप है कि इसके बाद कॉर्पोरेट ने अपने धनबल की तिजोरी खोल दी और उन लोगों को मोहरा बनाया, जिन्होंने फर्जी NOC पर हस्ताक्षर किए थे। नतीजा यह हुआ कि ‘फ्लाई ऐश’ के करोड़ों के मुनाफे वाले इस खेल में जब वर्तमान सरपंच ने कॉर्पोरेट की मनमानी पर ब्रेक लगाया, तो अब उन्हें ही कुर्सी से बेदखल करने के लिए अविश्वास प्रस्ताव की बिसात बिछा दी गई है।

फर्जी एनओसी के खिलाफ रायगढ़ जिला कलेक्टर से शिकायत जिसमें बताया गया है कि पर्यावरण विभाग द्वारा जांच के बाद NOC निरस्त किया गया

राख की मलाई: पक्ष और विपक्ष दोनों पर उठ रहे सवाल

​इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प और व्यंग्यात्मक पहलू यह है कि राज्य में ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार है और अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रहीं सरपंच भी सत्ताधारी दल से ही समर्थित मानी जाती हैं। इसके बावजूद, फ्लाई ऐश का कॉर्पोरेट मुनाफा इतना बड़ा है कि स्थानीय स्तर पर दोनों ही प्रमुख पार्टियां (भाजपा और कांग्रेस) एक-दूसरे पर इस ‘राख की मलाई’ खाने और कॉर्पोरेट को संरक्षण देने का आरोप लगा रही हैं। ऐसा लगता है जैसे फ्लाई ऐश के इस व्यापार में कोई भी दल पूरी तरह से ‘पवित्र’ नहीं रह गया है।

एक खतरनाक ‘नजीर’: क्या ‘पूंजी’ तय करेगी पंचायत का भविष्य?

भले ही यह मामला एक छोटी सी ग्राम पंचायत का लग रहा हो, लेकिन यह रायगढ़ के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक बेहद खतरनाक नजीर (Precedent) पेश कर रहा है। अगर एक कॉर्पोरेट घराना या फ्लाई ऐश के धनकुबेर उनके पसंदीदा अपने फायदे के लिए, अपनी मनमाफिक NOC हासिल करने के लिए, चंद पैसों के दम पर चुनी हुई पंचायत को गिरा सकता है, तो कल को वे इससे भी बड़ी लोकतांत्रिक संस्थाओं को खरीद लेंगे।

क्या हमारा सिस्टम इतना लाचार हो गया है कि जनता के वोट की कीमत एक उद्योगपति की ‘राख’ से भी कम हो गई है? 30 जून को होने वाला यह अविश्वास प्रस्ताव सिर्फ एक सरपंच की कुर्सी का फैसला नहीं करेगा, बल्कि यह तय करेगा कि रायगढ़ में राज किसका चलेगा..? लोकतंत्र का या फ्लाई ऐश के धनकुबेरों का? अगर प्रशासन ने समय रहते इस कॉर्पोरेट फंडिंग और फर्जीवाड़े की जांच नहीं की, तो यह ‘राख’ कल पूरे जिले के लोकतांत्रिक मूल्यों को भस्म कर देगी।

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