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ओम रूपेश स्टील प्लांट का काला सच: कांग्रेस जांच दल के सामने खुली पोल! जानवरों की तरह रखे जाते थे मजदूर, सिस्टम से सेटिंग कर हड़पी जमीन, जानबूझकर हवा में घोल रहा जहर!

रायगढ़। ओम रूपेश स्टील प्राइवेट लिमिटेड में हुए दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ एक गर्भवती मजदूर की जान ले ली, बल्कि कंपनी प्रबंधन की अमानवीयता और सिस्टम के साथ उनकी गहरी साठगांठ की भी पोल खोल दी है। हादसे की जमीनी हकीकत परखने जब कांग्रेस की जांच कमेटी मौके पर पहुंची, तो प्रबंधन की चालाकी साफ नजर आई। जांच दल को इस बात की भनक तक न लगे कि मजदूर किन बदतर हालातों में जीने को मजबूर हैं, इसके लिए घटनास्थल के पास लेबर क्वार्टर के नाम पर बनाए गए टिन-शेड के कमरे रातों-रात हटा दिए गए। लेकिन सुबूत मिटाने की यह हड़बड़ाहट ही प्रबंधन के गुनाहों की गवाही दे रही थी। इस हादसे में जहां एक गर्भवती महिला मजदूर की मौत हो चुकी है, वहीं दो अन्य मजदूर अब भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

हादसे की रात की तस्वीर

पानी सर के पार, कांग्रेस बीजेपी एक साथ

इस पूरे मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भाजपा के स्थानीय जिला पंचायत सदस्य गोपाल अग्रवाल भी कांग्रेस की जांच कमेटी के साथ कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों की आवाज बुलंद करते नजर आए। चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव की अध्यक्षता में पहुंची इस कमेटी में रायगढ़ के पूर्व विधायक प्रकाश नायक, लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार और नेता प्रतिपक्ष सलीम निहारिया शामिल थे।

गैर इरादतन हत्या का अपराध दर्ज हो: रामकुमार

मौके के हालात देखने के बाद जांच दल के अध्यक्ष रामकुमार यादव ने दो टूक शब्दों में मृतका के परिजनों के लिए 2 करोड़ रुपये और घायलों के लिए 1-1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग रखी है। इसके साथ ही प्लांट के मालिक शंकर लाल अग्रवाल पर गैर-इरादतन हत्या का अपराध दर्ज करने की भी पुरजोर मांग की गई है। इसके लिए रायगढ़ जिला कलेक्टर को भी आवेदन दिया गया है।

जांच दल के अध्यक्ष विधायक राम कुमार यादव 

उन्होंने कहा कि लोगों ने उन्हें बताया कि कंपनी द्वारा दीवाल करीब गड्ढा खोदा गया है जिसमें काफी पानी भरा था। जिससे दीवाल की नीव कमजोर हुई और एक तेज आंधी में वह 20 फीट ऊंची दीवाल लगी लेबर क्वार्टर के ऊपर गिरी।

जमीन तालाब पर अवैध कब्जे के सबूत मगर तहसीलदार…??

मजदूरों की जान से खिलवाड़ के अलावा, कंपनी के कारनामे इससे कहीं ज्यादा काले हैं। मौके पर मौजूद पूर्व विधायक प्रकाश नायक, बीडीसी गोपाल अग्रवाल और स्थानीय ग्रामीणों ने प्रबंधन पर जमीन हड़पने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दर्द है कि कंपनी ने गांव के तालाब से लेकर सरकारी जमीनों तक पर बेखौफ अतिक्रमण कर लिया है और रातों-रात पेड़ों की बलि चढ़ाई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि 10 महीने पहले इस मामले में एफआईआर दर्ज होने और पटवारी द्वारा अवैध कब्जे का प्रतिवेदन तहसीलदार को सौंपे जाने के बावजूद कार्रवाई के नाम पर फाइलें ठंडे बस्ते में पड़ी हैं।

  • यहां लोगों ने चर्चा में बताया कि तहसीलदार कार्यवाही के नाम पर प्लांट के मालिक शंकर लाल अग्रवाल को टेलीफोन पर समझा दिए थे..? उसी तरह जैसे कोई नादान मासूम निर्दोष बच्चा हो!
स्थानीय पटवारी से कंपनी के अवैध कब्जे जानकारी लेते हुए पूर्व विधायक प्रकाश नायक और रामकुमार यादव

पर्यावरण की खुलेआम धज्जियां

वहीं, पर्यावरण नियमों की तो यहां खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियम के अनुसार एक ग्रीन बेल्ट होना चाहिए, मगर प्लांट के भीतर एक भी पेड़ नहीं है और ग्रीन बेल्ट की जमीन पर भी क्रेशर मशीन लगा दी गई है। ईएसपी मशीनें बंद रहती हैं और प्रदूषण का आलम यह है कि रात को छतों पर छोड़े गए कपड़ों पर सुबह काली राख की मोटी परत जमी मिलती है। जिले का पर्यावरण विभाग सब कुछ जानकर भी रहस्यमयी चुप्पी साधे बैठा है। पता नहीं कौन सा याराना निभा रहा है!

सिस्टम के भीतर कंपनी की सेटिंग गहरी

इन तमाम घटनाक्रमों को देखकर एक बात शीशे की तरह साफ हो जाती है कि ओम रूपेश स्टील प्लांट प्रबंधन का सरोकार न तो पर्यावरण से है और न ही मजदूरों की जिंदगी से। इलाके का विकास तो बहुत दूर की कौड़ी है, इनकी गिद्ध दृष्टि सिर्फ और सिर्फ आसपास की जमीनों को हड़पने पर टिकी है। इतनी गंभीर शिकायतों और हादसों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना इस बात का सबसे बड़ा और पुख्ता प्रमाण है कि सिस्टम (शासन-प्रशासन) के भीतर कंपनी की ‘सेटिंग’ कितनी गहरी है।

– आशीष शर्मा, संपादक RIG24

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