रायगढ़। जिले के चक्रधरनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नवापाली के बहुचर्चित हत्याकांड में न्यायालय ने अपना अहम फैसला सुना दिया है। जमीन समतलीकरण के विवाद में कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार कर एक युवक को मौत के घाट उतारने वाले हत्यारे को कोर्ट ने आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अदालत ने पीड़ित परिवार को 1 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि देने का भी आदेश दिया है।
क्या था पूरा मामला?
28 जनवरी 2024 को ग्राम नवापाली मेन रोड पर दिनदहाड़े एक खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया था। मृतक विशाल सिंह ठाकुर अपनी जमीन पर मिट्टी डलवाकर समतलीकरण और झाड़ियों की सफाई करवा रहा था। इसी दौरान बड़े अतरमुड़ा (मांझापारा) निवासी हरिलाल खड़िया (30 वर्ष) वहां आ धमका और जमीन पाटने की बात को लेकर विवाद करने लगा। विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में हरिलाल ने अपने पास रखी कुल्हाड़ी से विशाल के सिर और गर्दन पर एक के बाद एक कई जानलेवा वार कर दिए। इस जघन्य हमले में विशाल की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी।
वारदात के अगले ही दिन पकड़ा गया था आरोपी
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके से मृतक की मोटरसाइकिल, खून से सनी टोपी, चश्मा और रक्तरंजित मिट्टी जब्त कर जांच शुरू की। हत्या के ठीक अगले दिन 29 जनवरी 2024 को आरोपी हरिलाल खड़िया को गिरफ्तार कर लिया गया था। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त खून से सनी कुल्हाड़ी और उसके कपड़े बरामद कर फोरेंसिक (FSL) जांच के लिए भेज दिए थे, जो कोर्ट में मुख्य सबूत बने।
20 गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों से साबित हुआ जुर्म
इस हत्याकांड के ट्रायल में पुलिस की ओर से पेश किए गए वैज्ञानिक व भौतिक साक्ष्य और गवाहों के बयान काफी अहम रहे। विवेचना अधिकारी (तत्कालीन थाना प्रभारी) प्रशांत राव आहेर द्वारा जुटाए गए सबूतों और अपर लोक अभियोजक तन्मय बनर्जी की दलीलों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में 20 गवाह पेश किए।
इन्हीं पुख्ता सबूतों पर मुहर लगाते हुए षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश श्री अश्वनी कुमार चतुर्वेदी की अदालत ने 22 जुलाई 2026 को आरोपी हरिलाल खड़िया (पिता स्व. मनीराम खड़िया) को धारा 302 (हत्या) का दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास से दंडित किया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ शासन की पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत मृतक के परिजनों को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने की अनुशंसा भी की गई है।



