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सारंगढ़ कलेक्टर कार्यालय में रिश्वतखोरी LIVE कैमरे में कैद: मिशल नकल के बदले खुलेआम चल रहा पैसों का खेल!देखें वायरल विडियो..

सारंगढ़, 2 जुलाई 2025 — छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से एक सनसनीखेज वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कलेक्टर कार्यालय के भीतर मिशल नकल जैसे सामान्य दस्तावेज की नकल निकालने के बदले खुलेआम पैसे वसूले जा रहे हैं और यह पूरा मामला कैमरे में कैद हो चुका है। जानकारी के अनुसार वीडियो वायरल होने के बाद इस मामले में जिला कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने जांच के आदेश दे दिए है।

वीडियो में मुख्य प्रतिलिपि (नकल शाखा) प्रभारी वीमलेश खूंटे लोगों से मिशल नकल के बदले ₹300 की “नकद रिश्वत” लेते हुए साफ नजर आ रहा है। न दस्तावेज़ की रसीद दी जा रही, न कोई अधिकृत प्रक्रिया — सिर्फ “पैसा दो, काम लो” का सिस्टम चल रहा है।

VIDEO PROOF: भ्रष्टाचार का खुला खेल, कोई डर नहीं!

इस वायरल वीडियो ने यह साफ कर दिया है कि कलेक्टर कार्यालय में नियम-कानून की नहीं, बल्कि नोटों की चलती है।
देखें वीडियो यहां:

कलेक्टर की नाक के नीचे रिश्वत का साम्राज्य?

ज़िले के कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे को एक सख्त और कर्मठ अधिकारी माना जाता है। वे अधिकांश सरकारी कार्यों में स्वयं मौजूद रहकर पारदर्शिता लाने की कोशिश करते हैं। लेकिन ऐसे में उनके ही दफ्तर में बैठा कर्मचारी अगर दादागिरी से वसूली कर रहा है, तो यह सवाल उठाता है कि क्या उनके आदेशों का भी कोई असर नहीं बचा है?

जिनसे ₹500 मांगा गया, निवेदन करने पर ₹300 में “समझौता” हुआ। जिनके पास सीमित पैसे थे, उनसे भी ₹300 लिए गए।इसकी कोई रसीद, पावती या सरकारी दस्तावेज नहीं दिया गया।यह न सिर्फ घोर अनियमितता है, बल्कि घूसघोरी का एक ज्वलंत उदाहरण हैं।

सरकार वेतन दे रही, फिर भी चाहिए रिश्वत?

वीमलेश खूंटे को सरकार द्वारा नियमित वेतन और सुविधाएं दी जाती हैं, बावजूद इसके वह एक-एक नागरिक से अवैध वसूली कर रहा है। यह घटना न केवल प्रशासन की छवि धूमिल करती है, बल्कि सीधे तौर पर कलेक्टर कार्यालय की साख पर भी हमला है।

क्या होगी कार्रवाई? या रिश्वतखोरों को मिलेगा ‘अभयदान’?

प्रदेश सरकार और उपमुख्यमंत्री द्वारा समय-समय पर भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही जाती रही है। लेकिन यह देखना अब बेहद अहम होगा कि—

  • क्या इस वीडियो के बाद दोषी के खिलाफ निलंबन या FIR दर्ज की जाएगी?
  • या फिर हमेशा की तरह “जांच जारी है” कहकर मामले को दबा दिया जाएगा?

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