रायगढ़। पिछले दो दिनों में नए मरीन ड्राइव के लिए प्रगति नगर में मकानों को जमीदोंज करने के लिए शासन और प्रशासन के एक्शन को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कि उन्होंने जंग छेड़ दी हो।
इतना पुलिस बल रायगढ़ में शायद ही किसी ने देखा होगा, प्रगति नगर के एक आदमी के पीछे लगभग दो पुलिस वाले थे। रायगढ़ एसडीम और निगम कमिश्नर सेनापति की भूमिका में थे। प्रशासन की इस मुहिम का सिर्फ प्रगति नगर पर ही इफेक्ट नहीं हुआ। इसके साथ-साथ आम आदमी के जनजीवन पर भी इसका असर पड़ा।
शहर को गंदा और गलियों अंधेरा छोड़कर जंग में जुटे निगम के सिपाही
इस अघोषित युद्ध मे निगम प्रशासन ने तो हद ही पार कर दी थी। निगम के अधिकारी कर्मचारी तक तो ठीक, नगर निगम ने ठेका सफाई कर्मियों को भी 2 दिन तक अपनी इस जंग में शामिल किया। इसका नतीजा यह रहा कि शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई। कहीं कोई जानवर मरा पड़ा था, दो दिन तक बदबू आ रही थी.. मगर उठाने वाला कोई नहीं था, घर का कचरा लेने के लिए कोई स्वच्छता दीदी भी नहीं आई। सड़क का कचरा सड़क पर ही पड़ा रह गया।
शाम 7:00 बजे के बाद रायगढ़ के कई क्षेत्रों में अंधेरा छाया रहा, क्योंकि नगर निगम द्वारा लाइट जलाने के लिए कोई आदमी भी नहीं था। क्योंकि शाम 5:00 के बाद सारे सिपाही जंग के बाद थक चुके थे। दरअसल नगर निगम की स्ट्रीट लाइट कुछ जगह पर ऑटोमेटिक है, मगर कई जगहों पर मैन्युअल सेटअप लगाया गया है। जिसे जाकर सुबह शाम चालू बंद करना पड़ता है। क्योंकि नगर निगम के सारे कर्मचारी सिपाही की भूमिका में थे और युद्ध के बाद विश्राम में कर रहे थे, तो ऐसे में कौन जाकर लाइट चलाएगा।
अघोषित सीज फायर
वह तो भला हो कि कि आज कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज रायगढ़ आए और अघोषित सीज फायर की घोषणा हुई। आज सुबह-सुबह स्वच्छता दीदियों की सीटियां भी लोगों को सुनाई दी। हो सकता है शाम को दो दिन से अंधेरी पड़ी गलियों में भी रोशनी हो जाए।



