रायगढ़। रायगढ़ नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सड़को पर गड्ढे आम बात है। इन गढ्डों से आम लोगों को कितनी परेशानी होती है, यह कोई बताने वाली बात भी नहीं है। इसको लेकर शिकायत भी होती है लेकिन निगम अपनी लाचारी बताने लगती है। निगम में या तो इच्छा शक्ति की कमी हैं या तो फिर बहानासायटिस वाली बीमारी से ग्रसित है। निगम के पास बहानो की भरमार है। जैसे फंड की कमी, लंबी टेंडर प्रकिया, ठेकेदार की मनमानी और आचार संहिता जैसे कई लाचारी गिना देती है। काफी बहानेबाजी के बाद भी निगम ने सड़कों के गढ्डों को नहीं भरा तो रायगढ़ की पब्लिक अब खुद अपनी समस्या का समाधान कर रही है।
इसका ताजा उदाहरण आज देखने को मिला। नगर निगम के ठीक सामने ओवर ब्रिज में कदम रखते हैं..एक बड़ा गड्ढा हैं। ऐसा ही हाल अटल चौक से कुछ दूरी पर विनोबा नगर मुहाने पर भी एक बड़ा गड्ढा है। रोज आने जाने वालों को तो कोई दिक्कत नहीं थी, क्योंकि वह जानते थे.. यहां गड्ढा है! मगर जो पहली बार आता है इन गड्ढो में जरूर अनियंत्रित हो जाता है खासकर की महिलाएं।

जिसको भरने लेकर निगम से अपील की गई थी। मगर निगम आयुक्त के द्वारा आचार संहिता हवाला देते हुए नए काम का टेंडर शुरू नहीं किया जा सकता, बताया गया।
एक पखवाड़ा से ऊपर भी बीत जाने के बाद भी जब काम नहीं हुआ। तब इस काम का करने का बीड़ा अपीलकर्ताओं ने खुद उठाया। दिखने में छोटे लगने वाले गड्ढे कभी भी बड़े हादसे को अंजाम दे सकते थे। आज इस गड्ढे को जन कारवाँ सामाजिक संगठन के नरेंद्र चौबे, युवा इंजीनियर और सोशलिस्ट दीपक हरिताश शर्मा द्वारा समाजसेवी सुनील रामदास अग्रवाल के सहयोग से भर दिया गया। इस पूरे गड्ढा भरो कार्यक्रम को फेसबुक के माध्यम से लाइव भी चलाया गया।

उनके इस कार्य को सोशल मीडिया में काफी सराहना मिली है तो वहीं निगम की किरकिरी होने में कोई कसर नहीं छुटी है।
फिलहाल रायगढ़ शहर में सिर्फ दो गड्डो की मरम्मत से शहर की सारी सड़क नहीं सुधरने वाली! ऐसे कई गड्ढे हर जगह हैं और निगम के पास उनको भरने के लिए बहानो के सिवा कुछ भी नहीं! आपके वोट और नोट से शहर सरकार बनती भी है और चलती भी है! मगर आपकी समस्या आपकी खुद की है! इन सब चीजों को देखकर रायगढ़ के लिए अब यह स्पष्ट हो चुका है कि यहां की जनता अगर हादसों से बचना चाहती है तो खुद कंधे पर कुदाल रखे चंदे से सीमेंट, गिट्टी ले और अपने आसपास के गढ्डों को भरे।



