रायगढ़/घरघोड़ा। जिले की घरघोड़ा नगर पंचायत की कार्यशैली और वहां चल रहे निर्माण कार्यों की पारदर्शिता एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। वार्ड क्रमांक-12 स्थित नगर के प्रमुख ‘बगमुड़ा तालाब’ में 15वें वित्त आयोग की राशि से किए जा रहे पुनर्जीवन (रिजुवनेशन) कार्य में भारी तकनीकी और वित्तीय अनियमितताओं की बू आ रही है। इसे लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और वार्डवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय और स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

CM हेल्पलाइन को भी बना दिया मजाक
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नगर पंचायत के अधिकारियों ने ‘मुख्यमंत्री हेल्पलाइन’ को भी गुमराह किया है। वार्डवासियों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत (WP260600023587) के निराकरण के नाम पर अधिकारियों ने जमीनी हकीकत और तकनीकी बिंदुओं की पूरी तरह अनदेखी की। आरोप है कि केवल कागजी खानापूर्ति (औपचारिक जवाब) करके शिकायत को जल्दबाजी में बंद करने का प्रयास किया गया, जबकि जनता के उठाये गए अहम सवालों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। वार्डवासियों का साफ कहना है कि.. “काम सिर्फ कागजों में हुआ है, जमीन पर नहीं।”
जलकुंभी हटाई और बता दिया ‘तालाब का पुनर्जीवन’
ज्ञापन में बताया गया है कि 15वें वित्त आयोग से इस कार्य की स्वीकृति का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, तालाब की जलधारण क्षमता बढ़ाना और जरूरी स्थानों पर सुरक्षात्मक संरचनाओं का निर्माण करना था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मौके पर केवल ‘जलकुंभी हटाने’ जैसे मामूली कार्य को ही पूरा प्रोजेक्ट दर्शा दिया गया। तालाब की वास्तविक डी-सिल्टिंग (गाद निकालना) और गहराई बढ़ाने का जो मुख्य काम था, वह किया ही नहीं गया।

बिना जरूरत के बना दी 8.38 लाख की ‘टो-वॉल’
इस पूरे खेल में सबसे बड़ा सवाल लगभग 8.38 लाख रुपये की लागत से निर्मित ‘टो-वॉल’ पर उठ रहा है। वार्डवासियों का सीधा आरोप है कि जिस स्थान पर यह दीवार बनाई गई है, वहां न तो पानी के बहाव का कोई खतरा है और न ही मिट्टी के कटाव की कोई संभावना। फिर आखिर लाखों रुपये फूंक कर यह निर्माण क्यों कराया गया? शिकायतकर्ताओं ने पूछा है कि यह जगह किस इंजीनियर के तकनीकी सर्वे, निरीक्षण या किस सक्षम अधिकारी की अनुशंसा के आधार पर चुनी गई?
इन नेताओं के नेतृत्व में उठी जांच की मांग
पूरे कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग को लेकर नगर पंचायत घरघोड़ा के पूर्व अध्यक्ष एवं एल्डरमैन विजय शिशु सिन्हा के नेतृत्व में एक ज्ञापन सौंपा गया है। इसमें मांग की गई है कि प्रोजेक्ट की मेजरमेंट बुक (MB), लेवल बुक, क्रॉस सेक्शन, डिजाइन ड्राइंग और गुणवत्ता परीक्षण सहित सभी तकनीकी दस्तावेजों की बारिकी से जांच हो। अनियमितता साबित होने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
इस दौरान वार्ड-8 की पार्षद राजकुमारी डनसेना, वार्ड-6 के पार्षद यश सिन्हा, पूर्व एल्डरमैन सोमदेव मिश्रा, पूर्व पार्षद नीरज शर्मा सहित बड़ी संख्या में वार्डवासी मौजूद रहे और सभी ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
(नोट: इन गंभीर आरोपों पर फिलहाल नगर पंचायत प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आया है। यदि विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण आता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)



