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मंत्री ओपी चौधरी का वायरल वीडियो: ‘3 साल में इतना कुछ करेंगे कि जान लगा देंगे..’ मगर सवाल ये है कि अगली बार किसके लिए, किसकी औऱ कितनी जान..??

रायगढ़। बीते शनिवा और रविवार को शहर में जिस तरह शासन और प्रशासन ने मिलकर प्रगति नगर के खिलाफ ऐलान-ए-जंग  किया था, उसकी चर्चा रायगढ़ जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ में हैं। सनसनी मचा देने वाला प्रशासन का यह एक्शन आने वाले समय में किस-किस पर भारी पड़ेगा, यह तो भविष्य की गर्भ में है!

फिलहाल आप इस पूरे घटनाक्रम का  शॉर्ट डिस्क्रिप्शन सुनिये! 29 मई को रायगढ़ के 265 घरों में निगम का एक नोटिस जाता है और उसके ठीक 15 दिन बाद 14 और 15 जून, वार शनिवार और रविवार ( वो खास दिन जब कोर्ट के दरवाजे लगभग बंद रहते हैं!) को प्रशासन का एक ऐसा तोड़फोड़ एक्शन होता है, जिसकी वायरल वीडियो और तस्वीरें देखकर रायगढ़ के हर आम आदमी की  रूह का कल्पला गई! रोते हुई माताएं-बहने, रौंदे हुए घर, बच्चों के आसू!  और इन वेदनाओं पर ‘जले में नमक’ का काम किया,  बीजेपी के सोशल मीडिया वॉलिंटियर्स ने, जिन्होंने किसी ‘खास-आदमी’ को महान बताने के लिए इन ‘आम-आदमीयो’ गंदा और तुच्छ और निम्न दिखने में कोई कसर नहीं छोड़ी!

फ़िर कांग्रेस आई

14 जून को जब रायगढ़ प्रशासन पूरे अपने दल बल के साथ प्रगति नगर पर बेजा कब्जा हटाने के लिए धावा बोलती है। तब विपक्ष में बैठी कांग्रेस जागती है ! आनन फानन में जागते ही अपने जिला कार्यालय से 75 कदम की दूरी पर स्थित रायगढ़ विधायक और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के कार्यालय पर धावा बोलती है, करीब 20-25 कांग्रेसियों के साथ! वह भी तब जब कार्यालय में मंत्री नहीं होते, बगल में ही पुलिस कप्तान का बंगला है, वह आते हैं और उनके आते ही आंदोलन खत्म! कुल मिलाकर लगभग 10 से 15 मिनट का आंदोलन! हमारे संवाददाता वहां थे, जब कांग्रेस कार्यालय से रैली निकाली। गर्मी प्रचण्ड थी, वह कोल्ड ड्रिंक पी रहे थे, कोल्ड ड्रिंक खत्म कर, कवर करने पहुंचे तो पता चला कि यह विराट आंदोलन ही खत्म!

कांग्रेस फिर से आई

प्रदेश में बैठे आलाकमान को इस बात की खबर दी जाती है या समझ लो दे दी जाती है। 14 जून को ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा पूर्व मंत्री उमेश पटेल के नेतृत्व में रायगढ़ और सारंगढ़ के कुल पांच विधायक, रायगढ़ के दो जिला अध्यक्ष और निगम नेता प्रतिपक्ष की एक जांच कमेटी बनाई जाती है। जिनको कहा जाता है की अविलम्ब प्रभावित क्षेत्र में जाकर पीसीसी को रिपोर्ट प्रस्तुत करें। अगले दिन 15 जून को जांच दल में शामिल,  विधायक लेवल का कोई भी जांचकर्ता वहां नहीं पहुंचता, बेचारी जिला कांग्रेस वहां अकेले अपने दम पर आंदोलन करती है। 15 जून की शाम तक सब उजड़ जाता है!आखिरी में 16 जून को खुद प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को आना पड़ता है, उसके बाद ही बाकी के चार विधायक आते हैं। हो सकता है संगठन और विधायकों में कोई ईगो प्रॉब्लम हो। वे आते हैं, दुःख सुनते हैं, दुःख जताते हैं,  पर कोई कदम ठोस धरातल पर नहीं दिखता!

कांग्रेस की जांच कमेटी पर पीसीसी का आदेश

साहेब की एंट्री

पूर्व कलेक्टर और वर्तमान रायगढ़ विधायक और सूबे के फाइनेंस मिनिस्टर ओपी चौधरी जिनको प्यार से उनके चाहने वाले साहेब बुलाते हैं। सूत्र बताते है कि  16 जून की ही रात को साहेब आते हैं! रात को अपने किसी ख़ास के शुभ कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अगले दिन सरिया में जन सरोकार का काम करते हैं! रायगढ़ के लिए उनका फेसबुक अकाउंट फिर एक्टिव हो जाता है। फिर से फ़ोटो और कथन आने लगते है।

रायगढ़ के सरिया के कार्यक्रम में मंत्री ओपी चौधरी

‘कहर ‘ वाले के बाद  ‘जान’  ! कहीं मचा ना दे फ़िर से कोहराम

17 जून को डिजिटल मीडिया से लेकर उनके फेसबुक वालंटियर एक वीडियो वायरल करते हैं! उस वीडियो की शुरुआत ही मंत्री जी के कुछ तरह के शब्दों से होती है..

‘3 साल में भैया, इतना कुछ करेंगे की जान लगा देंगे, दिन-रात..’

मगर मौजूदा हालातो को देखकर भयभीतो का सवाल यह है कि “अगली बार किसकी औऱ कितनी जान..??”

देखा जाए तो जान चाहे अपनी हो या किसी और की, हर किसी गुहार पर ‘जान का दांव’ लगाना सही नही! इस बार ही देखिये ना..  किसी के लिए सिर्फ एक सड़क बनाने में ही कितनो की जान दाव पर लग गयी!

हालिया बिकी बंद पड़ी जूटमिल का बैकएंड बाउंड्री जिससे सटकर नई सड़क जाने वाली है।

वैसे हमारे विधायक ओपी चौधरी हाईली क्वालीफाईड और जुनूनी व्यक्ति है। उनका प्रोग्रेस कार्ड भी यही बताता है। रायगढ़ के एक छोटे से गांव बायंग से निकल कर आईएएस होना, फिर नेता बनना, चुनाव हारना, फिर से जीतना, मंत्री बनना! मगर कभी-कभी उनकी बॉडी लैंग्वेज और जुनून का यही कॉम्बिनेशन उनपर भारी पड़ जाता है। जैसे खरसिया चुनाव मे उनका इसी कॉम्बिनेशन के तहत शब्दो का चयन ‘क़हर बनकर टूटूँगा’ जिसने  उनकी पक्की जीत को मामूली हार में बदल दिया। वो उस समय भी सही ही बोल रहे थे औऱ हो सकता है ‘जान लगा देंगे’  पर भी आज सही ही बोल रहे हो। मगर उनके इस कॉम्बिनेशन से जो उनका attitude और जो शब्द बाहर आता है, बतौर मोटिवेशनल स्पीकर तक तो ठीक है पर सोशली और पॉलिटिकली.. उनके लिए घातक बन जाता है!

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