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नया मरीन ड्राइव: बिना बीमारी के ही कर दिया ऑपरेशन या इसके पीछे कोई हिडन एजेंडा..??

रायगढ़। बीते 14 और 15 जून को नए मरीन ड्राइव के निर्माण के लिए रायगढ़ प्रशासन द्वारा केलो नदी के किनारे बसे प्रगति नगर पर युद्धस्तर तोड़फोड़ की गई। दो दिनों के भीतर ही जहां मकान हुआ करते थे, अब वह ईट गारो के मैदान बन गए। स्थानीय विधायक और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के द्वारा इस नये मरीन ड्राइव को रायगढ़ के विकास और ट्रैफिक लोड को दुरुस्त करने के लिए मास्टर प्लान बताया जा रहा है। मगर इस मास्टर प्लान के उद्देश्य से ही लोग कंफ्यूज है। लोगों के मन में सवाल है ? खास करके वहां के स्थानीय रहवासियों में..? 3 दिन तक लोगों से चर्चा करने के बाद.. जानिए ऐसी कौन से सवाल हैं, जो किसी अखबार या मीडिया में नहीं मगर लोगों के बीच चर्चा में है।

पहला सवाल ये कि इस जगह पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक लोड है..? इसलिए भयानक तोड़फोड़ कर नई सड़क बनाई जा रही है।  मगर किसी के समझ में ये नहीं आ रहा, कि लोड हैं तो आखिर है कहाँ..??

बिना बीमारी के कर दिया ऑपरेशन..??

यहां से रोज गुजरने वाले लोगों को ट्रैफिक लोड कम करने वाली बात भी हजम नहीं हो रही। इसके पीछे तर्क यह है कि जिस जगह मरीन ड्राइव बन रही है। उसके आसपास शायद ही कभी जाम लगा हो या ट्रैफिक लोड जैसी स्थिति उत्पन्न हुई हो। इसके ठीक दूसरी छोर पर लंबा चौड़ा गौरव पथ बना हुआ है। वहां भी ट्रैफिक लोड जैसी कोई भी प्रॉब्लम नहीं है!  इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि कबीर चौक पर लगा ट्रैफिक सिग्नल है। जो धरातल किसी काम का नहीं है और आने जाने वालों की इसकी परवाह भी नहीं है। जब सड़क खाली है तो रुकने का कोई औचित्य बनता ही नहीं। इसलिए लोग भी निकल जाते हैं।

इसलिए यहां ट्रैफिक लोड वाला मत भी शून्य साबित होता दिख रहा है। जब लोड ही नहीं है तो कम क्या करना है! यह तो वही बात हो गई… शरीर में कोई बीमारी नहीं मगर डॉक्टर साहब खाली बैठे हैं, इसलिए ऑपरेशन कर दिए।

जहाँ जरूरत वहाँ विकास कुपोषित

अगर वाकई ट्रैफिक लोड की बात की जाए तो रायगढ़ कई दशकों से गांधी पुतला चौक, हटरी चौक लेकर सुभाष चौक ओवर ब्रिज तक हर रोज, हर शाम ट्रैफिक की मार झेलता है। अगर वाकई सड़क के चौड़ीकरण और ट्रैफिक लोड की कम करना है। तो सबसे बड़ी जरूरत वहां पर है। पता नहीं क्यों रायगढ़ का ‘विकास’ दशको से  रायगढ़ की गली-गली घूमता है मगर यहां आकर वो कुपोषित हो जता है। चलना तो दुर की बात ठीक से रेंग भी नहीं पाता!

केलो मैया और रायगढ़ की सुंदरता पर चार चांद लगने वाली बात

चलिए इसके दूसरे मत को भी देख लेते हैं। रायगढ़ के इस नए वाले मरीन ड्राइव से शहर और केलो मैया की सुंदरता में चार चांद लग जाएंगे..?

काफी हद तक सही भी है मगर, इतिहास उठाकर देखा जाए तो मरीन ड्राइव रोड के नाम पर रायगढ़ वालों के साथ सिर्फ ठगी हुई है। पहले भी नदी के दोनों छोर पर कई मरीन ड्राइव बने हैं, वह भी नए वाले कि तरह एसईसीएल के जन कल्याणकारी कार्यों से हुऎ हैं। इनकी दुरदशा देख लीजिए, खुद ऐसी  SECL जीएम ऑफिस के सामने मरीन ड्राइव की दुरदशा ऐसी है, कि सड़क है मगर उसके ऊपर से डामर गायब है, खम्बो पर लाइट नहीं है, उन पर जंग की चादर लगी हुई है। नदी के किनारे कहीं रेलिंग नहीं है, नदी के किनारो पर कचरो का अम्बार लगा हुआ है। सड़क किनारे शराब की बोतल डिस्पोजल चकना के अवशेष है। सांच को आंच क्या..?मौसम अच्छा है, आप भी इस दर्शनीय स्थल पर घूम कर आइये! दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

कोई बहुत बहुत बड़ा भी नहीं है रायगढ़, आप कितनी बार आपनी फैमिली को लेकर गए होंगे इस दर्शनीय स्थल पर..?? मगर इस बार सैकड़ो घर उजाड़ कर फिर से एक और मरीन ड्राइव बनाया जाएगा। मगर कितने दिनो तक मरीन ड्राइव जिंदा रहेगा.. इसका भगवान ही मालिक है..!

मामले का तीसरा और सबसे चर्चित एंगल

इस पूरे प्रभावित क्षेत्र में दौरा करने के पश्चात लोगो से हमें यह बात मालूम हुई कि इस मामले में एक तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। रायगढ़ की सबसे पहली और रहस्यमई मिल जूटमिल और उसकी 38 एकड़ जमीन! वहां के बासीदें कहते हैं कि है जूटमिल की जमीन फिर से एक बार किसी की ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में धरातल पर आ रही है। सभी कानूनी अडचनों को धीरे-धीरे दूर किया जा रहा है। नए मरीन ड्राइव के बिना यह प्रोजेक्ट लगभग फैल हो जाएगा..??  फिलहाल आर्टिकल काफी लंबा हो गया है। इस पर चर्चा अगले अंक में करेंगे।

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