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हत्या की दिल दहला देने वाली वारदात से उठा पर्दा! फरार पति ही निकला बेरहम कातिल.. जानिए पूरा मामला

रायगढ़, 18 अप्रैल | रायगढ़ ज़िले के कापू थाना क्षेत्र से सामने आई एक रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। घरेलू कलह में गुस्से से अंधे हुए नैहर साय मांझी ने अपनी पत्नी को लकड़ी के डंडे से इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी जान ही चली गई। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था, लेकिन कापू पुलिस ने बेमिसाल तत्परता दिखाते हुए आरोपी को धर दबोचा और जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

16 अप्रैल को जशपुरनगर के पत्थलगांव थाना क्षेत्र से आई एक “संदिग्ध मौत” की मर्ग डायरी ने इस खौफनाक कांड की परतें उधेड़नी शुरू कीं। 28 वर्षीय सुरिता बाई की मौत को लेकर जब कापू थाना प्रभारी निरीक्षक रोहित बंजारे की टीम ने तहकीकात शुरू की तो सच्चाई सामने आते ही हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए।

जांच में सामने आया कि 25 मार्च की रात को मामूली घरेलू विवाद ने खौफनाक मोड़ ले लिया, जब नैहर साय ने गुस्से में आकर पत्नी सुरिता पर लकड़ी के डंडे से ताबड़तोड़ वार किए। दोनों पैर फैक्चर, जांघ, हाथ और सीने में गंभीर चोटें – सुरिता तड़पती रही, लेकिन आरोपी ने एक न सुनी। हालत इतनी बिगड़ गई कि चलना-फिरना तो दूर, वह बोल भी नहीं पा रही थी।

27 मार्च को मायके पक्ष की नजर पड़ी तो वो तुरंत उसे पत्थलगांव अस्पताल ले गए। हालत बिगड़ती देख सुरिता को रेफर कर श्री ए.जी. अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया – 29 मार्च को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयानों ने आरोपी नैहर साय की करतूत की पुष्टि कर दी। कापू पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर फरार आरोपी की तलाश शुरू की और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल किया। पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त लकड़ी का डंडा भी बरामद कर लिया।

इस ताबड़तोड़ कार्रवाई को अंजाम देने में पुलिस अधीक्षक श्री दिव्यांग पटेल के निर्देशन, एसडीओपी धरमजयगढ़ श्री सिद्दांत तिवारी के मार्गदर्शन और थाना प्रभारी रोहित बंजारे की सतर्क निगरानी की अहम भूमिका रही। इस कार्रवाई में प्रधान आरक्षक हेमंत चन्द्रा, जयशरण चंद्रा और टीम के अन्य सदस्य – विभूती सिंह, इलियाजार टोप्पो, कन्हैया भगत, प्रीतम तिर्की, मनोज जोल्हे और सत्या यादव ने भी जान पर खेलकर न्याय की इस लड़ाई में अपनी भूमिका निभाई।

कहानी सिर्फ घरेलू हिंसा की नहीं, बल्कि समय रहते जागरूकता और सख्त कानून की ज़रूरत की है। सवाल ये है – क्या अगली सुरिता को हम बचा पाएंगे?

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