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ग्राउंड सच: मा विहार पर प्रशासन के हाईटेक घर का दावा सच से कोसो दूर! कहीं खिड़की नहीं, तो कहीं दरवाजे नहीं, छत से टपकता पानी, गंदगी

रायगढ़। कथित विकास के नाम पर बीते शनिवार रविवार को प्रगति नगर में प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई। गंदी और अवैध बस्ती बोलकर, सैकड़ो मकान को जमीदोंज करने के पश्चात.. उन्हें शहर से 6KM दूर की दो कॉलोनियों में सालों से बंद पड़े EWS मकान में ट्रांसफर किया गया। भाजपा और प्रशासन द्वारा समाचार पत्रों में प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इन घरों को हाईटेक घर का नाम दिया गया था। बताया गया था कि विस्थापित अपना घर टूटने के पश्चात भी यहां बहुत खुश है।

मा विहार कॉलोनी पर भाजपा और प्रशासन की इस दावे की पोल तब खुली। जब बीते बुधवार को कांग्रेस का निगरानी दल वहां पहुंचा। कैंपस में जगह-जगह फैली गंदगी, किसी मकान की छत टपक रही थी। कहीं खिड़कियां नहीं थी तो कहीं के दरवाजे गायब है। नल तो था मगर पानी नहीं। बिजली तो थी मगर पंखे नहीं। बिजली के तारो में भी पानी का सीपेज।

कांग्रेस के निगरानी दल को देखकर वहां पर कथित विकास के नाम पर बलि चढ़ा दिए गए प्रभावितों ने अपना दर्द खुलकर निगरानी समिति को बताया। इसके वीडियो भी सोशल मीडिया में काफी वायरल हो रहे हैं।

इतना ही नहीं प्रशासन की व्यवस्थापन की नीतियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहां एक ऐसा परिवार भी मिला जिसके परिवार में एक बुजुर्ग दिव्यांग है, उसे चलने फिरने में असक्षम है लेकिन उन्हें दूसरी मंजिल में मकान दे दिया गया है।

पब्लिक को दिखाया गया सिर्फ आधा सच

प्रशासन द्वारा दावा किया गया है कि हर एक परिवार में व्यस्क सदस्यों को अलग मकान दिया गया है मगर अभी तक यह पूरा सच नही बना है। कुछ लोगों को आबंटित हुई है मगर संयुक्त परिवार में रह रहे कई लोगों को अभी भी इन छोटे से मकान में रहना पड़ रहा है।

भाजपा के द्वारा वीडियो जारी कर यह भी बताया गया कि वहां व्यवस्थित लोग काफी खुश हैं मगर यह पूरा सच नहीं है। जिनके मकान अल्बेस्टर सीट के या जो किराए में रहते थे। उन्हें पक्का मकान मिल गया लेकिन इनमें से बहुत से परिवार मिडिल क्लास फैमिली से थे। जिनके खुद के पक्के मकान थे, अपने हिसाब से हर सुविधा थी, उनकी तो सरकार ने दुनिया ही उजाड़ दी।

महीना भर लगेगा

जिला प्रशासन के द्वारा तोड़फोड़ तो पूरी शुरू नियोजित ढंग से की गई थी। मगर विस्थापन के बारे में कोई योजना नहीं थी। विरोध के दबाव में और अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए उन्हें शहर से 6 किलोमीटर दूर भेज दिया गया। इन मकानों को हाईटेक करना तो  दूर फिलहाल सब कुछ नार्मल करने में भी कम से कम एक महीना लगेगा या समझ लो कि जब तक माहौल चल रहा है तब तक प्रशासन एक्टिव है। माहौल खत्म तो काम खत्म।

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