रायगढ़। जिले में औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते कई श्रमिक परिवारों को उनका हक अब तक नहीं मिला है। दुर्घटनाओं में श्रमिकों की मृत्यु के बावजूद, एक साल बीत जाने पर भी मृतक कर्मचारियों के परिजनों को पेंशन नहीं मिल रही है।
ईएसआईसी नियमों के अनुसार, जिन कर्मचारियों का वेतन 21 हजार रुपए प्रतिमाह या उससे कम होता है, उनके परिवार को दुर्घटना में मृत्यु की स्थिति में मासिक पेंशन का अधिकार होता है। बावजूद इसके, जिले से जुड़े कई मामलों में यह प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूरी नहीं की गई।
एक मामला जेएसपीएल से जुड़ा है, जहां 4 अक्टूबर 2024 को श्रमिक रामकुमार भारद्वाज की कार्यस्थल पर मौत हो गई थी। मृतक ईएसआईसी में पंजीकृत था, इसलिए परिवार को शीघ्र पेंशन मिलनी चाहिए थी। लेकिन घटना के एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी फाइल लंबित है।
इसी तरह चंद्रशेखर भुइयां, निवासी जुनवानी, की 27 नवंबर 2024 को नलवा स्टील एंड पावर तराईमाल में कार्य करते समय मृत्यु हो गई। इस प्रकरण में भी करीब एक साल बीत जाने के बाद भी ईएसआईसी की ओर से अब तक मासिक पेंशन निर्धारण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।
इन मामलों से श्रमिक संगठनों और परिजनों में नाराजगी है, जो आरोप लगा रहे हैं कि हर माह कर्मचारियों के वेतन से अंशदान काटने और कंपनियों से योगदान लेने के बाद भी ईएसआईसी समय सीमा में लाभ नहीं दे पा रहा। श्रमिक परिवारों का कहना है कि अगर समय पर पेंशन जारी होती, तो अचानक कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद रोजी-रोटी का संकट कुछ हद तक कम हो सकता था।
इन दोनों मामलों से स्पष्ट होता है कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम श्रमिकों और उनके परिवारों के प्रति गंभीर नहीं है। कर्मचारियों के वेतन से प्रतिमाह अंशदान काटा जाता है, और कंपनी भी उतनी ही राशि ईएसआईसी को जमा करती है। इसके बावजूद, दुर्घटना के बाद सहायता और पेंशन की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने से श्रमिक परिवार आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहे हैं।



