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खरसिया में चल रहा खाद सब्सिडी का संगठित गिरोह: किसान ने खरीदी एक बोरी खाद, और खाते में चढ़ गई 34 बोरी और 33993 रुपए की सब्सिडी.. जानिए पूरा मामला

रायगढ़ । जिले के खरसिया क्षेत्र में खाद की खरीदी सब्सिडी और कालाबाजारी एक बड़ा खेल उजागर हुआ है। यहां एक किसान ठगी का शिकार हुआ है, उसने आरोप लगाया है कि उसने संतोष ट्रेडर्स से एक बोरी खाद खरीदी लेकिन उसके खाते में 34 बोरी खाद की की खरीदी और 33993 की सब्सिडी चढ़ गई।

दरअसल खरसिया ब्लॉक के ग्राम महुआपाली के किसान भरत पटेल स्थानीय सहकारी समिति से यूरिया न मिलने पर खरसिया शहर के अग्रसेन चौक स्थित संतोष ट्रेडर्स पहुंचे और यहां से एक बोरी नीम कोटेड यूरिया नगद 450 रुपये में खरीदी। खरीद के समय दुकान संचालक ने भरत पटेल का आधार कार्ड लिया और पॉश मशीन से बायोमेट्रिक सत्यापन कर बिक्री दर्ज की। लेन‑देन के कुछ ही समय बाद किसान के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर उर्वरक विभाग की ओर से DBT Fertilizer सिस्टम से एक SMS आया, जिसने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए।

SMS में क्या दिखा

किसान के मोबाइल पर प्राप्त मैसेज में एक इनवॉइस नंबर के साथ यह जानकारी दर्ज थी कि भरत पटेल ने M/s संतोष ट्रेडर्स से नीम कोटेड यूरिया (45 किलो) 20 बोरी और MOP (50 किलो) 14 बोरी खरीदी है। मैसेज के अनुसार कुल बिल राशि 26,810 रुपये दिखाई गई, जबकि सरकार की ओर से वहन की जाने वाली खाद सब्सिडी की राशि लगभग 33,993 रुपये दर्ज थी। यानी DBT सिस्टम में किसान के नाम पर कुल 34 बोरी खाद की बिक्री रिकॉर्ड हो गई, जबकि जमीन पर उसने सिर्फ 1 बोरी ली थी।

किसान के मोबाइल आया खरीदी का मैसेज

मांगने पर नहीं दिया बिल

एसएमएस पढ़ने के बाद किसान को संदेह हुआ। उसने संतोष ट्रेडर्स से बिल मांगा, मगर मांगने पर भी पक्का या कच्चा बिल नहीं दिया। डीलर ने दुकानदार से कहा कि कभी-कभी ऐसा हो जाता है टेक्निकल गड़बड़ी के कारण।

आखिर किसको मिली खाद और इसकी सबसिडी..??

उर्वरक सब्सिडी पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा कंपनियों को दी जाती है और राज्यों के जरिए बिक्री व स्टॉक पर निगरानी रखी जाती है। रिकॉर्ड में अगर 34 बोरी दिखाई देती हैं तो सरकार की बही में उतनी ही सब्सिडी का भुगतान माना जाएगा, जबकि खेत में सिर्फ 1 बोरी पहुंची है, जिससे सब्सिडी का घपला साफ साफ दिख रहा है। क्योंकि किसान को ना ही इतनी खाद मिली और नहीं सरकारी सब्सिडी। मगर सरकारी रिकॉर्ड में किसान के नाम दर्ज हो गई! तो सवाल यह है कि आखिर किसको मिली खाद और इसकी सबसिडी..??

फ़िलहाल किसान के लिए खतरा यह है कि सिस्टम में उसकी खरीदी लिमिट पहले ही फुल दिख सकती है और आगे सीज़न में उसे खाद मिलने में दिक्कत आ सकती है।

सिस्टम एरर या जानबूझकर हेरफेर?

विशेषज्ञों के अनुसार केंद्र सरकार का DBT उर्वरक सिस्टम पॉश मशीन से दर्ज बिक्री डेटा को सीधे सर्वर पर भेजता है और उसी आधार पर किसान को SMS अलर्ट जाता है। अगर POS पर मात्रा (क्वांटिटी) गलत डाली जाए, तो सिस्टम अपने‑आप उसी आधार पर कुल बिल और सब्सिडी की रकम जोड़कर मैसेज भेज देता है।

ऐसे में दो सवाल खड़े होते हैं: क्या यह सिर्फ डीलर/ऑपरेटर की लापरवाही है, या फिर किसी खास मंशा से किसान के नाम पर जरूरत से ज्यादा खाद दिखाकर सब्सिडी और स्टॉक में हेरफेर की कोशिश की गई?

इस कहानी से साफ हैं कि वितरण में ‘प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण’ (DBT) का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर सब्सिडी का गलत लाभ उठाया जा रहा है, जिससे एक ओर तो सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर कागजों में स्टॉक खत्म होने के कारण खरसिया सोसाइटी जैसे स्थानों पर वास्तविक किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। इस गंभीर मामले की सच्चाई उजागर करने के लिए कृषि विभाग और उर्वरक नियंत्रक अधिकारी को फर्म संतोष ट्रेडर्स और इस तरह के सभी फर्मो के POS लॉग, दिनभर की बिक्री प्रविष्टि, गोदाम स्टॉक का मिलान और जांच करना होगा। ताकि इस तरह के संगठित सब्सिडी घोटालों पर अंकुश लगाया जा सके।

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