रायगढ़। खरसिया के परासकोल हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस हिरासत में लिए गए एक संदिग्ध युवक (रमेश चौहान) की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने पुलिस पर बेरहमी से मारपीट का आरोप लगाया है, जिससे युवक को एक साइड पैरालिसिस (लकवा) मार गया है और उसे गंभीर हालत में रायपुर रेफर किया गया है।
हालांकि खरसिया पुलिस ने इस पूरे मामले को निराधार बताया है। उन्होंने कहा है कि वह आदतन शराबी है। थाने में ही वह काफी नशे में आया था। मेडिकल रिपोर्ट में भी उसके साथ कोई मारपीट की बात नहीं आई है।
खबर के मुख्य बिंदु:
- सोमवार को परासकोल के खेत में 35 वर्षीय अनिल चौहान की लाश मिली
- सोमवार मर्डर केस में पूछताछ के लिए खरसिया पुलिस ने रमेश चौहान को लिया था हिरासत में
- परिजनों का गंभीर आरोप: पुलिस के टॉर्चर और मारपीट से युवक को लगा लकवा
- सीटी स्कैन में सिर में खून का थक्का जमने की पुष्टि, हालत बिगड़ने पर रायपुर रेफर
- एसडीएम ने परिजनों को 5000 रुपये की फौरी मदद देकर एंबुलेंस से भिजवाया रायगढ़
- पुलिस ने इस आरोप को बताया निराधार, कहा – वह आदतन शराबी
- मंगलवार को रायगढ़ पुलिस ने इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने का दावा किया
- पुलिस ने बताया कि 20 वर्षीय राहुल यादव ने हत्या करने की बात कबूली है

स्वस्थ गया था थाने, अस्पताल में मिला लकवाग्रस्त
सोमवार को परासकोल में युवक अनिल चौहान की हत्या के मामले में खरसिया पुलिस ने संदेहियों से पूछताछ कर रही थी। इसी सिलसिले में पुलिस ने संदेह के आधार पर गांव के ही रमेश चौहान (पिता स्व. मोहन चौहान) को भी पूछताछ के लिए थाने बुलाया। क्योंकि उसने हत्या की रात मृतक के साथ दारू पार्टी की थी।
वीडियो: पीड़ित के बड़े भाई का बयान
रमेश की पत्नी और बड़े भाई का सीधा आरोप है कि रमेश सुबह बिल्कुल स्वस्थ हालत में थाने गया था। लेकिन कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने गांव के सरपंच को फोन कर सूचना दी कि रमेश की तबीयत खराब है। रमेश के भाई को पुलिस ने उसकी सुपुर्दगी का कागज थमा दिया और उसका इलाज करवाने को कहा।
वीडियो: पीड़ित की पत्नी ने बताई आपबीती
जब घबराए हुए परिजन खरसिया अस्पताल पहुंचे, तो देखा कि रमेश के शरीर का एक हिस्सा पैरालाइज (लकवाग्रस्त) हो चुका था और वह ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था। परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि पुलिस की बेरहम मारपीट की वजह से ही उसकी यह हालत हुई है।
पिकअप में लादकर पहुंचे तहसील, सिर में जमा खून
पुलिस की इस कथित बर्बरता से आक्रोशित परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण रमेश को पिकअप वाहन में ही डालकर खरसिया तहसील कार्यालय पहुंच गए। वहां पीड़ित की पत्नी ने रो रोकर एसडीएम प्रवीण तिवारी को अस्पताल के पर्चे दिखाए और पुलिस के टॉर्चर की शिकायत की।
एसडीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत परिजनों को 5000 रुपये की आर्थिक सहायता दी और निजी एंबुलेंस की व्यवस्था कराकर रमेश को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज भिजवाया।
रायगढ़ में जब रमेश का सीटी स्कैन हुआ, तो उसके सिर में खून का थक्का जमने की पुष्टि हुई। हालत में कोई सुधार न होने पर डॉक्टरों ने उसे देर रात रायपुर रेफर कर दिया है।
वीडियो: एसडीएम कार्यालय पर के अंदर पीड़ित की पत्नी और परिजन
खरसिया एसडीओपी बोले आरोप निराधार
इस मामले में खरसिया एसडीओपी प्रभात पटेल ने बताया कि मारपीट और टॉर्चर के सारे आरोप निराधार और बेबुनियाद है। वह (रमेश चौहान) एक शराबी प्रवृत्ति का है। हत्या की रात उसने मृतक के साथ शराब पार्टी की थी। पूछताछ के लिए जब उसे थाना बुलाया गया, उसे वक्त भी वह अत्यधिक शराब के नशे में था। हमने उसे तुरंत अस्पताल भेजा। डॉक्टरी मुलायजा में भी मारपीट के कोई निशान नहीं है। वह आदतन शराबी है अन्य किसी कारण से परिजन इस तरह का आरोप लगा रहे हैं।
वीडियो: एसडीओपी खरसिया हत्याकांड और पुलिस पर लगे आरोप के बारे में बताते हुए
पुलिस का केस सॉल्व करने का दावा
मंगलवार को रायगढ़ जिले के खरसिया (परासकोल) में हुए अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने का पुलिस ने दावा किया है। पुलिस एसडीओपी ने बताया कि जांच के दौरान मृतक की बहन ने उन्हें बताया कि एक युवक राहुल यादव उधार पैसे को लेकर मृतक के बारे में पूछताछ करने घर आता था। पुलिस ने जब उससे पूछताछ की तो उसने बताया कि करीब तीन महीने पहले रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर मृतक ने उससे ₹3000 लिए थे, उस रुपए वापस मांगने पर उसके साथ गाली गलौज कर, रुपया वापस करने से मना कर दिया।

इसी बात बात को लेकर रविवार 28 फरवरी की रात को दोनों के बीच फिर झगड़ा हुआ। इसी लेन-देन के विवाद में एक 20 वर्षीय युवक ने धारदार हथियार से अनिल चौहान की हत्या कर । पुलिस ने आरोपी राहुल यादव को गिरफ्तार कर आलाकत्ल (चाकू) और बाइक जब्त कर ली है। आज उसे माननीय न्यायालय ले जाया गया है।
अंततः
इस पूरे मामले को देखा जाए तो केश सॉल्व हो गया! निर्दोष अस्पताल में है! थाने में कुछ तो हुआ हैं..? मगर यहां स्थिति यह है कि “जंगल में मोर नाचा किसने देखा..?” कौन सच्चा, कौन झूठा..?
इसलिए अगर आरोप है तो जांच भी होनी चाहिए। मारपीट के साथ साथ जैसा कि परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस सिर्फ अस्पताल में भर्ती कराकर चली गई। जब वो लोग वहां पहुंचे तो वहां पर कोई भी नहीं था। यहां मानवता को लेकर भी प्रश्नचिन्ह है..? दोषी नहीं तो निर्भय रहिए, जांच होने दीजिए। न्याय की यही तो खासियत है।
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