छोड़कर सामग्री पर जाएँ

खोदा पहाड़ निकली चुहिया: खरसिया पुलिस कस्टडी मौत का मामला बिना FIR निपटा, चक्काजाम खत्म..

रायगढ़। खरसिया (परासकोल) में पुलिस कस्टडी के दौरान हुई रमेश चौहान की मौत और NH-49 बोतल्दा पर हुए भारी बवाल का अंत एक बेहद चौंकाने वाले ‘समझौते’ के साथ हुआ है। विधायक उमेश पटेल की मध्यस्थता के बाद प्रशासन ने महज दो आरक्षकों (सिपाहियों) को ‘लाइन अटैच’ कर और पीड़ित की पत्नी को ‘कलेक्टर दर’ की छोटी सी नौकरी का आश्वासन देकर इतने बड़े मामले को फिलहाल शांत करा लिया है।

Highlights:

  • विधायक उमेश पटेल की मध्यस्थता के बाद प्रशासन और आक्रोशित ग्रामीणों के बीच हुआ समझौता
  • कस्टोडियल डेथ के इतने बड़े मामले में बिना किसी FIR के सिर्फ दो आरक्षकों को किया गया ‘लाइन अटैच’
  • पीड़ित परिवार को न्याय के नाम पर प्रशासन ने दिया पत्नी को ‘कलेक्टर दर’ की नौकरी का लॉलीपॉप
  • बवाल शांत करने के लिए न्यायिक जांच का वादा, प्रशासन ने ग्रामीणों से मांगे 5 लोगों के नाम
  • समझौते के बाद बोतल्दा NH-49 से हटा चक्काजाम, एक गरीब की जान की कीमत पर उठ रहे गंभीर सवाल

हत्या का आरोप, लेकिन कार्रवाई सिर्फ ‘लाइन अटैच’

​कस्टोडियल डेथ को लेकर बोतल्दा हाईवे पर जो आक्रोश धधक रहा था, वह विधायक उमेश पटेल के पहुंचने और प्रशासन के साथ हुई लंबी बातचीत के बाद शांत तो हो गया, लेकिन इस शांति की शर्तें सिस्टम की कार्यप्रणाली पर करारा तमाचा हैं।

​इतने गंभीर मामले में, जहां मेडिकल रिपोर्ट में सिर में ‘ब्रेन हेमरेज’ (नस फटने) की पुष्टि हुई थी और ग्रामीणों ने 7-8 अन्य लोगों को भी पीटने के सीधे आरोप लगाए थे, वहां किसी भी पुलिस अधिकारी पर हत्या (FIR) या निलंबन (Suspension) की गाज नहीं गिरी। प्रशासन ने महज अपनी चमड़ी बचाते हुए बलि के बकरे के रूप में दो आरक्षकों को ‘लाइन अटैच’ कर दिया है।

एक गरीब की जान और ‘कलेक्टर दर’ की नौकरी!

​मृतक के परिवार को न्याय और उचित आर्थिक सुरक्षा की जो उम्मीद थी, उसे प्रशासन ने ‘कलेक्टर दर’ (संविदा/दैनिक वेतन) की एक छोटी-मोटी नौकरी के वादे में समेट दिया। प्रशासन ने पीड़ित की पत्नी को नौकरी देने का आश्वासन दिया है।

​सवाल यह उठता है कि जब असली कातिल (राहुल यादव) पकड़ा जा चुका है, तो पूछताछ के नाम पर एक निर्दोष की जान लेने के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को महज़ विभागीय ‘लाइन अटैच’ करके कैसे बचाया जा सकता है? क्या एक गरीब ग्रामीण की जान की कीमत सिर्फ ‘कलेक्टर दर’ की नौकरी है?

न्यायिक जांच’ का झुनझुना और 5 नाम

​आक्रोशित भीड़ को शांत करने के लिए प्रशासन ने इस पूरे मामले की ‘न्यायिक जांच’ का वादा भी कर दिया है। इसके लिए बाकायदा ग्रामीणों की तरफ से 5 लोगों के नाम मांगे गए हैं, जो इस जांच प्रक्रिया में अपनी बात रखेंगे।

विधायक उमेश पटेल की मध्यस्थता और इस प्रशासनिक सौदेबाजी के बाद ग्रामीणों ने NH-49 से चक्काजाम खत्म कर दिया है और यातायात बहाल हो गया है। लेकिन इस पूरे ‘एंटी-क्लाइमेक्स’ ने रायगढ़ की जनता और सिस्टम को समझने वालों के मन में एक गहरा सवाल छोड़ दिया हैं…

“जब मरने वाला एक गरीब और आम आदमी हो, तो क्या न्याय का तराजू इसी तरह काम करता है?”

ख़बर शेयर करें: