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दानवीर सेठ किरोड़ीमल की विरासत पर चली ‘सरकारी कैंची’! पॉलिटेक्निक कॉलेज का नाम बदला, रायगढ़ में सुलग रही आक्रोश की आग

रायगढ़। किसी शहर का इतिहास सिर्फ ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि उन महापुरुषों के त्याग और दान से बनता है, जिन्होंने अपनी तिजोरियां खोलकर शहर को संवारा हो। रायगढ़ के लिए ऐसे ही एक ‘भामाशाह’ थे दानवीर सेठ किरोड़ीमल। लेकिन विडंबना देखिए, जिस दानी ने रायगढ़ को शिक्षा और स्वास्थ्य का पहला ढांचा दिया, आज सरकारें उन्हीं की निशानियों से उनका नाम मिटाने पर तुली हैं। ताजा मामला रायगढ़ के ऐतिहासिक ‘किरोड़ीमल शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज’ का है, जिसका नाम बदलकर रातों-रात ‘छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ कर दिया गया है। इस नामकरण ने रायगढ़ की जनता और पुराने छात्रों के मन में गहरा आक्रोश भर दिया है।

हाईलाइट्स:

  • रायगढ़ के 69 साल पुराने सेठ किरोड़ीमल पॉलिटेक्निक कॉलेज का नाम बदला गया
  • संस्थान के मुख्य द्वार पर ‘छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ का नया बोर्ड लगा
  • कॉलेज के पूर्व छात्रों ने वीडियो जारी कर जताया भारी विरोध, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
  • 2011 में अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय के नाम के साथ भी की गई थी ऐसी ही छेड़छाड़
  • रायगढ़ की जनता का सवाल- क्या नया भवन बनाने के बजाय सिर्फ महापुरुषों का नाम मिटा रही है सरकार?

1955 की धरोहर, 2026 में मिटाया नाम

सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट ने रायगढ़ में शिक्षा की नींव रखते हुए इस पॉलिटेक्निक संस्थान का निर्माण कराया था। आज भी कॉलेज के शिलालेख पर दर्ज है कि 5 फरवरी 1955 को मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल ने इस ‘किरोड़ीमल पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट’ का शिलान्यास किया था।

लेकिन हाल ही में, बिना किसी जनचर्चा के इसके मुख्य गेट पर नीले रंग का एक बड़ा बोर्ड टांग दिया गया, जिस पर “छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रायगढ़ (छ.ग.)” लिख दिया गया है। हालांकि, मुख्य इमारत के ऊपर अब भी ‘KIRODIMAL GOVT…’ के पुराने अक्षर नजर आ रहे हैं, लेकिन सरकारी कागजों और मुख्य द्वार से दानवीर का नाम गायब कर दिया गया है।

पूर्व छात्रों में भारी आक्रोश, दी आंदोलन की चेतावनी

इस नाम परिवर्तन का विरोध जमीन पर शुरू हो गया है। संस्थान से 1996 और 2001-2002 बैच में पास आउट हुए पूर्व छात्रों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा की है। पूर्व छात्रों का स्पष्ट कहना है कि वे इस नाम बदलने का कड़ा विरोध करते हैं और अगर सरकार ने वापस ‘किरोड़ीमल पॉलिटेक्निक’ नाम बहाल नहीं किया, तो आने वाले समय में एक बहुत बड़ा जनांदोलन किया जाएगा।

पॉलिटेक्निक कॉलेज के पुराने छात्रों में रोष

पूर्व छात्र का विरोध

पिछले 15 सालों से चल रहा है विरासत मिटाने का खेल

रायगढ़ की जनता के लिए यह कोई नई बात नहीं है। यह नाम बदलने की राजनीति पिछले डेढ़ दशक से रायगढ़ की छाती पर मूंग दल रही है। सोशल मीडिया और वॉट्सऐप ग्रुप्स पर चल रही चर्चाओं के अनुसार, साल 2011 में जब अमित कटारिया रायगढ़ के तत्कालीन कलेक्टर थे, तब सेठ किरोड़ीमल की पत्नी के नाम पर बने ‘अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय’ की स्मृतियों और नाम के साथ भी इसी तरह की छेड़छाड़ की गई थी।

सोशल मीडिया के माध्यम से पनप रहा विरोध

​जनता का सीधा आरोप है कि सरकारें रायगढ़ को नया इंफ्रास्ट्रक्चर या नए भवन तो दे नहीं पा रही हैं, लेकिन सेठ किरोड़ीमल के पैसों से बनी धरोहरों पर अपना नया नाम चिपकाने (रि-पैकेजिंग करने) में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।

अंततः: क्या कृतघ्न हो गई हैं सरकारें?

रायगढ़ में केजी आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज,  किरोड़ीमल सरकारी अस्पताल, स्कूल से लेकर कई मंदिर और धर्मशालाएं सेठ किरोड़ीमल की ही देन हैं। एक व्यक्ति जिसने अपनी पूरी कमाई रायगढ़ की जनता के नाम कर दी, आज उसी की संस्थाओं से उसका नाम खुरच कर मिटाया जा रहा है।

क्या ‘विकास’ का मतलब इतिहास को मिटाना होता है? क्या नई टेक्नोलॉजी का नाम देने के लिए उस नींव को भूल जाना चाहिए जिस पर यह इमारत 1955 से खड़ी है? रायगढ़ की जनता अब इस मुद्दे पर एकजुट हो रही है। अगर प्रशासन और सरकार ने समय रहते इस ‘नामकरण नीति’ पर पुनर्विचार नहीं किया, तो रायगढ़ की सड़कों पर एक बड़ा आंदोलन तय है।

— आशीष शर्मा –

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