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रायगढ़ में ‘सुशासन’ की कतार में किसान की मौत: अपना ही हक मांगने गए अन्नदाता की गई जान, कहां गए ‘पंचायत में नकद’ वाले वादे?

धरमजयगढ़/रायगढ़। जो हाथ मिट्टी चीरकर अनाज पैदा करते हैं, आज वे ही हाथ अपने हक के चंद रुपयों के लिए बैंक की लाइनों में कांप रहे हैं। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से एक ऐसी रुला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने सिस्टम की संवेदनहीनता को नंगा कर दिया है। धान बोनस की राशि निकालने अपेक्स बैंक पहुंचे एक बुजुर्ग किसान की घंटों लाइन में खड़े रहने के कारण मौत हो गई। एक तरफ ‘डबल इंजन’ सरकार के बड़े-बड़े दावे हैं, और दूसरी तरफ एक किसान है, जो खाद से लेकर धान बेचने और अब अपना ही पैसा निकालने के लिए तिल-तिल कर मरने को मजबूर है।

बैंक के बाहर पैसो के लिए कतार में खड़े किसान

हाइलाइट्स:

  • धरमजयगढ़ के अपेक्स बैंक में धान बोनस निकालने गए बुजुर्ग किसान जीयतराम की लाइन में गिरकर मौत
  • बैंक में सिर्फ एक काउंटर होने के कारण अपनी ही रकम निकालने घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं किसान
  • भाजपा के घोषणा पत्र का वो वादा निकला खोखला, जिसमें पंचायत भवन में नकद भुगतान की कही गई थी बात
  • कांग्रेस प्रवक्ता तारेंद्र डनसेना ने सरकार को घेरा, मृतक किसान को बताया ‘डबल इंजन सरकार का शहीद’
  • घटना की उच्च स्तरीय जांच और पीड़ित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा देने की उठी मांग

पसीने की कमाई, और मौत की कतार

धरमजयगढ़ ब्लॉक के सलका गांव निवासी बुजुर्ग किसान जीयतराम गुरुवार सुबह करीब 8 बजे अपनी धान की बोनस राशि निकालने के लिए अपेक्स बैंक पहुंचे थे। सिस्टम की लाचारी देखिए कि सैकड़ों किसानों की भीड़ के लिए बैंक में केवल एक ही काउंटर चालू था।

घंटों तक कतार में खड़े रहने के बाद सुबह करीब 9 बजे जीयतराम का शरीर जवाब दे गया। उन्हें चक्कर आया और वे वहीं लाइन में गिर पड़े। आसपास मौजूद किसानों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन चंद पलों में ही इस अन्नदाता ने दम तोड़ दिया। बैंक कर्मियों की सूचना पर परिजन पहुंचे और बिना पैसे के ही अपने बुजुर्ग का शव लेकर गांव लौट गए।

बुजुर्ग किसान का शव

‘घोषणा पत्र’ के पन्नों में दफ्न हुआ सरकार का ‘वादा’

यह मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस वादे की हत्या है जो चुनाव से पहले किसानों से किया गया था। भाजपा के ‘संकल्प पत्र’ (घोषणा पत्र) के पेज 13 के  बिंदु क्रमांक 1 के उप-बिंदु 2 में साफ-साफ लिखा गया था कि— “किसानों का पैसा बिना लम्बी कतारों के एक ही किस्त में पूरा भुगतान सुनिश्चित करने के लिए हर पंचायत भवन में बैंकों के नकदी आहरण काउंटर स्थापित करेंगे”

अगर सरकार ने अपना यह लिखित वादा निभाया होता और पंचायतों में काउंटर खोले होते, तो आज जीयतराम को धरमजयगढ़ के अपेक्स बैंक की उस जानलेवा लाइन में नहीं लगना पड़ता। सिर्फ एक काउंटर के भरोसे पूरे ब्लॉक के किसानों को छोड़ देना, प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा है।

विपक्ष का प्रहार: ‘यह सुशासन है या प्रताड़ना?’

इस दुखद घटना के बाद विपक्ष ने सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। जिला कांग्रेस प्रवक्ता तारेंद्र डनसेना ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “डबल इंजन सरकार के सुशासन राज में धर्मजयगढ़ में एक बुजुर्ग किसान अपनी हक की पैसा को लेने अपेक्स बैंक के सामने लाइन लगे हुए शहीद हो गया”

​उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि यह वही सरकार है जिसने किसानों को पहले खाद के लिए, फिर धान बेचने के लिए परेशान किया, और अब किसान को अपने ही हक का पैसा लेने के लिए जान गंवानी पड़ रही है। डनसेना ने घोषणा पत्र के उस वादे की याद दिलाते हुए पूछा कि ‘बिना लाइन लगे पंचायतों में पैसा देने का वादा कहां गया?’। कांग्रेस ने इस घटना की उच्च स्तरीय जांच और मृतक किसान के परिवार को तत्काल उचित मुआवजा देने की मांग की है।

अंततः: रायगढ़ का प्रशासन और सत्ता में बैठे लोग भले ही इस मौत को ‘स्वाभाविक’ बताकर पल्ला झाड़ लें, लेकिन सच्चाई यह है कि यह सिस्टम की बदइंतजामी का शिकार हुआ एक और किसान है। सवाल यह है कि क्या वादे सिर्फ चुनाव जीतने के लिए होते हैं? क्या एक किसान की जिंदगी की कीमत इतनी सस्ती है कि वह बैंक की लाइन में घुट-घुट कर मर जाए?

आशीष शर्मा

भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र का लिंक: (पेज नंबर 13 किसानों के लिए)

https://www.bjp.org/files/election-manifesto-documents/Chhattisgarh-Vision-Document-2023_0.pdf

कांग्रेस प्रवक्ता की सोशल मीडिया लिंक

https://www.facebook.com/share/p/1GJYfJ8BFA/

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