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रायगढ़ कैनाल लिंक रोड में ‘डिजाइन’ का बड़ा खेल: 12 से 18 मीटर हुई चौड़ाई, नाले के बजाय घनी बस्ती से गुजरेगी सड़क; बेघर होने के खौफ में निगम को घेरा

रायगढ़। केवड़ाबाड़ी चौक से लेकर मरीन ड्राइव (बीड़ तालाब) तक प्रस्तावित ‘कैनाल लिंक रोड’ परियोजना रायगढ़ नगर निगम के लिए एक बड़े प्रशासनिक और तकनीकी विवाद का केंद्र बनती जा रही है। आगामी 29 मई 2026 तक मकान और दुकानें खाली करने का कड़ा नोटिस मिलने के बाद वार्ड क्रमांक 11 (जोगीडीपा और इंदिरा नगर) के प्रभावित रहवासियों का आक्रोश फूट पड़ा है। इस पूरे प्रोजेक्ट के पीछे रसूखदार निजी कॉलोनाइज़र्स और बिल्डर लॉबी को अनुचित लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिसने शहर के भीतर ‘प्रगति नगर’ जैसी बेदखली के पार्ट-2 की आहट तेज कर दी है।

प्रभावितों को प्रगति नगर जैसा ही अल्टीमेटम मिला

अपनी छतों और आजीविका को बचाने की जद्दोजहद में आज बड़ी संख्या में प्रभावित महिलाएं, कामगार और स्थानीय व्यवसाई वार्ड पार्षद के नेतृत्व में नगर निगम पहुंचे। यहाँ उन्होंने निगमायुक्त (कमिश्नर) और महापौर का घेराव करते हुए सीधे तौर पर आर-पार की लड़ाई का अल्टीमेटम दे दिया है। यहां उनकी मुलाकात कमिश्नर से तो नहीं हो पाई मगर महापौर से उन्होंने अपनी बात स्पष्ट शब्दों में बता दी हैं।

प्रभावित लोग महापौर केबिन में

अलाइनमेंट में ‘बड़ा खेल’: नाले का किनारा छोड़ घनी बस्ती में घुसा दी सड़क..?

RIG24 की लीगल और खोजी टीम को मिले प्रशासनिक दस्तावेजों और प्रारंभिक नक्शों के अनुसार, इस कैनाल रोड का मूल स्वरूप और ड्राइंग पूरी तरह नाले के समानांतर (Parallel) किनारे से जाने वाली थी। विधिक और तकनीकी सिद्धांत भी यही कहता है कि कैनाल रोड जलभराव वाले बफर ज़ोन के किनारे बनाई जाए। यदि इस मूल डिजाइन पर काम होता, तो मुख्य मार्ग पर स्थित रिहायशी मकानों और व्यावसायिक दुकानों पर न के बराबर असर पड़ता।

लेकिन ग्राउंड रियलिटी यह है कि बाद में इस नक्शे में अंदरखाने भारी तब्दीली कर दी गई। नाले के खाली किनारे को छोड़कर सड़क के पूरे रुख को घनी आबादी वाले मुख्य मोहल्ले की तरफ मोड़ दिया गया। पीड़ितों का सीधा आरोप है कि पीछे कटी बड़ी-बड़ी निजी कॉलोनियों और वीआईपी फ्लैट्स को सीधा और चौड़ा रास्ता देने के लिए नगर निगम ने यह आत्मघाती ‘रूट डायवर्जन’ किया है, जिसकी कीमत गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को चुकानी पड़ रही है।

12 से 18 मीटर का ‘सरकारी हथौड़ा’: एक इंच ज़मीन भी नहीं बचेगी

​इस प्रोजेक्ट का सबसे खौफनाक और तकनीकी पहलू सड़क की चौड़ाई में किया गया रातों-रात बदलाव है। नगर निगम के मास्टर प्लान में पूर्व में इस मार्ग की चौड़ाई 12 मीटर (लगभग 40 फीट) चिन्हांकित थी, जिसे अचानक बढ़ाकर 18 मीटर (लगभग 60 फीट) कर दिया गया।

40 फीट की सड़क में जहां लोगों के आशियाने आंशिक रूप से प्रभावित हो रहे थे, वहीं 60 फीट की इस नई मार्किंग के कारण कई परिवारों की ‘एक इंच ज़मीन’ भी शेष नहीं बचेगी। तीन-चार पीढ़ियों से बसे दर्जी, किराना संचालक, सब्जी विक्रेता और दैनिक कामगार पूरी तरह से सड़क पर आ जाएंगे। कलेक्ट्रोरेट और निगम परिसर में खड़े पीड़ितों ने सीधे अधिकारियों से सवाल दागा कि

“प्रशासन शहर में कोई एक जगह तय कर दे जहाँ हमारा सब कुछ टूटने के बाद हम अपना सिर छिपा सकें।”

मौखिक आश्वासन का झुनझुना, लिखित गारंटी देने से मुकरा प्रशासन

​जन-आक्रोश को देखते हुए महापौर जीवर्धन चौहान ने प्रभावितों को उचित विस्थापन (टीवी टावर में फ्लैट देने) और कम से कम ढांचा तोड़ने का मौखिक आश्वासन तो दिया, लेकिन जैसे ही जागरूक नागरिकों ने इस पूरी पुनर्वास योजना को लिखित में (आधिकारिक हस्ताक्षर के साथ) देने की मांग की, महापौर ने साफ इंकार कर दिया। उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि लिखित नीति देना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है, यह उच्च अधिकारियों और कमिश्नर की टेबल का मामला है।

महापौर जीवर्धन चौहान मीडिया से बात करते हुए

बिना किसी ठोस लिखित वैधानिक सुरक्षा के 29 मई की यह बेदखली डेडलाइन अब शहर के भीतर एक बड़े जन-आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रही है। वहीं जिला कांग्रेस ने भी इस मामले में जांच कमेटी बनाई है। कांग्रेस भी इस बार इस मुद्दे को लेकर पीछे नहीं हटने वाली!

निगम दफ्तर में पीड़ित परिवार

सीधी बात

विकास के नाम पर आम जनता को उजाड़ने की यह प्रशासनिक जिद कई बुनियादी सवाल खड़े करती है। जिस अंदरूनी क्षेत्र में भारी यातायात या कमर्शियल ट्रैफिक का कोई दबाव ही नहीं है, वहाँ नाले से एक किलोमीटर दूर घनी बस्ती के भीतर 60 फीट चौड़ी सड़क की क्या विधिक आवश्यकता है? बिना किसी सुदृढ़ और लिखित विस्थापन नीति के किसी गरीब की पैतृक ज़मीन पर बुलडोजर चलाने की अनुमति देश का कानून नहीं देता। जिला प्रशासन और नगर निगम को 29 मई की समय-सीमा से पहले इस विवादित ‘डिजाइन परिवर्तन’ की उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए, अन्यथा रसूखदारों के रास्ते बनाने के लिए गरीबों की छाती पर चलने वाला यह बुलडोजर व्यवस्था की साख को पूरी तरह मटियामेट कर देगा।

देखे शॉर्ट विडिओ रिपोर्ट

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