रायगढ़। रायगढ़ का ऐतिहासिक चक्रधर समारोह जिसका इंतजार यहां की कला प्रेमी जनता सालभर करती है। देश विदेश में ख्याति प्राप्त कलाकार सहित छत्तीसगढ़ी कलाकार अपनी कला से मन मोह लेते हैं। 10 दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में कला की सारी विधाएं देखने और सुनने को मिलती है। फिलहाल यह ऐतिहासिक चक्रधर समारोह अपने पहले दिन से ही कंट्रोवर्सी से घिर गया है।
जिला प्रशासन की मेहनत अच्छी मगर चयन समिति ने बिगाड़ा खेल
जिला प्रशासन द्वारा इस कार्यक्रम के आयोजन और व्यवस्था में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई। सब कुछ बढ़िया था मगर कलाकार चयन समिति के निर्णय और रवैये का कारण के किरकिरी जरूर हो रही है।कार्यक्रम के पहले दिन डॉ कुमार विश्वास और उनके दल के सहयोगी कवियों ने रायगढ़ के श्रोताओं को काफी निराश किया। इसकी वजह थी कि कुमार विश्वास पिछले तीन सालों से लगातार रायगढ़ आ रहे हैं। एक बार फिर से मोटी रकम देखकर उनको बुलाना, शुरुआत से ही लोगों को खटक रहा था। लोग अब उनसे ऊब चुके हैं, बची कुछ कसर उनके बोरिंग भाषणऩुमा कार्यक्रम ने कर पूरी दी। इसके बाद छत्तीसगढ़ी लोक गायक नितिन दुबे ने चयन समिति के रवैये के कारण कार्यक्रम से किनारा कर दिया और सोशल मीडिया में अपना दर्द पोस्ट किया।
क्या है वजह, नितिन दुबे की नाराजगी की..?
1 सितंबर को चक्रधर समारोह में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी गीतकार नितिन दुबे का कार्यक्रम होना था। कार्यक्रम की फीस को लेकर चयन समिति से उनके मतभेद हुआ। कार्यक्रम की भव्यता को देखकर शुरुआत में ही गायक नितिन दुबे ने अपने मेहताने में 25% कटौती कर यहां आने का फैसला किया। पूरे शहर में उनके नाम के बैनर पोस्टर लग गए। मगर चक्रधर समारोह से एक दिन पहले उनके फीस में 50% की कमी कर दी गई और फंड की कमी का हवाला दिया गया। एक ओर जहां बड़े कलाकारों को 35 से 40 लाख तक पेमेंट किया गया। वहीं छत्तीसगढ़ी प्रसिद्ध गायक को इसकी 20 गुना कम कीमत भी देने को चयन समिति तैयार नहीं थी। उन्हें साफ साफ कहा गया कि इतने ही मेहताने में अगर वह अपना कार्यक्रम करना चाहे तो करें, नहीं तो वह छोड़ सकते हैं। नितिन दुबे ने इस रवैए को अपना और छत्तीसगढ़ी लोकल कलाकारों की अस्मिता का प्रश्न मानते हुए, इस कार्यक्रम से किनारा कर लिया और सोशल मीडिया में इसे लेकर एक वीडियो पोस्ट किया।
गायक नितिन दुबे की पहली वीडियो पोस्ट
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ट्रोल आर्मी का शिकार हुए नितिन दुबे, फिर छलका दर्द
वीडियो पोस्ट होने के बाद वह भाजपा की ट्रोल आर्मी का शिकार हुए। इसके बाद उन्होंने दूसरा पोस्ट किया कि कुछ राजनीतिक लोग उन्हें धमका रहे है और बायकॉट करने की धमकी दे रहे हैं। इसे लेकर उन्होंने काफी कुछ कहा।
उन्होंने कहा कि किसी कलाकार का अपने सम्मान के लिए लड़ना कहां गलत हो सकता है। आज छत्तीसगढ़ के हरेक गणेश पंडाल में उनके गाए भजन गीत अभी चल रहे हैं और आगामी दुर्गा पूजा में भी उनके गाए भजन भी चलेंगे। पूरे छत्तीसगढ़ में उनके कई कार्यक्रम होंगे। एक कलाकार सम्मान का भूखा होता है, पैसों का नहीं। वे कोई भीख नहीं मांग रहे हैं। वह छत्तीसगढ़ के हर एक स्थानीय कलाकार की अस्तिमता के लिए लड़ रहे है। जहां बाहरी कलाकारों पर 40-50 लाख फूंक दिए जाते हैं। वहीं छत्तीसगढ़ी कलाकारों को छोटा मानकर उन्हें इसका 5 प्रतिशत भी पारिश्रमिक भी नहीं दिया जाता। इस समारोह के चयन समिति को छत्तीसगढ़ी भाषा और छत्तीसगढ़ के लोगों का ना ही कोई ज्ञान है, ना ही कोई मोल! यही वजह है कि अपने ही प्रदेश में, अपने शहर में स्थानीय कलाकार दुर्गति का शिकार हो रहे हैं।
गायक नितिन दुबे के दूसरी पोस्ट
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ऐसा पहली बार हुआ है
फिलहाल देखा जाए तो जिला प्रशासन की व्यवस्था और कार्यक्रम के आयोजन को लेकर पब्लिक रिव्यू सब अच्छा है मगर चयन समिति के रैविए ने सब गुड़ गोबर कर दिया, यह कह सकते है! लोकल कलाकारों की अवहेलना का आरोप तो पहले भी कई बार लग चुका है, मगर अब ऐसा पहली बार हुआ है, जब सोशल मीडिया में खुलकर छत्तीसगढ़ के बड़े कलाकारों के द्वारा यह बात की जा रही है। फिलहाल समारोह भी जारी है और सोशल मीडिया में नेगेटिव माहौल भी!


