रायगढ़। (RIG24 क्राइम डेस्क): रायगढ़ पुलिस की लगातार दबिश और करोड़ों रुपए की रिकॉर्ड नकद जब्ती के बाद जिले के बड़े ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा सिंडिकेट की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। पुलिसिया रडार और चौतरफा कानूनी दबाव के बीच अब इस नेटवर्क के बड़े मोहरे खुद चलकर कानून के शिकंजे में आ रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को रायगढ़ के एक और रसूखदार सट्टा खाईवाल जसमीत बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार ने आखिरकार आत्मसमर्पण (Surrender) कर दिया।
आरोपी खुद चलकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय पहुंचा, जहां उसे हिरासत में ले लिया गया है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया है कि करोड़ों की जब्ती और गोवा विला रेड के बाद वह लगातार भारी मानसिक तनाव और फरारी के डर में जी रहा था, जिसके चलते उसने सरेंडर करना ही बेहतर समझा।
हमारे द्वारा जब पुलिस के इस ‘ऑपरेशन अंकुश’ के तहत अब तक खंगाले गए मनी-ट्रेल और डिजिटल डेटा का विश्लेषण किया, तो इस पूरे सट्टा साम्राज्य की कड़ियां बेहद शातिर और संगठित तरीके से जुड़ती नजर आईं:
1. रायगढ़ से गोवा तक… ऐसे काम करता था यह सिंडिकेट
पुलिस की अब तक की जांच में यह साफ हो चुका है कि यह नेटवर्क सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े थे।
- लोकल टू नेशनल लिंक: गिरफ्तार जसमीत बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार (निवासी गोपी टॉकीज के पास) दरअसल रायगढ़ के मुख्य खाईवाल करन चौधरी उर्फ करन अग्रवाल के पूरे सट्टा नेटवर्क का मैनेजमेंट संभालता था और खुद भी एक बड़ा खाईवाल बन चुका था।
- द गोवा कनेक्शन: यह सिंडिकेट कितना हाईटेक था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसकी मुख्य कमान गोवा के कैंडोलिम बीच पर किराए के एक आलीशान विला से संभाली जा रही थी। वहां से मध्य भारत के सबसे बड़े सट्टा सिंडिकेट ‘मन्नू नथनी गैंग’ के अमित मित्तल के साथ मिलकर मोहित सोमानी, प्रकाश वाधवानी और राहुल खंडेलवाल जैसे शातिर सटोरिये पूरा मनी-मूवमेंट ऑपरेट कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने हाल ही में दबोचा है।
2. मनी ट्रेल: पेट्रोल पंप, मेडिकल स्टोर और हवाला का खेल
इस गिरोह की सबसे बड़ी ताकत इनका शातिर ‘फाइनेंशियल सिंडिकेट’ था। सट्टे की इस काली कमाई (Black Money) को छुपाने और उसे सिस्टम में खपाने के लिए ये लोग सीधे बैंक खातों का इस्तेमाल करने से बचते थे:
- कैश डंपिंग यार्ड: सट्टे से रोज आने वाली करोड़ों की नकदी को सीधे बैंक में जमा करने के बजाय, रायगढ़ और रायपुर के कुछ परिचित कारोबारियों, स्थानीय पेट्रोल पंपों और मेडिकल स्टोरों के व्यावसायिक चैनलों के माध्यम से कैश (नकद) के रूप में डंप किया जाता था।
- हवाला नेटवर्क: इसके बाद इस कैश को कृष्ण प्राइड टावर में रहने वाले पुष्कर अग्रवाल और सुनील अग्रवाल जैसे फाइनेंस हैंडलर्स के जरिए ‘हवाला चैनल’ से सीधे दिल्ली और अन्य राज्यों के सट्टा किंगपिन तक ट्रांसफर (व्हाइट) कर दिया जाता था। ज्ञात हो कि इसी मनी ट्रेल पर कार्रवाई करते हुए पुलिस पहले ही 1 करोड़ 2 लाख 81 हजार रुपये नकद और नोट गिनने की मशीन बरामद कर चुकी है।
अब आगे क्या..??
थाना प्रभारी साइबर सेल और कोतवाली पुलिस की टीम अब जसमीत बग्गा को रिमांड पर लेकर उनके फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन, हवाला नेटवर्क के अन्य लोकल मददगारों और मोबाइल चैट के डिलीटेड डेटा (Financial and Digital Trail) को रिकवर करने में जुट गई है। पुलिस का दावा है कि इस गिरफ्तारी के बाद शहर के कई अन्य सफेदपोश कारोबारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं जो इस ब्लैक मनी को ठिकाने लगाने में शामिल थे।



