छोड़कर सामग्री पर जाएँ

शराब, सनक और एक मासूम की मौत: महज ‘चखने’ के लिए 16 साल के किशोर की पीट-पीटकर हत्या!

रायगढ़/खरसिया। समाज किस कदर हिंसक और संवेदनहीन हो चुका है, इसका एक खौफनाक उदाहरण रायगढ़ के खरसिया क्षेत्र से सामने आया है। यहाँ महज ‘चखना’ (आम) तोड़ने जैसे तुच्छ विवाद पर एक 16 वर्षीय किशोर को उसके ही साथियों ने पीट-पीटकर मार डाला। हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने लाश को बरगद के पेड़ के नीचे इस तरह लिटा दिया, मानो कोई सामान्य हादसा हुआ हो।

खरसिया पुलिस ने इस अंधे कत्ल (Blind Murder) की गुत्थी को सुलझाते हुए दो युवकों और एक नाबालिग (विधि से संघर्षरत बालक) को गिरफ्तार किया है।

हिरासत में आरोपी

शराब, सनक और एक मासूम की मौत

यह केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि समाज में फैलती उस ‘शराबी सनक’ का भयानक चेहरा है, जहाँ इंसान की जान की कीमत चंद रुपयों के चखने से भी कम हो गई है।

​पुलिस विवेचना के अनुसार, 24 मई को ग्राम बरभौना (थाना छाल) का रहने वाला 16 वर्षीय मृतक अपने साथियों चन्द्रशेखर (22 वर्ष), रघुनाथ (30 वर्ष) और एक नाबालिग के साथ डोगरमुड़ा खार (खेत) में मौजूद था। वहीं बैठकर शराब का दौर चला। नशा चढ़ने पर ‘चखना’ के रूप में आम तोड़ने की बात पर विवाद शुरू हुआ। विवाद इतना उग्र हुआ कि तीनों आरोपियों ने किशोर पर टूट पड़े। बेतहाशा मारपीट में गंभीर चोटें आईं और किशोर की मौत हो गई।

हत्यारों का शातिर दिमाग: लाश को लिटाया, दोस्तों को बोला ‘घर गया’

हत्या के बाद हत्यारों ने जो किया, वह उनकी क्रूरता को और बढ़ा देता है। उन्होंने लाश को खेत से उठाकर बरगद के पेड़ के नीचे लिटा दिया ताकि वह एक सामान्य मौत लगे। जब मृतक के बड़े भाई और एक अन्य साथी ऋषि डनसेना ने चन्द्रशेखर को फोन कर किशोर के बारे में पूछा, तो उसने निहायत ठंडे दिमाग से झूठ बोल दिया कि “वह खाना-पीना करके अपने घर चला गया है।”

कॉल डिटेल और पुलिस की सख्ती से टूटा तिलिस्म

25 मई को जब पेड़ के नीचे लाश मिली, तो मृतक के शरीर और आंखों पर गहरे खरोंच और चोट के निशान थे। शॉर्ट पीएम (PM) रिपोर्ट ने हत्या (होमोसाइडल) की पुष्टि कर दी।

कॉल डिटेल और सख्ती से टूटा तिलिस्म

25 मई को जब पेड़ के नीचे लाश मिली, तो मृतक के शरीर और आंखों पर गहरे खरोंच और चोट के निशान थे। शॉर्ट पीएम (PM) रिपोर्ट ने हत्या की पुष्टि कर दी। कत्ल का सिरा पकड़ने के लिए पुलिस ने सबसे पहले मृतक के साथी ऋषि डनसेना को उठाया। उससे पूछताछ में पता चला कि आखिरी फोन कॉल पर उसे झगड़े और चीखने की आवाजें आई थीं।

बस इसी एक ‘लीड’ (Lead) पर पुलिस ने तीनों संदेहियों की घेराबंदी कर ली। जब थाने में सख्ती से पूछताछ हुई, तो हत्यारों का तिलिस्म टूट गया और उन्होंने ‘चखने’ वाली उस खौफनाक थ्योरी को उगल दिया। पुलिस ने इस मामले में हत्या के साथ-साथ साक्ष्य छिपाने की धारा (238 BNS) भी जोड़ दी है।

RIG24 का सीधा सवाल: अपराधियों का पकड़ा जाना पुलिस की कामयाबी जरूर है (जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं), लेकिन असली सवाल समाज से है। वो कौन सी हताशा या नशा है जो 22 और 30 साल के युवाओं को एक 16 साल के बच्चे का कातिल बना रहा है? जब एक ‘नाबालिग’ दूसरे ‘नाबालिग’ की हत्या में शामिल हो जाए, तो यह पुलिसिंग से ज्यादा सामाजिक पतन का अलार्म है।

ख़बर शेयर करें: