रायगढ़। छत्तीसगढ़ के कद्दावर मंत्री और रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी के लिए पिछले कुछ दिन राजनीतिक रूप से भारी साबित हो रहे हैं। हफ्ते भर से विवादों मे फंसे उनकी अपनी ‘ग्रह दशा’ अभी ठीक चल ही नहीं रही थी कि अब उनके सबसे करीबियों में शुमार और उनके मीडिया प्रभारी गणेश अग्रवाल ने रायगढ़ की राजनीति में एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है।
गणेश अग्रवाल द्वारा सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समाज को लेकर की गई एक बेहद विवादित और जातीय टिप्पणी ने शहर में बवाल मचा दिया है। इस बेलगाम बयानबाजी के खिलाफ ब्राह्मण समाज का गुस्सा फूट पड़ा है और मामला अब रायगढ़ के कोतवाली थाने तक जा पहुंचा है। यह ऐसा दूसरी बार है इसके पहले नाई समाज पर उनकी टिप्पणी ने बखेड़ा खड़ा किया था।

विवाद की जड़: “ब्राह्मणों के श्राप से…”
विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक से हुई। भाजपा और आरएसएस की विचारधारा से जुड़े परितोष शुक्ल ने अपनी फेसबुक वॉल पर एक राजनीतिक पोस्ट किया था। इस पोस्ट पर मंत्री के मीडिया प्रभारी गणेश अग्रवाल ने एक बेहद अमर्यादित और उकसाने वाला कमेंट किया— “ब्राह्मणों के श्राप से बैले नहीं मरा करती”..

एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा किसी समाज विशेष पर सीधे तौर पर ऐसी टिप्पणी करना आग में घी डालने जैसा था। जब इस टिप्पणी का सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स में कड़ा विरोध शुरू हुआ, तो बजाय अपनी गलती मानने के, गणेश अग्रवाल इसे ‘ब्राह्मण बनाम वैश्य’ की लड़ाई बनाने पर उतारू हो गए। उन्होंने लगातार तर्क-कुतर्क कर मामले को और तूल दिया।

सभ्य समाज में मुहावरा नहीं, यह ‘कुंठित मानसिकता’ है
इस टिप्पणी ने ब्राह्मण समाज की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं पर गहरी चोट की है। समाज के लोगों का स्पष्ट तर्क है कि जो ब्राह्मण समाज सदियों से गोवंश की पूजा और रक्षा करता आया है, उसी पर ‘बैल के मरने’ (गोवंश की मृत्यु) का पाप मढ़ना एक बेहद कुंठित और विकृत मानसिकता का परिणाम है।

प्रबुद्ध जनों का कड़ा एतराज है कि किसी भी सभ्य समाज या हिंदी साहित्य में ऐसी कोई लोकोक्ति या मुहावरा मौजूद ही नहीं है। ऐसे में मंत्री के मीडिया प्रभारी ने ऐसी भाषा और शिक्षा किन ‘बदनाम गलियों’ से हासिल की है, यह तो वही बेहतर बता सकते हैं।

सोशल मीडिया पर आक्रोश और कोतवाली में शिकायत
इस घटना के बाद शहर के कई लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई है। गणेश अग्रवाल की टिप्पणी के बाद से ही ब्राह्मण समाज में भारी आक्रोश है। इसी कड़ी में आज ब्राह्मण समाज के युवा वर्ग ने एकजुट होकर सिटी कोतवाली का रुख किया और गणेश अग्रवाल के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
‘कद्दावर’ मंत्री की आड़ और पहले नाई समाज और अब ब्राह्मण समाज
रायगढ़ के राजनीतिक हलकों में यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि गणेश अग्रवाल का सोशल मीडिया पर विवादों से पुराना नाता रहा है। वे अक्सर अपनी टिप्पणियों से पार्टी और संगठन की किरकिरी कराते रहे हैं। समाज विशेष पर टिप्पणी करना उनके लिए कोई नई बात नहीं है इसके पहले वह नाई समाज के लोगों के खिलाफ भी अमर्यादित टिप्पणी कर चुके हैं। जिसके बाद तारा श्रीवास के नेतृत्व में नाई समाज द्वारा इसका जोरदार विरोध किया गया था। लेकिन हर बार एक ताकतवर मंत्री के मीडिया प्रभारी होने की ‘आड़’ उन्हें बचा ले जाती है। हालांकि, सिपहसालारों की इस मनमानी का सीधा और सबसे बड़ा राजनीतिक नुकसान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनके ‘आका’ यानी वित्त मंत्री ओपी चौधरी को ही मिलना है। उनका क्या, विधायकी बदलेगी तो मीडिया प्रभारी भी अपना पाला बदल लेंगे।

ओपी चौधरी के लिए ‘रेड अलर्ट’ वाला हफ्ता
अगर पिछले चार-पांच दिनों के घटनाक्रमों की राजनीतिक टाइमलाइन पर नजर डालें, तो मंत्री ओपी चौधरी अपने ही बुने हुए विवादों के चक्रव्यूह में घिरे नजर आ रहे हैं। इस सियासी फजीहत की शुरुआत ‘नकटी कांड’ से हुई। जब बेघर हुए पीड़ितों ने सीधे राजधानी रायपुर का रुख कर मंत्री के सरकारी बंगले का घेराव किया, इस हंगामे की आंच अभी शांत भी नहीं हुई थी कि सोशल मीडिया पर तैरते एक कथित वायरल ऑडियो ने मंत्री की साख पर सीधा प्रहार कर दिया। नगर निगम की एल्डरमैन की नियुक्ति के बाद कार्यकर्ताओं का आक्रोश भी उन्हें झेलना पड़ा। अब उनके सबसे खास सिपहसालार और मीडिया प्रभारी ने अपनी बेलगाम जुबान से ब्राह्मण समाज को नाराज कर एक ऐसा नया मोर्चा खोल दिया है, जिसकी आंच धीमे धीमे उनकी छवि को नेगेटिव बना रही है।
आईपीएस से नेता बने ‘साहब’ के लिए खतरे की घंटी
ओपी चौधरी के राजनीतिक कद और प्रशासनिक रसूख के आगे भले ही आम लोग खुलकर विरोध करने से बच रहे हों, लेकिन समाज के भीतर पनपता यह मूक आक्रोश किसी भी राजनेता के लिए शुभ संकेत नहीं है। एक पूर्व आईपीएस अधिकारी, जो अब प्रदेश के सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जाते हैं, उन्हें यह समझना होगा कि उनके करीबियों की बेलगाम जुबान उनके ही राजनीतिक किले की नींव खोखली कर रही है। जब जनता का गुस्सा वोट में तब्दील होता है, तो कोई भी रसूख उसे रोक नहीं पाता।
-आशीष शर्मा, प्रधान संपादक RIG24



