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सियासत का ‘चेस बोर्ड’: 32 साल के सट्टेबाज ने बिगाड़ा ‘सुशासन’ का खेल! ओ.पी. चौधरी का ‘सेल्फ-गोल’, फंसे चक्रव्यूह में… तो दीपक बैज ने कैमरे पर खेला ‘माइंड गेम’

रायगढ़। राजनीति के ‘शतरंज’ में एक गलत चाल कैसे पूरे खेल की बाजी पलट सकती है, इसका सबसे ताजा और सटीक उदाहरण रायगढ़ का ‘करण चौधरी सट्टा कांड’ है। वेंटिलेटर पर पड़ी छत्तीसगढ़ कांग्रेस को अचानक एक ऐसी सियासी ‘संजीवनी’ मिल गई है, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी। और सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस को यह मौका खुद प्रदेश के सबसे तेजतर्रार, विजनरी पूर्व IAS और वर्तमान वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने थाली में सजाकर दे दिया।

सट्टे के मामले का खुलासा करते हुए एसएसपी शशि मोहन, पीछे आरोपी और बगल में नोट का जखीरा

​1.03 करोड़ रुपये के सट्टा-हवाला नेटवर्क के खुलासे के बाद ओ.पी. चौधरी जिस तरह अपने ही बुने चक्रव्यूह में घिरे हैं, वह पॉलिटिकल पंडितों के लिए एक बड़ी केस स्टडी बन गया है। इस पूरे ड्रामे में जहां दिग्गज नेता सिर्फ सोशल मीडिया पर ‘सेफ गेम’ खेल रहे थे, वहीं पीसीसी चीफ दीपक बैज ने एक ‘चालाक राजनेता’ की तरह कैमरे के सामने आकर बहती गंगा में हाथ धो लिए। RIG24 की एडिटोरियल डेस्क आज डिकोड कर रही है सट्टा कांड के इस पूरे पॉलिटिकल ‘मास्टरस्ट्रोक’ को…

​बुलेट हाइलाइट्स

  • ​ओ.पी. चौधरी का ‘सेल्फ-गोल’: पुलिस के खुलासे के 1 घंटे के भीतर मंत्री जी का ‘बधाई ट्वीट’ बना उनके लिए गले की हड्डी
  • ​‘कमजोर’ कांग्रेस का हमला: भूपेश बघेल ने करण को बताया “सट्टा स्वयंसेवक”, पूछा- कप्तान का ‘वित्त’ कौन संभालेगा?
  • ​बैकफुट पर कैबिनेट: खुद को बचाने ओ.पी. चौधरी को जारी करनी पड़ी टी.एस. बाबा के साथ आरोपी की पुरानी तस्वीरें
  • दिग्गजों का ‘सेफ प्ले’: कैमरे के सामने आने से बच रहे थे बड़े नेता, सिर्फ ‘ट्विटर (X) और फेसबुक’ पर चल रहा था वॉर
  • ​दीपक बैज की ‘चालाकी’: मौके की नजाकत भांपकर पीसीसी चीफ ने कैमरों के सामने आकर सीधे ओ.पी. चौधरी को घेरा

​चक्रव्यूह का द्वार: ओ.पी. चौधरी का वो ‘जल्दबाजी’ भरा ट्वीट

राजनीति में टाइमिंग ही सब कुछ है। जब पुलिस ने 1 करोड़ कैश और सट्टा नेटवर्क का खुलासा किया, तो ओ.पी. चौधरी ने पुलिस को बधाई देने में जरा भी देर नहीं लगाई।

फ़साद की जड़,  वित्त मंत्री ओपी चौधरी का पहला जल्दीबाजी  वाला  ट्वीट (सोशल मीडिया बयान)

एक पूर्व IAS का यह ‘प्रो-एक्टिव’ रवैया था, लेकिन सियासत में इसे ‘डैमेज कंट्रोल’ मान लिया गया। विपक्ष ने इसे ऐसे पढ़ा: मंत्री जी को शायद पहले से अंदेशा था कि आरोपी के साथ उनकी तस्वीरें वायरल होंगी, इसलिए उन्होंने पहले ही ‘सफाई’ पेश कर दी। अगर मंत्री जी चुप रहते, तो मामला इतना तूल नहीं पकड़ता।

​भूपेश बघेल का तंज और ‘वित्त’ का खेल

ओ.पी. चौधरी प्रदेश के ‘वित्त मंत्री’ हैं और मामला 1 करोड़ नकद और ब्लैक मनी का था। कांग्रेस के चाणक्य पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने इसी ‘आयरनी’ (Irony) पर सबसे मारक प्रहार किया।

मंत्री ओपी चौधरी के हरबड़ी में दिए सुशासन वाले सोशल मीडिया बयान के बाद पलटवार में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का पलटवार ट्वीट

बघेल ने आरोपी करण को ‘सट्टा स्वयंसेवक’ का टैग देकर सीधा भाजपा के ‘चाल, चरित्र और चेहरे’ पर हमला कर दिया। एक दिशाहीन विपक्ष के लिए यह एक अचूक निशाना था।

​’फोटो वॉर’ का चक्रव्यूह: डिफेंसिव हुई भाजपा

जब सत्ता में बैठा कोई कद्दावर कैबिनेट मंत्री एक 32 साल के स्थानीय सटोरिए से अपना नाम अलग करने के लिए खुद ट्विटर पर सफाई देने उतर आए, तो समझ लीजिए विपक्ष ‘परसेप्शन की जंग’ जीत चुका है। भूपेश बघेल के हमले से घिरे ओ.पी. चौधरी और लोकल भाजपा को आरोपी करण की तस्वीरें कांग्रेस नेता टी.एस. सिंहदेव (बाबा) के साथ वायरल करनी पड़ीं।

करण चौधरी के अपने साथ हुई वायरल तस्वीर के पलटवार में मंत्री ओपी चौधरी का ट्वीट

एक मंत्री को अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए विपक्ष के नेताओं की पुरानी तस्वीरें निकालनी पड़ें, इसका सीधा मतलब है कि कांग्रेस उन्हें ‘डिफेंसिव’ (Defensive) मोड में लाने में कामयाब रही।

टीएस सिंह देव के ऊपर मंत्री ओपी चौधरी के खुले आरोप के बाद, टीएस सिंह देव के जवाब पर मंत्री ओपी चौधरी की सफाई

​कैमरे से बच रहे थे दिग्गज, दीपक बैज ने ‘चालाक राजनेता’ की तरह मारा मास्टरस्ट्रोक

इस पूरे सियासी घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति रही। जब भूपेश बघेल, टी.एस. बाबा और खुद ओ.पी. चौधरी जैसे मझे हुए खिलाड़ी सिर्फ सोशल मीडिया के ‘सेफ जोन’ में बैठकर तीर चला रहे थे और कैमरे से बच रहे थे, तब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने एक ‘चालाक राजनेता’ की तरह मौके को लपक लिया।

पीसीसी चीफ दीपक बैज का मीडिया के सामने दिया बयान का टिकट खुद उनके अकाउंट से

बड़े नेताओं के बीच खुद को आक्रामक और ‘असली बॉस’ साबित करने की होड़ में बैज ने सीधे मीडिया के सामने छलांग लगा दी। बैज ने बेहद आक्रामक अंदाज में कैमरे पर कहा, “वह युवक (करण) रायगढ़ का है और स्पष्ट है कि वह आरएसएस और भाजपा का कार्यकर्ता है। वह ओ.पी. चौधरी का करीबी है। टी.एस. बाबा की तस्वीर जारी करके ओ.पी. चौधरी खुद को नहीं बचा सकते।”

दीपक बैज की यह चाल एक तीर से दो शिकार करने जैसी थी..! एक तरफ उन्होंने ओ.पी. चौधरी पर सीधा हमला बोला, तो दूसरी तरफ पार्टी के अंदर अपने ‘सीनियर नेताओं’ को यह मैसेज दे दिया कि जब आप लोग कमरों में बैठकर ट्वीट कर रहे हैं, तब मैं फ्रंटलाइन पर लड़ रहा हूँ।

RIG24 का पॉलिटिकल एनालिसिस

भले ही तस्वीरों में घिरे नेता ओ.पी. चौधरी और टी.एस. सिंहदेव तर्कों में पूरी तरह सही हों कि सार्वजनिक जीवन में नेता कई लोगों के साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं, लेकिन ‘परसेप्शन’ के खेल में वो बुरी तरह उलझ गए हैं! महज 32 साल के एक स्थानीय सटोरिए के कारण पूरी पॉलिटिकल मशीनरी का एक-दूसरे पर आरोप लगाना, सफाई देना और इन सबके बीच दीपक बैज का इसे अपने फायदे के लिए भुना लेना… यह वाकई एक ‘पॉलिटिकली मास्टरस्ट्रोक’ है!


इस पूरी बिसात का सबसे गहरा सच यह है कि जहां प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को ‘सबसे कमजोर अध्यक्ष’ साबित करने में विपक्ष से ज्यादा खुद उनके अपने ही लोग (कांग्रेसी) लगे हुए हैं और काफी हद तक सक्सेस भी हुए हैं! वहीं दूसरी तरफ, ओ.पी. चौधरी को भी कमजोर साबित करने के लिए भाजपा के अंदर का ‘मनभेद और मतभेद’ (अपनों का ही दिया जख्म) इस पूरे विवाद को और हवा दे रहा है। यही आपसी खींचतान फिलहाल इस वेंटिलेटर पर पड़ी ‘कमजोर कांग्रेस’ के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है!!


राजनीति का यह ‘चेस गेम’ अभी और कितने मोहरों को गिराएगा, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। क्योंकि अब इस बिसात पर सारे मोहरे सिर्फ एक-दूसरे के खिलाफ ही नहीं, बल्कि ‘अपनों’ के खिलाफ भी लड़ रहे हैं!


“कुल मिलाकर… पिक्चर अभी बाकी है!“

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