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पेल्मा कोल माइंस: 19 मई का ‘कैंसिलेशन’ भारी, पर प्रशासन ने चली नई चाल; अब 8 जून को होगी SECL की जनसुनवाई, 9 गांवों के किसानों का ‘एकसमान मुआवजे’ पर अड़ा मोर्चा!

रायगढ़। रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में कोयला खदानों और विस्थापितों के हक की लड़ाई एक बार फिर अपने सबसे बड़े मोड़ पर पहुंच चुकी है। बीते 19 मई को भारी विरोध और प्रशासनिक दबाव के चलते जिस एसईसीएल (SECL) पेल्मा ओपनकास्ट कोल माइन की जनसुनवाई को कलेक्ट्रेट के आदेश पर ‘आगामी आदेश तक स्थगित’ करना पड़ा था, उसकी नई तारीख का ऐलान कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, अब आगामी 8 जून 2026 को इस महा-प्रोजेक्ट के लिए दोबारा लोक सुनवाई आयोजित की जाएगी।

​प्रशासन की इस जल्दबाजी ने साफ कर दिया है कि अरबों रुपए के इस कोल सिंडिकेट को चालू कराने के लिए अंदरखाने कितना भारी दबाव है। लेकिन दूसरी तरफ, तमनार बेल्ट के ग्रामीण भी इस बार आर-पार के मूड में हैं।

​2077 हेक्टेयर का साम्राज्य और 15 मिलियन टन कोयले का खेल

​एसईसीएल की यह पेल्मा ओपनकास्ट माइंस रायगढ़ जिले के इतिहास की सबसे बड़ी खुली खदानों में से एक होने जा रही है। इसके आंकड़े किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी हैं:

  • सालाना टारगेट: इस खदान से हर साल 15 मिलियन टन (15 MTPA) कोयला निकालने का मेगा टारगेट सेट किया गया है।
  • जमीन का दायरा: यह पूरा प्रोजेक्ट करीब 2077.934 हेक्टेयर (हजारों एकड़) की उपजाऊ और रिहायशी भूमि को अपने आगोश में ले लेगा।

​प्रभावित हो रहे हैं ये 9 गांव, ‘एकसमान मुआवजे’ पर ठनी रार

​इस खदान के पैर पसारते ही तमनार क्षेत्र के पेल्मा, उरबा, मडुवाडूमर, लालपुर, हिंझर, जरहीडिह, खर्रा, सक्ता और मिलूपारा गांव पूरी तरह प्रभावित होने जा रहे हैं।

RIG24 की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व में इस जनसुनवाई के स्थगित होने की सबसे बड़ी वजह भी यही थी कि इन सभी 9 गांवों के किसानों और ग्रामीणों ने साफ़ तौर पर मांग रखी है कि जमीन किसी भी गांव की जाए, सभी प्रभावित गांवों में एकसमान मुआवजा दर (Equal Compensation Rate) लागू होनी चाहिए। और दूसरी कि  ज़मीन के बदले रोज़गार! फिलहाल जमीन अधिग्रहण के इस खेल में ‘भेदभाव और शॉर्टकट’ का रास्ता ग्रामीण किसी भी हाल में बर्दाश्त करेंगे.. ऐसा लगता तो नहीं..?

सीधी बात

19 मई को जो सुनवाई टली, उसे ठीक 20 दिन के भीतर 8 जून को दोबारा रख देना यह बताता है कि सरकार और SECL के ऊपर दिल्ली से कितना कड़ा टारगेट है। लेकिन सवाल वही खड़ा है, जहां पहले था.. क्या 8 जून की इस नई तारीख से पहले प्रशासन ने इन 9 गांवों के प्रभावित किसानों की ‘एकसमान मुआवजे’ वाली बुनियादी मांग पर कोई सहमति बनाई है? या फिर सिर्फ पुलिस बल और बैरिकेड्स के दम पर इस 15 मिलियन टन सालाना क्षमता वाली खदान का रास्ता साफ़ करने की औपचारिकता पूरी की जा रही है? जनता 8 जून को ‘पब्लिक कोर्ट’ में इसका सीधा हिसाब मांगेगी।

देखिए इस मामले की शॉर्ट वीडियो रिपोर्ट, 1 मिनट से भी कम समय में

 

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