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जादुई कलश के नाम पर सनसनीखेज स्कैम : लोगों को लगाया करोड़ों का चूना! चार गिरफ्तार.. पढ़िए पूरी सनसनीखेज कहानी

जशपुर। जशपुर पुलिस ने ‘जादुई कलश’ के नाम पर चल रहे करोड़ों के ठगी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो 2021 से 2024 तक भोले-भाले ग्रामीणों को लालच देकर उनकी जमा-पूंजी लूट रहे थे। बताया जा रहा हैं कि इस स्कैम के जाल में हजारों लोग फंसे, जिन्हें विदेशी बाजार में अरबों की कमाई का झांसा देकर सदस्यता शुल्क के नाम पर ठगा गया। फिलहाल अब तक 1 करोड़ 94 लाख रुपए की ठगी सामने आई है, जो संभावित रूप से 3 करोड़ तक पहुंच सकती है।


यह सब 2021 में शुरू हुआ, जब आरोपियों ने कोरबा जिले के मंडवारानी इलाके में एक ‘जादुई कलश’ मिलने की अफवाह फैलाई। उन्होंने दावा किया कि यह कलश महंगे धातु से बना है, जिसमें अलौकिक शक्तियां हैं – जैसे चावल को अपनी ओर खींच लेना – और इसे भारत सरकार विदेश में बेचेगी, जहां इसकी कीमत अरबों रुपए होगी। फर्जी ‘आर.पी. ग्रुप’ कंपनी बनाकर उन्होंने ग्रामीणों को झांसा दिया कि कलश की कमाई का अनुदान हर सदस्य को 1 से 5 करोड़ रुपए तक मिलेगा, लेकिन इसके लिए पहले सदस्यता शुल्क, सिक्योरिटी मनी और प्रोसेसिंग फीस के रूप में 25 हजार से 70 हजार रुपए जमा करने पड़ेंगे।

जशपुर, सरगुजा, कोरबा, रायगढ़ और बिलासपुर जिलों के हजारों ग्रामीण इस लालच में फंस गए, खासकर आदिवासी बहुल पिछड़े इलाकों में जहां लोग रोजी-रोटी के लिए संघर्ष करते हैं। कई ने अपनी जीवनभर की कमाई, खेत बेचकर या कर्ज लेकर रकम जमा की, सपने में कि उनकी गरीबी दूर हो जाएगी और जिंदगी बदल जाएगी। लेकिन हकीकत में यह सब एक सोची-समझी साजिश थी। ठगों ने मीटिंग्स आयोजित कर लोगों के भोलेपन और उम्मीदों का फायदा उठाया, जिससे कई परिवार कर्ज के बोझ तले दब गए। पुलिस की जांच में पता चला कि ठगी की रकम 1.94 करोड़ से ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई पीड़ित शर्म या डर से अभी सामने नहीं आए हैं।

ऐसे हुआ खुलासा

मामले का खुलासा तब हुआ, जब कांसाबेल थाना क्षेत्र के ग्राम चिड़ौरा की 33 वर्षीय अमृता बाई ने 7 सितंबर 2025 को पत्थलगांव थाने में शिकायत दर्ज कराई। अमृता ने बताया कि वह झांसे में आकर 25 हजार रुपए जमा कर चुकी थीं, लेकिन कोई अनुदान नहीं मिला!

गिरफ्तारियां, जब्ती और फरार आरोपी
एसपी शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कड़ी मेहनत से रैकेट को ट्रेस किया, जिसमें थाना प्रभारी विनीत कुमार पांडे, सहायक उप निरीक्षक लखेश साहू और अन्य अधिकारियों की भूमिका सराहनीय रही। चार मुख्य आरोपी गिरफ्तार हुए, जबकि दो फरार हैं। गिरफ्तार आरोपियों की डिटेल्स इस प्रकार हैं:

  • राजेंद्र कुमार दिव्य (46 वर्ष), मूल निवासी जोरहा डबरी (कोरबा), वर्तमान रायपुर।
  • तुरेंद्र कुमार दिव्य उर्फ मनीष कुमार (38 वर्ष), मूल निवासी जोरहा डबरी (कोरबा), वर्तमान बालको नगर (कोरबा)।
  • प्रकाश चंद्र धृतलहरे (40 वर्ष), मूल निवासी गोढ़ीकला, थाना पत्थलगांव (जशपुर)।
  • उपेंद्र कुमार सारथी (56 वर्ष), मूल निवासी लीचीरमा, थाना सीतापुर (सरगुजा)।

फरार आरोपियों में महेंद्र बहादुर सिंह ठाकुर का नाम प्रमुख है, जिसने कलश की कहानी शुरू की थी, और एक अन्य साथी – पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। फिलहाल आरोपियों से महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन और एक कार जब्त की गई, जिनकी कुल कीमत लगभग 13 लाख रुपए है। चारों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया, और जांच जारी है।

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