रायगढ़। जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र छाल से एक समाज को झकझोर कर देने वाली घटना प्रकाश में आई है। यहां गरीब एक आदिवासी परिवार ने छाल थाना पुलिस के दो पुलिस कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यहां बीकॉम में पढ़ने वाले आदिवासी छात्र को दो पुलिसकर्मी सुबह-सुबह महुवा शराब के केस में उठाकर ले गए। फिर FIR और छात्र के करियर का डर दिखाकर 20 हजार रुपए ले लिए।
थाना प्रभारी के नाम से वसूले पैसे
इस मामले में पीड़ित आदिवासी छात्र के परिजनों ने बताया कि 5 जुलाई की सुबह 6:00 बजे छाल थाने से कुछ पुलिसकर्मी आए और बीकॉम सेकंड ईयर में पढ़ने वाले अनुराग राठिया को अपने साथ थाने ले गए। इसके बाद परिजन दौड़ते भागते थाने पहुंचे। जहां उनकी मुलाकात दो पुलिसकर्मी हरेंद्र पाल जगत और गोविंद बनर्जी से हुई। उन्होंने परिजनों को बताया कि थाना प्रभारी रायगढ़ गए हुए हैं। उनसे फोन पर बात हुई है। उन्होंने कहा है कि तीस हजार दो कैश में, तब सेटलमेंट हो जाएगा नहीं तो, तुम्हारा लड़का जेल जाएगा।

करियर खराब करने का डर
परिजनों ने बताया कि उनके पास सिर्फ पांच हज़ार थे। जिस पर वो लोग नहीं माने। बात 15 हजार तक गई, उन्होंने समझाइश दी कि टी आई साहब नहीं मान रहे हैं, पढ़ने लिखने वाला लड़का हैं। करियर खराब हो जाएगा। 20 हजार दे दो। कोई केस नहीं होगा, छोड़ देंगे।
जिस पर परिजनों ₹20 हजार की व्यवस्था की। गोविंद बनर्जी ने 20 हजार लिया। बाद में उन्हें पता चला कि 4 लीटर महुआ का केस बना दिया गया है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि छाल थाना के उन पुलिसकर्मियों ने फर्जी केस में फसाने और करियर खराब होने का दबाव बनाकर उनसे 20 हजार वसूले और केस भी बना दिया।
(वीडियो : उस पीड़ित आदिवासी परिवार की महिला की आपबीती, जिसमे उन्होंने इस बारे में पूरी कहानी बताई है। )

भरोसा कायम रखने के लिए जांच बहुत जरूरी
वैसे इन मामलों में जांच बहुत जरूरी है। खासकर की ग्रामीण अंचलों में इस तरह की घटनाएं सुनने को मिलती है। ऐसे मामलो की जाँच और कार्यवाही से लोगो में सरकार और पुलिस पर भरोसा बना रहता हैं। वरना ऐसी ही घटनाये, प्रताड़ना युवा और कमजोर वर्ग के लोगो पर दुष्प्रभाव डालती है और उन्हें भटका सकती है। घरघोड़ा में भी ऐसी शराब से संबंधित FIR और अवैध वसूली की शिकायत के बाद जांच की गई थी। जिस तत्कालीन घरघोड़ा थाना प्रभारी और दो पुलिस कर्मियों के विरुद्ध पुलिस अधीक्षक रायगढ़ द्वारा कार्यवाही हुई थी।


