रायगढ़। आज तक आपने सरकारी स्कूलों के दुर्दशा की खबरें सुनी होगी मगर आज रायगढ़ शहर में चल रहे एक प्राइवेट स्कूल की दुर्दशा या मनमानी ने हद पार कर दी है। सुरक्षा मानकों को छोड़िए यह स्कूल किराए के एक आधे अधूरे निर्मित मकान में चल रही है। जिसके कारण भविष्य में आज नहीं तो कल दुर्घटना होना तय है।
नोडल अधिकारी पहुंचे तो हुआ खुलासा
इसका खुलासा तब हुआ जब नोडल अधिकारी एक शिकायत पर स्कूल पहुंचे थे। वहां पहुंचते हुए जो नजारा दिखा, वो भी सकते में आ गया। यह स्कूल एक शासकीय शिक्षक के संरक्षण में चलाया जाता है जिसकी प्रिंसिपल उनकी पत्नी है।
(वीडियो: क्लासरूम का जायजा लेते हुए नोडल अधिकारी, खिड़कों पर ग्रिल नहीं है और कंस्ट्रक्शन का सामान खुला पड़ा हुआ है)
यह स्कूल, स्कूल के हिसाब से नहीं बना था, यह यह किसी के द्वारा रहने के लिए बनाया गया एक मकान था। जिसका निर्माण भी अभी पूरा नहीं हुआ है। जिस स्कूल प्रबंधन द्वारा किराए पर लिया गया।
(वीडियो: क्लासरूम में नोडल अधिकारी)
स्कूल के कमरे, घर के कमरे जैसे छोटे-छोटे हैं, करीब 10 बाय 12 के साइज के कमरे, जिसमें करीब 17 से 20 बच्चे बैठते हैं जबकि सेटिंग की व्यवस्था सिर्फ 16 बच्चों की है। करीब 3 फीट ऊंची खिड़कियां है मगर उसमें ग्रिल नहीं है। जबकि स्कूल बस की भी खिड़की में जालियां लगी होती है। वेंटीलेशन के लिए एक एग्जास्ट है जो आज जांच के दौरान बंद पाया गया। उमस के मारे बच्चों का हाल खराब था। बिजली के तारे भी खुले में लटक रही थी।
इतना ही सबसे खतरनाक यहां करीब 25 फीट गहरी खाई नुमा वेंटीलेशन एरिया है। जिसे टॉयलेट की गैस पाइप्स गई हुई है, जिसे प्लास्टिक के बोरे से पैक किया गया है। इस पूरे 4/4 के एरिया को एक पतले से प्लाई से ढक दिया है। अगर बच्चे खेलते खेलते इसमें गिर जाए तो बड़ी दुर्घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता। नीचे वीडियो में आप देख सकते हैं।
इसके साथ ही स्कूल के समय यहां पर भारी वाहन भी देखे गए और करीब 2 फीट की जगह से अभिभावक उसे चलती गाड़ी को क्रॉस करते दिखे। बरसात के समय या कम खतरनाक नहीं है जिसे आप वीडियो में देख सकते हैं।
इतना ही नहीं स्कूल की मान्यता भी संदेह के घेरे में है। यहां नर्सरी से 10वीं तक की कक्षाएं चलती है। करीब 300 के आसपास छात्र है। ना स्कूल के प्रिंसिपल के पास इसका कोई सही जवाब था ना ही जिला शिक्षा अधिकारी इसके बारे में कुछ स्पष्ट रूप से बात पाए।
फिलहाल यह मामला काफी गंभीर प्रवृति है। 300 छात्रों की जान दुर्घटना के साए में है। किसी अनहोनी दुर्घटना के इंतजार से बेहतर होगा, पहले ही इस पर सघन जांच होनी चाहिए।


