रायगढ़। नगर निगम द्वारा शहर में ऑक्सीजोन के नाम पर गार्डन बनाए जा रहे हैं। जिसमें कैंटीन के साथ कुछ व्यावसायिक गतिविधियां भी शामिल है। हाल ही में जूटमिल क्षेत्र के अंतर्गत किसान राइस मिल ऑक्सीजोन काफी चर्चा में रहा था। वजह थी यहां करीब पर 15 से 20 साल पुराने दो दर्जन से अधिक हवादार पेड़ों को काट दिया गया। जिसमें कुछ इमारती पेड़ों के साथ नीम, जामुन, सागौन जैसे कई अन्य प्रजातियों के वृक्ष थे और मजे की बात है कि इन्हीं वृक्षों को लगाने की बात ऑक्सीजन के प्रोजेक्ट में की गई है। क्या यह पेड़ ऑक्सीजन के बजाय कार्बन मोनोऑक्साइड दे रहे थे, जो इन्हें इस तरह की सजा दी गई!
Video: पेड़ों की लाश
वन विभाग और निगम का याराना
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन पेड़ों को काटने के लिए कोई भी वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। मामला तब चर्चा में आया, जब अन्य पेड़ों के साथ सागौन का पेड़ काटा गया और लोगों ने इसकी शिकायत वन विभाग के अधिकारी से लेकर निगम कमिश्नर तक की। यह पेड़ महंगा होने के कारण इसे चुपके से काटकर कहीं खपाने की तैयारी हो रही थी। RIG24 और अन्य मीडिया में खबर चलने के बाद आनंद फानन में छुपे हुए सागौन के पेड़ को काटकर वन विभाग को दिया गया। वन विभाग ने भी नियम अनुरूप कोई भी कठोर कार्रवाई नहीं की। खानापूर्ति कर मामले को दबा दिया गया। यही काम कोई आम आदमी करता तो शायद उसे जेल की हवा खानी पड़ती। मगर यहां वन विभाग व निगम का याराना था..इसलिए कुछ नहीं हुआ!
Video: वन विभाग द्वारा छुपे हुए सागौन को जप्त किया गया
प्रशासन का भी भरपूर साथ
पेड़ काटने के करीब चार-पांच दिन बाद जिला कांग्रेस ने इसको लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और एसडीएम से पेड़ काटे जाने की जानकारी मांगी और कार्रवाई के विषय में पत्र लिखा गया। प्रशासन हरकत में आया और अगले दिन बचे कूचे पेड़ों को भी अगले दिन वहां से काट दिया गया। उसी तर्ज पर.. ‘ना रहेगा बांस ना बजे की बांसुरी!’
इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष शाखा यादव ने बताया कि रायगढ़ एसडीएम के द्वारा जिला कांग्रेस को कार्रवाई की किसी प्रकार की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

आज तक लगभग 90% पेड़ों को काटकर खपा दिया गया है। पेड़ों को काटने के लिए कोई प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। ऑक्सीजन देने के नाम पर ऑक्सीजन देने वाले ही दर्जनों पेड़ों को काट दिया गया, कल इनको लाखों में खरीद लगाया जाएगा।

इस जगह को ही क्यों चुना.. किसका फायदा..?
ऐसे में सवाल उठना जायज है कि अगर शहर सरकार की मंशा गार्डन बनाने की ही थी, तो शहर में कई जगह है! खास करके इस जगह को चुनना..? जहां पहले से ही दर्जनों हवादार वृक्ष हैं..?? यह लॉजिक किसी के समझ में नहीं आ रहा! इसके पीछे किसका फायदा है ? आने वाले समय में पता चल जाएगा..??
सूत्र भी बताते हैं कि जब निगम में कांग्रेस सत्ता में थी, निगम एमआईसी की मीटिंग में भी इस जगह लेकर विरोध हुआ था। फिर आधी रात को बंद कमरे में किसने अप्रूवल दिया..?? यह भी जांच का विषय है। आज नहीं तो कल पता चल जाएगा! फिलहाल तो वहां आसपास के रहवासियों को ऑक्सीजन का नुकसान हुआ तो है… फिलहाल आज की बात यहीं समाप्त करते हैं! नीचे तस्वीर में देखिए पहले क्या था और क्या हो गया..?
कुछ माह पहले इसी जगह किसान राइस मिल की सेटेलाइट तस्वीर, जिसमें हरियाली साफ दिख रही है।

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