रायगढ़। रायगढ़ में कई जगह पर ऑक्सी जोन बन रहा है, अच्छी बात है.. लेकिन नाम अनुरूप इसकी मनसा पर सवाल हैं..?? आज हम बात करें कबीर चौक किसान राइस मिल वाले ऑक्सी जोन की! फिलहाल तो यहां पर ऑक्सीजन देने वाले करीब 20 से 25 साल पुराने पेड़ों को काट दिया गया है। जिसमें कुछ इमारती लकड़ी वाले सागौन के पेड़ जिन्हें आज काटा गया हैं। आज जब हम वहां गए तो इन पेड़ों की लाशे जमीन पर पड़ी हुई दिखाई दी। नीचे तस्वीर में आप देख सकते हैं।

आज काट दिए गए महंगे सागौन पेड़
प्रस्तावित ऑक्सीजन में नक्शे के आधार पर देखा जाए तो यहां नीम पीपल, जामुन,बेल जैसे करीब दर्जन भर प्रजातियों के पेड़ लगाने की बात कही गई है, लेकिन इन प्रजातियों के कुछ पेड़ पहले से भी है, जो करीब 20-25 साल पुराने थे, और आसपास के लोगों को ऑक्सीजन भी दे रहे थे! लोगों ने बताया कि उनमें से कई पेड़ों को पहले भी काट दिया गया है जैसे वहां पर जामुन, नीलगिरी और नीम के पेड़ थे, जो अब दिखाई नहीं देते और आज सागौन को बड़े सलीके से काटा गया है ताकि इसका मार्केट जुगाड़ भी बन सके। यहां बचे कूचे पेड़ों को चिह्नित किया गया है जिनका नंबर आने वाला है!

बेटे के लिए बाप की बलि
अब सवाल यह है की नए पौधे लगाने के लिए 20 साल पुराने पेड़ क्यों काटे जा रहे हैं, बेटे के जनम के लिए बाप की बलि क्यों दी जा रही है..?? इसका दूसरा उपाय भी हो सकता था, अगर यह पेड़ आपके प्रस्तावित कंक्रीट कंस्ट्रक्शन में आड़े आ रहे थे.. तो इन पेड़ों को उखाड़ कर दूसरी जगह भी लगाया जा सकता था, ऐसी मशीने रायगढ़ में उद्योगों के पास हैं, मांग लेते भाई उन पेड़ों को बेमौत मारने की क्या जरूरत थी..?? क्या वो पेड़ ऑक्सीजन नहीं दे रहे थे..?? गजब खेल हो रहा है, पेड़ लगाने के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं.. क्योंकि वो कंक्रीट के आड़े आ रहा था!

सबको मालूम है मगर हमको पता नहीं
इस बारे में मीडिया द्वारा जब वन विभाग से पूछा गया क्या उन्हें पेड़ काटने की जानकारी है, तो उन्होंने ऐसे किसी भी जानकारी होने या अनुमति से इनकार किया। वन विभाग द्वारा जब निर्माण एजेंसी रायगढ़ नगर निगम से पूछा गया तो उन्होंने कहा यहां कभी कोई पेड़ कटा नहीं..??

महंगे सागौन को लगाया गया ठिकाने..
मौके पर काम करने वाले से लोगों से पूछा गया, तो बताया कि सागौन पेड़ों को फिल्टर प्लांट ले जाया गया है। मगर 2 घंटे में वह फिल्टर प्लांट पहुंची नहीं.. जबकि नियम के मुताबिक या वन विभाग के काष्ठागार में होनी चहिए, दूसरी किसी जगह होना नियम विरुद्ध है चाहे वह निगम का स्टॉक यार्ड ही क्यों ना हो। क्योंकि यह कीमती लकड़ी है, एक पेड़ कम से कम 50 हजार तो देगा ही.. कही सोचकर तो कोई नहीं ले गया..?? नियम से तो देना तो वन विभाग को था..??

ऊपर सब कुछ देख कर आप समझ गए होंगे कि यहां चल क्या रहा है.. पेड़ लगाने के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं, लकड़ी महंगी हुई तो उसका जुगाड़ बैठा रहे हैं..?? प्रेस रिलीज और सोशल मीडिया में देखोगे तो पता चलता है साहब लोग ऑब्जरवेशन कर रहे हैं.. जब हम और आप जा रहे हैं तो कुछ और दिख रहा है..? आगे आगे देखो होता है क्या..




