रायगढ़: जिले में मातृ एवं शिशु कल्याण योजनाओं का लाभ अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रशासन अब विशेष शिविर आयोजित करेगा। कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का मुख्य फोकस कागजी दावों से इतर योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर है।
शिविरों में एक छत के नीचे मिलेंगी मूलभूत सेवाएं
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि आयोजित होने वाले शिविरों में औपचारिकता न निभाकर सीधे नागरिकों की समस्याओं का समाधान किया जाए। इन शिविरों में ई-केवाईसी, आधार कार्ड निर्माण व सत्यापन, जन्म प्रमाण पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, आभा आईडी बनाने के साथ-साथ स्वास्थ्य जांच की सुविधा भी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और पंचायत विभाग के मैदानी अमले की सीधी जिम्मेदारी तय की गई है।
कुपोषण पर कड़ा प्रहार, पोषण ट्रैकर से होगी रियल-टाइम मॉनिटरिंग
बैठक में ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) को अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया गया। मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के तहत गंभीर और अति कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें तत्काल स्वास्थ्य परीक्षण, विशेषज्ञ परामर्श और उपचार उपलब्ध कराने को कहा गया है। बच्चों में दुबलापन और कम वजन की समस्या की समय रहते पहचान के लिए ‘पोषण ट्रैकर’ ऐप के माध्यम से नियमित ग्रोथ मॉनिटरिंग अनिवार्य कर दी गई है।
योजनाओं के आंकड़े और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति
जिले में वर्तमान में 2709 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। समीक्षा में सामने आया कि महतारी वंदन योजना के तहत 2 लाख 95 हजार 88 हितग्राहियों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है। टेक होम राशन (टीएचआर) के तहत 44 हजार 57 और गर्म पका भोजन (हॉट कुक्ड मील) योजना से 34 हजार 769 बच्चों को जोड़ा गया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 4 हजार से अधिक महिलाओं का पंजीयन हुआ है। कलेक्टर ने आंगनबाड़ियों में कार्यकर्ता-सहायिकाओं के रिक्त पदों को भरने, निर्माणाधीन भवनों को तय समय-सीमा में पूरा करने और केंद्रों में शुद्ध पेयजल, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए हैं।







