दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की एक विशेष अदालत ने समाज को झकझोर देने वाले एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। 6 साल की मासूम भतीजी के साथ दुष्कर्म और फिर उसकी निर्मम हत्या करने वाले सगे चाचा को मृत्युदंड (फांसी) की सज़ा सुनाई गई है। अदालत ने इस अपराध को ‘सबसे दुर्लभ से दुर्लभतम’ (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) की श्रेणी में रखा है।
कन्या पूजन के दिन हुई थी हैवानियत
यह दिल दहला देने वाली घटना 7 अप्रैल 2025 को दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र में हुई थी। वह दिन चैत्र नवरात्र का था, जब घरों में कन्या पूजन किया जा रहा था। जानकारी के अनुसार, 6 साल की मासूम बच्ची कन्या भोज के लिए गई थी, जब उसके 24 वर्षीय सगे चाचा ने उसे अपनी हवस का शिकार बना लिया।
आरोपी ने न केवल बच्ची के साथ दरिंदगी की, बल्कि अपराध को छिपाने के लिए उसकी हत्या भी कर दी। इसके बाद उसने सबूत मिटाने की कोशिश में बच्ची के शव को पड़ोस में खड़ी एक कार की डिक्की में छिपा दिया था। बच्ची के गायब होने पर जब खोजबीन शुरू हुई तो इस जघन्य अपराध का पर्दाफाश हुआ, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया।
अदालत का सख्त फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सुनवाई विशेष पॉक्सो अदालत (अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश) में की गई। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए ठोस सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि यह कृत्य अत्यंत क्रूर और अमानवीय है, जो समाज की अंतरात्मा को हिला देता है। ऐसे अपराध के लिए दोषी किसी भी तरह की नरमी का हकदार नहीं है।
अदालत ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मृत्युदंड की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को यह भी निर्देश दिया है कि पीड़ित परिवार को राज्य शासन की क्षतिपूर्ति योजना के तहत 7 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाए।
अब आगे क्या..?
कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी की सज़ा पर अमल के लिए इसे पुष्टि हेतु छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय भेजा जाएगा। उच्च न्यायालय की मुहर लगने के बाद ही सज़ा की अगली प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस फैसले को एक नजीर के तौर पर देखा जा रहा है, जो इस तरह के जघन्य अपराधों को रोकने में एक कड़ा संदेश देगा।








