रायगढ़। शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफा दिलाने का झांसा देकर एक डॉक्टर से ₹34,17,531 की ऑनलाइन ठगी करने वाले संगठित गिरोह के एक और आरोपी रईस खान को साइबर थाना पुलिस ने मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया है। पुलिस आरोपी को इंदौर न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर रायगढ़ पहुंची, जहां कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से ठगी के पैसों से खरीदी गई टाटा नेक्सॉन कार, लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन और ₹1.39 लाख नकद सहित करीब 12 लाख रुपये की संपत्ति बरामद की है।

पुलिस के अनुसार, सोनकरपारा (जूटमिल) निवासी डॉक्टर दिलीप कुमार मिश्रा ने 27 मई 2026 को साइबर थाने में धोखाधड़ी की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया कि मार्च 2025 में सुनील नाम के व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और ‘स्पार्टन ट्रेड’ नामक कंपनी में शेयर ट्रेडिंग के जरिए बड़े मुनाफे का लालच दिया। इसके बाद व्हाट्सऐप पर कंपनी का फर्जी पोर्टफोलियो भेजकर भरोसा जीता गया। 28 अप्रैल 2025 से 3 अप्रैल 2026 के बीच डॉक्टर से अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹34,17,531 जमा करवा लिए गए। शुरुआती दिनों में पोर्टफोलियो में बढ़ता हुआ लाभ दिखाया जाता रहा, लेकिन जब डॉक्टर ने रकम निकालने का प्रयास किया, तो निकासी रोक दी गई और उल्टे और रकम डालने का दबाव बनाया जाने लगा। ठगी का अहसास होने पर उन्होंने पुलिस की शरण ली, जिस पर धारा 318(4) और 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया।

फर्जी सिम और इंदौर के कॉल सेंटर से जुड़ा नेटवर्क
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देश पर साइबर थाने की टीम ने डिजिटल लेन-देन, बैंक खातों और संदिग्ध मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि ठगी में प्रयुक्त नंबरों में से एक नंबर ज्योति मालवीय के नाम पर दर्ज था, जिसके नाम पर 23 अन्य सिम कार्ड भी सक्रिय पाए गए। इसके बाद रायगढ़ पुलिस ने इंदौर के पलासिया स्थित एक कॉल सेंटर में दबिश देकर तनिषा पाटिल को पकड़ा। इसके बाद विजय नगर से ज्योति मालवीय और परदेशीपुरा से सिम विक्रेता तरुण नागर को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आया कि तरुण नागर के जरिए ज्योति और तनिषा ने 100 से 150 सिम कार्ड गिरोह को उपलब्ध कराए थे।
एडवाइजरी की आड़ में ठगी और विलासिता पर खर्च
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने कावेरी परिसर, भवरकुआ (इंदौर) से मुख्य सहयोगी रईस खान (31 वर्ष), निवासी मण्डावर, जिला राजगढ़ (म.प्र.) को हिरासत में लिया। पूछताछ में रईस खान ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से इंदौर में रहकर शेयर मार्केट एडवाइजरी का काम कर रहा था। वह मुंबई मुख्यालय वाली एक ब्रोकिंग कंपनी में सब-ब्रोकर के तौर पर अपने साथी के साथ काम करता था और लोगों को डीमैट अकाउंट खुलवाकर ट्रेडिंग में निवेश कराने का प्रलोभन देता था।
रईस खान ने तरुण नागर से 100 से अधिक फर्जी सिम कार्ड खरीदे थे। इन्हीं नंबरों के जरिए उसने 24 जून 2025 को डॉक्टर दिलीप मिश्रा को चार बार कॉल कर निवेश के लिए तैयार किया था। आरोपी ने स्वीकार किया कि ठगी से मिली रकम से उसने नवंबर 2025 में टाटा नेक्सॉन कार, लैपटॉप और महंगे स्मार्टफोन खरीदे थे। पुलिस ने उसके पास से कार, एक लैपटॉप, तीन मोबाइल (आईफोन, वनप्लस, रियलमी), दो एटीएम कार्ड, एक क्रेडिट कार्ड और ₹1,39,500 नकद जब्त किए हैं।
मामले में एसएसपी शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि शेयर ट्रेडिंग या ऑनलाइन निवेश में अत्यधिक मुनाफे का लालच देने वाले अनजान व्यक्तियों के झांसे में न आएं। किसी को भी अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या सिम कार्ड न दें और साइबर अपराध का शिकार होने पर तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।









