रायगढ़। पटवारियों की हड़ताल के बीच रायगढ़ जिला प्रशासन ने धान के वास्तविक रकबे के भौतिक सत्यापन का कार्य लगभग पूरा कर लिया है। जिले में निर्धारित 1 लाख 52 हजार 49 धान खसरों में से 1 लाख 48 हजार 773 से अधिक खसरों का पॉलीगॉन जनरेशन पूरा कर 98 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। शेष बचे खसरों का सत्यापन भी तेजी से पूरा कराया जा रहा है।
किसानों के धान विक्रय की प्रक्रिया प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था की। तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों और सर्वेयरों ने गांवों में पहुंचकर कोटवारों तथा किसानों के सहयोग से खेतों की पहचान और भौतिक सत्यापन का काम संभाला।
खेतों पर पहुंचकर किसान और कोटवार की मौजूदगी में हुआ सत्यापन
धान के रकबे का सत्यापन केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर नहीं किया गया, बल्कि थर्ड पार्टी सर्वेयरों ने मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की पुष्टि की। गांव के कोटवारों ने खेत और उसके मालिक की पहचान कराई, जिसके बाद किसानों ने मौके पर पहुंचकर अपने खेत की सीमा बताई। इसी आधार पर सर्वेयरों ने पॉलीगॉन तैयार कर धान से संबंधित आवश्यक विवरण दर्ज किए।
सत्यापन को त्रुटिरहित बनाने के लिए तहसीलों में राजस्व नक्शों का गूगल मैप से मिलान किया गया। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) के दूसरे चरण के तहत की गई, जिसमें पहले चरण के दौरान ऑनलाइन दर्ज न हो पाए खसरों की मौके पर भौतिक पुष्टि की गई।
मैदानी अमले की सक्रियता और पांच तहसीलों में शत-प्रतिशत उपलब्धि
इस अभियान में 27 राजस्व निरीक्षकों, लगभग 1,385 सर्वेयरों और 900 से अधिक कोटवारों ने मैदानी स्तर पर काम किया। जिला स्तर पर अपर कलेक्टर प्रियंका वर्मा और संयुक्त कलेक्टर हेमेन्द्र भूआर्य सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिदिन अभियान की समीक्षा की, जबकि तहसीलदारों और अनुविभागीय अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी रखी।
जिले की पांच तहसीलों—घरघोड़ा (6,091 खसरे), धरमजयगढ़ (15,458 खसरे), पुसौर (34,128 खसरे), मुकडेगा (1,577 खसरे) और रायगढ़ (28,800 खसरे)—ने शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है। इसके अलावा खरसिया में 99.40 प्रतिशत, लैलूंगा में 98.76 प्रतिशत, तमनार में 98.67 प्रतिशत, छाल में 90.02 प्रतिशत और कापू में 84.97 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है। जिले के 902 गांवों में सत्यापन पूर्ण हो चुका है। प्रशासन का फोकस शेष खसरों को भी जल्द सत्यापित करने पर है, ताकि किसान उपार्जन केंद्रों में बिना बाधा के धान बेच सकें।






