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हिरासत के बाद मौत से भड़का आक्रोश: खरसिया तहसील में चक्काजाम, 7-8 अन्य ग्रामीणों की भी बेरहमी से पिटाई का आरोप, MLA उमेश पटेल भी एक्टिव

रायगढ़। जिले के खरसिया (परासकोल) में पुलिस कस्टडी के दौरान ग्रामीण रमेश चौहान की हालत बिगड़ने और फिर मौत के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। खरसिया पुलिस कस्टोडियल डेथ के आरोप में बुरी तरह घिर चुकी है। पुलिस कार्यप्रणाली से आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीणों और चौहान समाज के लोगों ने खरसिया तहसील ऑफिस का घेराव कर चक्काजाम कर दिया है। हालात को बेकाबू होता देख एसडीएम (SDM) और एसडीओपी (SDOP) ग्रामीणों के साथ बंद कमरे में शांति और समझौते की मीटिंग कर रहे हैं। उधर खरसिया विधायक उमेश पटेल भी इस मामले को लेकर एक्टिव है।

हाईलाइट्स:

  • कस्टोडियल डेथ के विरोध में सैकड़ों ग्रामीणों और चौहान समाज का खरसिया तहसील में चक्काजाम
  • ग्रामीणों का सनसनीखेज आरोप: पूछताछ के नाम पर 7-8 अन्य ग्रामीणों को भी थाने में बेरहमी से पीटा गया
  • पीड़ित परिवार के लिए 1 सरकारी नौकरी, आर्थिक सुरक्षा और दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
  • हालात संभालने के लिए SDM और SDOP की ग्रामीणों के साथ शांति वार्ता जारी, रायपुर में हुआ पोस्टमार्टम
  • खरसिया विधायक उमेश पटेल ने ली मामले की जानकारी, प्रशासन के आला अधिकारियों से की बातचीत

तहसील में चक्काजाम, 7-8 अन्य ग्रामीणों की पिटाई का खुलासा

​परासकोल के अनिल चौहान हत्याकांड में जिस तरह पुलिस पूछताछ के बाद रमेश चौहान की रायपुर में मौत हुई, उसने पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मौत की खबर मिलते ही पीड़ित के गांव और चौहान समाज के लोग भारी संख्या में खरसिया तहसील ऑफिस पहुंच गए और चक्काजाम कर दिया।

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने एक और बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अनिल चौहान मर्डर केस में पुलिस ने सिर्फ रमेश चौहान को ही नहीं, बल्कि गांव के 7 से 8 अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए थाने बुलाया था और वहां उन सभी के साथ भी बेरहमी से मारपीट की गई है।

मौके पर पहुंची ग्रामीण युवती ने बताई पुलिस बर्बरता की कहानी

नौकरी और मुआवजे की मांग, अंदर चल रही मीटिंग

​प्रदर्शनकारियों की सीधी मांग है कि इस ‘हिरासत में मौत’ के जिम्मेदार दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल और कड़ी से कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, रमेश चौहान के परिवार की आर्थिक सुरक्षा की गारंटी दी जाए और परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

​स्थिति की गंभीरता को देखते हुए खरसिया एसडीओपी और एसडीएम तुरंत मौके पर पहुंचे। फिलहाल दोनों अधिकारी गांव और समाज के प्रमुख लोगों के साथ अंदर बैठकर शांति और समझौते के लिए मीटिंग कर रहे हैं।

डेथ सर्टिफिकेट में ‘ब्रेन हेमरेज’ और पीएम रिपोर्ट का इंतजार

​गौरतलब है कि पुलिस कस्टडी के बाद लकवाग्रस्त हुए रमेश को पहले रायगढ़ और फिर रायपुर के DKS सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रेफर किया गया था। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। DKS अस्पताल के डेथ सर्टिफिकेट में मौत की वजह ‘Intraparenchymal hemorrhage’ (दिमाग के अंदरूनी हिस्से में नस फटना और भारी ब्लीडिंग) बताई गई है।

इस मेडिकल रिपोर्ट ने ग्रामीणों की ‘मारपीट और टॉर्चर’ वाली थ्योरी को बहुत मजबूत कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, रमेश का पोस्टमार्टम रायपुर में ही कर लिया गया है, जिसकी रिपोर्ट से मौत की असल वजहों का आधिकारिक खुलासा होगा।

सियासी पारा हाई, विधायक उमेश पटेल भी एक्टिव

​इस कस्टोडियल डेथ के मामले में सियासी पारा भी चढ़ गया है। ग्रामीण कांग्रेस पहले ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और स्वतंत्र जांच दल बनाने की बात कह चुकी है। वहीं, खरसिया विधायक उमेश पटेल भी इस पूरे प्रकरण पर नजर बनाए हुए हैं। बताया जा रहा है कि वे फिलहाल रायपुर में ही मौजूद हैं और उन्होंने इस संवेदनशील मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे बातचीत भी की है।

लेख समाप्त–

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