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खरसिया परासकोल मर्डर केस: पुलिसिया पूछताछ के बाद बीमार पड़े रमेश की दर्दनाक मौत, मेडिकल रिपोर्ट ने खड़े किए कई सवाल

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के खरसिया विधानसभा के परासकोल मर्डर केस में पुलिस पूछताछ के बाद अचानक पैरालिसिस (लकवे) का शिकार हुए 45 वर्षीय ग्रामीण रमेश लाल चौहान की रायपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई है। रायपुर के DKS सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से जारी ‘डेथ सर्टिफिकेट’ में मौत की वजह दिमाग में अंदरूनी रक्तस्राव (Intraparenchymal hemorrhage) बताई गई है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पुलिस पर लग रहे आरोपों को लेकर सियासत और भी गरमा गई है। ताजा हालातों में अब यह मामला सीधे-सीधे कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) की और इशारा कर रहा है।

अस्पताल में मृतक

खबर के मुख्य बिंदु:

  • खरसिया पुलिस की पूछताछ के बाद लकवाग्रस्त हुए रमेश चौहान ने DKS अस्पताल (रायपुर) में तोड़ा दम
  • डेथ सर्टिफिकेट में मृत्यु का कारण ‘इंट्रापैरेन्काइमल हेमरेज’ (दिमाग में भारी रक्तस्राव) बताया गया
  • सिर में ब्लीडिंग की मेडिकल पुष्टि के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और थ्योरी पर उठ रहे गंभीर सवाल
  • परिजनों ने लगाया था मारपीट का आरोप, पुलिस ने किया था इनकार, अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
  • रायपुर में पुलिस की बड़ी अधिकारियों के निगरानी में हो रहा है पोस्टमार्टम

रायपुर DKS अस्पताल में ली आखिरी सांस

परासकोल के अनिल चौहान हत्याकांड में पूछताछ के लिए पुलिस ने  रमेश चौहान को हिरासत में लिया था। परिजनों के मुताबिक, रमेश थाने में स्वस्थ गया था लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उसे लकवा मार गया।

मृतक के बड़े भाई का बयान

रमेश की पत्नी और बड़े भाई का सीधा आरोप है कि रमेश सुबह बिल्कुल स्वस्थ हालत में थाने गया था। लेकिन कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने गांव के सरपंच को फोन कर सूचना दी कि रमेश की तबीयत खराब है। रमेश के भाई को पुलिस ने उसकी सुपुर्दगी का कागज थमा दिया और उसका इलाज करवाने को कहा।

मृतक की पत्नी ने रो रोकर बताई आपबीती

इलाज के लिए उसे पहले रायगढ़ और फिर रायपुर के DKS सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां 5 मार्च 2026 को उसकी मृत्यु हो गई।

पुलिस ने परिजनों के मारपीट के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि वह आदतन शराबी था और मृतक की हत्या की रात भी वह उसके साथ शराब पार्टी किया था। अगले दिन जब उसे थाने में पूछताछ के लिए बुलाया गया था तब भी वह नशे में था।

खरसिया एसडीओपी प्रभात पटेल का बयान

डेथ सर्टिफिकेट ने खड़े किए ये गंभीर सवाल

इस पूरे मामले में सबसे अहम दस्तावेज DKS अस्पताल द्वारा जारी किया गया डेथ सर्टिफिकेट है। इस सरकारी रिपोर्ट में रमेश चौहान (45 वर्ष) की मौत का कारण “Intraparenchymal hemorrhage” (इंट्रापैरेन्काइमल हेमरेज) लिखा गया है।

​मेडिकल टर्म में इसका मतलब होता है— ‘दिमाग के अंदरूनी हिस्से (Brain Tissue) में नस फटना और भारी ब्लीडिंग होना’।

मेडिकल जानकारों के अनुसार, यह जानलेवा स्थिति आमतौर पर सिर पर किसी गंभीर बाहरी चोट (Trauma) लगने या अत्यधिक तनाव और ब्लड प्रेशर (BP) के अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण पैदा होती है।

अस्पताल द्वारा जारी प्रारंभिक मृत्यु रिपोर्ट

यहीं से पुलिस की भूमिका पर सबसे बड़े सवाल खड़े होते हैं:

  • पहला- क्या पुलिस पूछताछ के दौरान कोई ऐसी घटना घटी जिससे रमेश के सिर में गंभीर चोट आई?
  • दूसरा- अगर उसे कोई चोट नहीं लगी, तो क्या पुलिस कस्टडी में उसे इतना मानसिक या शारीरिक तनाव दिया गया कि उसके दिमाग की नस फट गई?

असली कातिल कोई और निर्दोष के हिस्से में मौत..?

एक निर्दोष ग्रामीण रमेश लाल चौहान, जिसे एक ऐसे मर्डर केस में पूछताछ के लिए उठाया गया था, जिसका असली कातिल महज 3000 रुपये के विवाद वाला कोई और लड़का निकला, उसकी इस दर्दनाक मौत ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

​अब निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर

​डेथ सर्टिफिकेट ने यह तो साफ कर दिया है कि मौत दिमाग में खून बहने से हुई है, लेकिन इसके पीछे का असल ट्रिगर क्या था, यह विस्तृत ‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट’ (PM Report) से ही पूरी तरह साफ हो पाएगा।

हालांकि, इस मेडिकल रिपोर्ट के सामने आने के बाद परिजनों के उन आरोपों को बड़ा बल मिला है जिसमें उन्होंने कहा था कि रायगढ़ में CT स्कैन के दौरान रमेश के सिर में खून का थक्का (Blood Clot) जमने की बात सामने आई थी। कांग्रेस पहले ही इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग कर चुकी है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभी रायपुर में पुलिस के आला अधिकारियों की निगरानी में मृतक का पोस्टमार्टम हो रहा है। परिजनों का मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘कस्टोडियल डेथ’ जैसे बेहद संवेदनशील आरोपों के बीच मामले में आगे क्या कदम उठाता है।

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