रायगढ़। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त 41वें चक्रधर समारोह-2026 की तीसरी शाम छत्तीसगढ़ी लोकगीतों के रंग में रंगी नजर आई। प्रसिद्ध लोक गायिका डॉ. पायल साहू ने ‘चिन्हारी लोक मंजीरा’ के कलाकारों के साथ पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुति देकर समारोह स्थल पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति की छटा बिखेर दी।

‘अरपा पैरी के धार’ से शुरुआत, बिहाव और कर्मा गीतों की प्रस्तुति
डॉ. पायल साहू ने अपने गायन की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी के वंदन गीत ‘अरपा पैरी के धार’ से की। इसके बाद उन्होंने गणपति जगवंदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने पारंपरिक बिहाव गीतों के साथ ‘बही बना दिए’, ‘मात गे हे बगिया म फूल’, ‘तोन मन कैसे लागे राजा’ और कर्मा गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को लोक परंपराओं से जोड़े रखा।
पारंपरिक वाद्ययंत्रों की संगत, छत्तीसगढ़ी भाषा और लोकधुनों के तालमेल ने पूरे माहौल को आकर्षक बना दिया। डॉ. पायल साहू और साथी कलाकारों की प्रस्तुति पर पंडाल में मौजूद दर्शकों ने उत्साहपूर्वक आनंद लिया।

दाऊ महासिंह और दाऊ प्रेम चंद्राकर की संगीत परंपरा की दिखी झलक
समारोह के मंच पर ‘चिन्हारी लोक मंजीरा’ के कलाकारों ने दाऊ महासिंह चंद्राकर और दाऊ प्रेम चंद्राकर की लोक संगीत परंपरा को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक विरासत को दर्शकों के समक्ष रखा। इस प्रस्तुति के साथ ही चक्रधर समारोह के तीसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या का समापन हुआ।








