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मिशन ‘अजेय गढ़’: खरसिया में CM विष्णुदेव साय का दौरा, क्या उमेश पटेल को उनके ही किले में घेरने की है फुलप्रूफ तैयारी?

रायगढ़। राजनीति में टाइमिंग और ‘लोकेशन’ के बहुत गहरे मायने होते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का रायगढ़ जिले और खासकर ‘खरसिया’ का दौरा कोई साधारण ‘प्रोटोकॉल’ नहीं है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह प्रदेश में कांग्रेस के इकलौते ‘अजेय किले’ को भेदने और युवा विधायक उमेश पटेल को उनके ही गढ़ में घेरने की एक सोची-समझी ‘चेस-मूव’ (Chess Move) है।

2023 के विधानसभा चुनावों में रायगढ़ जिले की सियासत ने जो करवट ली थी, भाजपा अब उसी के ‘मार्जिन गैप’ (मामूली वोटों के गड्ढे) को पाटने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। आज हम चर्चा करेंगे कि “आखिर मुख्यमंत्री का खरसिया दौरा कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी क्यों है और इसके पीछे भाजपा की क्या ‘इनसाइड स्ट्रेटजी’ काम कर रही है।” क्योंकि मुख्यमंत्री का यह इमोशनली ट्वीट अपने आप में बहुत कुछ कह रहा है…

मुख्यमंत्री का आज कुसमूरा खरसिया से ट्वीट

कुछ अनसुलझी मिस्ट्री

  • कांग्रेस का अजेय दुर्ग: खरसिया वो विधानसभा सीट है, जहां आज तक कमल नहीं खिल सका है?
  • टारगेट उमेश पटेल: क्या लगातार चुनाव जीत रहे कद्दावर युवा कांग्रेस नेता को उनके ही घर में घेरने की रणनीति?
  • CM का ‘आदिवासी कार्ड’: खरसिया की बड़ी आबादी आदिवासी है, जिसे साधने के लिए खुद आदिवासी चेहरे (CM विष्णुदेव) को मोर्चे पर लगाया गया है?
  • मार्जिन का खेल: रायगढ़ शहर को छोड़ दें, तो जिले की बाकी सीटों पर कांग्रेस की जीत का मार्जिन बेहद कम रहा है..
  • ​‘मास्टरप्लान’ शुरू: सूत्रों के मुताबिक यह सिर्फ शुरुआत है, आने वाले समय में ऐसे और कई ‘हाई-प्रोफाइल’ दौरे होंगे।

​खरसिया: कांग्रेस का वो ‘किला’ जिसे भाजपा आज तक नहीं भेद पाई

खरसिया विधानसभा सीट का इतिहास बताता है कि यह कांग्रेस का अभेद्य दुर्ग रहा है। स्व. नंदकुमार पटेल की विरासत को उनके बेटे उमेश पटेल ने पूरी ताकत के साथ संभाला है। 2018 और 2023 के मोदी लहर में भी उमेश पटेल ने इस सीट पर कांग्रेस का परचम लहराए रखा। भाजपा के कद्दावर से कद्दावर नेता भी इस किले की दीवार नहीं गिरा पाए हैं।

यही वजह यह समझने के लिए काफी है कि भाजपा अब किसी ‘लोकल’ नेता के भरोसे इस किले को फतह करने के बजाय सीधे ‘स्टेट लीडरशिप’ और मुख्यमंत्री के चेहरे को इस मैदान में उतार रही है। एक तरह से मुख्यमंत्री का यह दौरा साफ मैसेज है कि भाजपा अब खरसिया को ‘फ्री-रन’ नहीं देने वाली।

‘आदिवासी बेल्ट’ और CM साय का ‘मास्टरस्ट्रोक’

खरसिया और उसके आस-पास का एक बड़ा इलाका आदिवासी बाहुल्य है। विष्णुदेव साय खुद प्रदेश के सबसे बड़े और स्वीकार्य ‘आदिवासी चेहरे’ हैं। भाजपा की रणनीति एकदम साफ दिख रही हैं, अगर खरसिया के ‘आदिवासी वोटबैंक’ में सेंध लगा दी गई, तो उमेश पटेल के किले की नींव अपने आप हिल जाएगी। मुख्यमंत्री का वहां पहुंचना, आदिवासियों के बीच यह संदेश देने की कोशिश है कि सत्ता उनके समाज के हाथ में है और उन्हें विपक्ष के बजाय सत्ता के साथ चलना चाहिए।

​2023 के आंकड़े और मामूली वोटों का वो ‘गड्ढा’

​अगर हम 2023 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का ‘पोस्टमॉर्टम’ करें, तो भाजपा की इस आक्रामकता की असली वजह समझ आती है।

​रायगढ़ शहर की सीट (जहां से ओ.पी. चौधरी ने 64,443 वोटों के ऐतिहासिक अंतर से जीत दर्ज की) को अगर छोड़ दिया जाए, तो जिले की बाकी सीटों पर कांग्रेस की जीत का आधार बहुत ‘पतला’ (Thin) रहा है।

  • ​लैलूंगा (Lailunga): कांग्रेस की विद्यावती सिदार यहां सिर्फ 4,176 वोटों के मामूली अंतर से जीती थीं।
  • ​धरमजयगढ़ (Dharamjaigarh): कांग्रेस के लालजीत सिंह राठिया की जीत का अंतर भी 9,637 वोटों का ही था।
  • ​खरसिया (Kharsia): उमेश पटेल ने जरूर लगभग 21,656 वोटों से जीत दर्ज की, लेकिन यह अजेय नहीं है।

भाजपा के रणनीतिकारों को यह गणित समझ आ गया है कि लैलूंगा और धरमजयगढ़ में कांग्रेस ‘मामूली वोटों के गड्ढे’ पर खड़ी है। अगर ‘खरसिया’ के आदिवासी बेल्ट में दबाव बढ़ाया गया, तो इसका सीधा असर न सिर्फ उमेश पटेल पर पड़ेगा, बल्कि लैलूंगा और धरमजयगढ़ के वोटरों का माइंडसेट भी भाजपा की तरफ शिफ्ट हो जाएगा।

औपचारिक दौरा या

कहने को तो यह मुख्यमंत्री का एक रूटीन औपचारिक दौरा है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह दौरा महज एक शुरुआत है। ‘मिशन 2028’ के लिए भाजपा ने रायगढ़ जिले के बाकी इस कांग्रेसी ‘व्हाइट बेल्ट’ को ‘केसरिया’ में बदलने का ब्लू-प्रिंट तैयार कर लिया है। आने वाले समय में बड़े केंद्रीय और राज्य स्तरीय नेताओं के लगातार दौरे खरसिया और आस-पास के आदिवासी इलाकों में देखने को मिलेंगे।

उमेश पटेल को उनके ही घर में उलझा कर रखने की यह रणनीति कितनी कारगर होगी, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन एक बात तय है.. “कांग्रेस अब खरसिया को ‘टेकन फॉर ग्रांटेड’ (Taken for granted) नहीं ले सकती। मुख्यमंत्री के इस दौरे ने सियासत के ‘चेस बोर्ड’ पर वजीर की चाल चल दी है!”

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