खरसिया/रायगढ़: जब बात महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की हो, तो रायगढ़ पुलिस के प्रेस नोट में ‘त्वरित कार्रवाई’ के ऐसे-ऐसे दावे होते हैं कि लगे जैसे सिंघम वाली पुलिस यहीं तैनात है! लेकिन जब आरोपी सत्ताधारी दल से जुड़ी ‘रसूखदार’ पॉलीटिशियन से हो, तो पुलिस की ‘सिंघम’ वाली वर्दी अचानक से ‘जांच के लिए समय दीजिए’ वाले खादी के कुर्ते में बदल जाती है। खरसिया में महिला पूजा जायसवाल के घर घुसकर हुई मारपीट का मामला इसी दोहरे रवैये की पोल खोल रहा है।
‘दीदी’ का घर में घुसकर बवाल और पुलिस का ‘वेट एंड वॉच’
मामला सीधे-सीधे घर में घुसकर (House Trespass) गाली-गलौज और मारपीट का है। महिला पत्रकार पूजा जायसवाल ने बताया कि उनके द्वारा गलती से गायत्री केशरवानी को एक व्हाट्सएप मैसेज चला गया था, इसके बाद उनका ईगो इस कदर हर्ट हुआ कि रात 8:00 बजे भाजपा नेत्री गायत्री केसरवानी ने उसके घर घुसकर जमकर बवाल काटा, छोटे-छोटे बच्चों के सामने ही उनकी माँ को पीटा गया, गालिया दी, धमकी दी। बाप और भाई बचाव कर रहे थे; बच्चे रो रहे थे, बिलबला रहे थे, डर के इस माहौल में बच्चों ने खुद को कमरे में बंद कर लिया। उस पल को नीचे आप ऑडियो में महसूस भी कर सकते हैं!
इस घटना का वीडियो तक पुलिस और सोशल मीडिया दोनों में मौजूद है। आम आदमी होता, तो अब तक IPC 452 या BNS 333 (घर में घुसकर हमला) और मारपीट की धाराओं में एफआईआर दर्ज हो चुकी होती। लेकिन घटना को 48 घंटे बीतने वाले हैं और पुलिस अभी भी ‘जांच’ का कैसेट बजा रही है।
यह सब कुछ देखने के बाद पब्लिक के बीच सवाल है कि “क्या किसी महिला के घर में रात 8 बजे घुसकर बवाल काटने का वीडियो ‘तुरंत प्रतिक्रिया’ के लिए काफी नहीं है? या फिर पुलिस को ‘ऊपर से’ ग्रीन सिग्नल का इंतजार है?
‘मंत्री जी की बहन’ वाला पॉलिटिकल भौकाल
इस पूरे मामले में पुलिस के ‘स्लो मोशन’ मोड में जाने की वजह शायद गायत्री केसरवानी का पॉलिटिकल प्रोफाइल है। पहले कांग्रेस में रहीं गायत्री, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष उमेश अग्रवाल और प्रदेश के कद्दावर मंत्री ओपी चौधरी के संपर्क में आकर ‘कमल’ के साथ जुड़ गईं। मंत्री जी को राखी बांधने का वीडियो शेयर कर उन्होंने इलाके में अपना तगड़ा ‘भौकाल’ सेट कर रखा है। पूर्व मंत्री उमेश पटेल के खिलाफ विवादित बयान देकर वो पहले भी चर्चा बटोर चुकी हैं। यही वजह है कि वीडियो ऑडियो के सारे साक्ष्य होने के बाद भी अब तक मामले में कोई भी कार्यवाही करने से पुलिस बच रही है।
ब्लैकमेलिंग का आरोप या ‘प्रमोशन’ की फीस?
बचाव में गायत्री केसरवानी ने भी पत्रकार पर पैसे मांगने का आरोप लगाते हुए ₹2000 के ट्रांजैक्शन सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं। इसके अलावा उन्होंने पीड़ित महिला के पति और भाई के खिलाफ भी छेड़खानी जैसे संगीन आरोप लगाया है। लेकिन पत्रकार पूजा ने इसका जो जवाब दिया है, उसने पूरी कहानी का रुख ही मोड़ दिया है। पूजा का दावा है कि गायत्री और उनके बेटे भोजपुरी/छत्तीसगढ़ी सिनेमा में काम करते हैं और वो (गायत्री) खरसिया से विधायक का चुनाव लड़ने का सपना संजो रही हैं। पत्रकार का कहना है कि यह ₹2000 उसी पीआर (PR) और प्रमोशनल वीडियो का चार्ज है। छेड़छाड़ वाली बात पर उन्होंने कहा कि उसके पिता और भाई बीच बचाव कर रहे थे। अगर वह बीच में ना आते तो शायद आज वो अस्पताल में होती।
घर घुस कर मारपीट और गाली गलौज का Audio/Video:
फिलहाल गलत तरीके से पैसे मांगने वाली बात थी तो उन्होंने पहले थाने में शिकायत क्यों नहीं की..? इस कहानी को देखकर तो एक बच्चा भी बता सकता है कि घर में घुसकर कोहराम मचाने के बाद पासा उल्टा पड़ता देखकर काउंटर केस का दबाव और छवि धूमिल करने के लिए बनाया हुआ एक पैंतरा मात्र हैं। यहां तो पूरी बात “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।
‘अराजकता हटाओ’ का रायगढ़ मॉडल!
एक तरफ देश के गृहमंत्री अमित शाह ‘लोकतंत्र बचाओ और अराजकता हटाओ’ का नारा देते सड़क पर रैलिया करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, रायगढ़ में सत्ताधारी दल के कद्दावर मंत्री से जुड़ी मानी जाने वाली नेत्री रात के अंधेरे में एक पत्रकार के घर घुसकर ‘अराजकता’ का लाइव डेमो दे रही हैं! और तो और, जब पुलिस एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल कर रही है, तब सोशल मीडिया पर गायत्री के परिजनों द्वारा महिला पत्रकार की छवि धूमिल करने का अभियान जोरों पर है।

सीधा सवाल:
क्या रायगढ़ पुलिस का ‘महिला अपराधों पर त्वरित कार्रवाई’ वाला नियम सत्ताधारी नेताओं के लिए लागू नहीं होता? 48 घंटे बीतने के बाद भी वीडियो सबूत होने के बावजूद एफआईआर दर्ज न होना किस दबाव का संकेत है?
अब देखना यह है कि पुलिस एक महिला को इंसाफ दिलाती है, या फिर ‘राखी वाले वीडियो’ का वजन कानून की किताब पर भारी पड़ जाता है!









