भुईकुरी ग्राम पंचायत का मामला; फ्लाई ऐश डंपिंग की NOC और व्यापारिक द्वेष के चलते चुनी हुई सरकार गिराने की रची गई थी साजिश, ग्रामीणों ने पंचायत भवन में जड़ा ताला।
रायगढ़/तमनार। सत्ता पलटने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त और ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ अब तक राज्यों की राजनीति का हिस्सा हुआ करती थी, लेकिन रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में यही खेल अब ग्राम पंचायत स्तर पर पहुंच गया है। मंगलवार को तमनार की ग्राम पंचायत ‘भुईकुरी’ में सरपंच के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारी गहमागहमी और ग्रामीणों के जबरदस्त विरोध के कारण अंततः स्थगित करना पड़ा।
Video : देखिए ग्रामीणों का भारी विरोध
यह पूरा घटनाक्रम किसी राजनीतिक थ्रिलर से कम नहीं था, जहां 15 दिनों से अज्ञातवास (गोपनीय जगह) पर रखे गए पंचों को ग्रामीणों ने पंचायत भवन में कदम तक नहीं रखने दिया।
विधायकों की तर्ज पर पंचों की ‘बाड़ेबंदी’
जानकारी के अनुसार, भुईकुरी ग्राम पंचायत में कुल 12 पंच हैं। सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तिथि घोषित होने के बाद से ही इनमें से 10 पंचों को गांव से बाहर किसी अज्ञात और गोपनीय स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया था। मकसद साफ था—कोई भी पंच अपना पाला न बदल सके।
मंगलवार दोपहर 3:00 बजे जब अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही के लिए इन पंचों की गाड़ियां ग्राम पंचायत भवन पहुंचीं, तो वहां पहले से मौजूद आक्रोशित ग्रामीणों ने उन्हें गाड़ियों से उतरने ही नहीं दिया।
ग्रामीणों का सीधा आरोप: ‘व्यापारिक द्वेष में गिरा रहे हमारी सरकार’
ग्रामीणों का साफ कहना था कि यह अविश्वास प्रस्ताव पूरी तरह से गलत है और एक चुनी हुई पंचायत सरकार को अनुचित तरीके से गिराने की साजिश है। मौके पर मौजूद लोगों ने कहा, “हमें तो यह भी नहीं पता कि हमारे द्वारा चुने गए सरपंच को हटाया क्यों जा रहा है।” ग्रामीणों का सीधा आरोप था कि कुछ बाहरी लोगों के व्यापारिक द्वेष के कारण गांव की राजनीति को मोहरा बनाया जा रहा है।
हंगामा इतना जोरदार था कि आक्रोशित ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत भवन के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। स्थिति को बिगड़ता देख पंच पंचायत भवन तक पहुंच ही नहीं पाए।
नायब तहसीलदार ने की सभा स्थगित
अविश्वास प्रस्ताव के लिए पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) के रूप में नियुक्त तमनार के नायब तहसीलदार पंकज मिश्रा ने हालात का जायजा लेने के बाद कार्यवाही को रोक दिया। पीठासीन अधिकारी मिश्रा ने आधिकारिक तौर पर बताया कि ग्रामीणों के भारी विरोध और हंगामे के कारण अविश्वास प्रस्ताव की सभा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। नई तिथि का ऐलान अभी नहीं किया गया है।
पर्दे के पीछे का असली खेल: ‘फ्लाई ऐश की कालिख’
इस पूरी राजनीतिक उठापटक के पीछे का सबसे बड़ा कारण सरायपाली गेरवानी तराईमाल क्षेत्र का औद्योगिक ढांचा है। की लगभग पांच ग्राम पंचायतें सीधे तौर पर बड़े उद्योगों से घिरी हुई हैं। इन इलाकों में उद्योगों से निकलने वाले ‘फ्लाई ऐश’ (राखड़) का ट्रांसपोर्टेशन और डंपिंग एक बहुत बड़ा और मुनाफे वाला व्यवसाय है।
नियमों के अनुसार, किसी भी गांव की सीमा में फ्लाई ऐश डंप करने के लिए ग्राम पंचायत की NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) अनिवार्य होती है। यही वह ‘मास्टर-की’ है, जिसके कारण फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्टर्स का ग्राम पंचायतों की राजनीति में सीधा और गहरा दखल होता है। सूत्रों की मानें तो भुईकुरी में सरपंच को कुर्सी से हटाने की यह पूरी कवायद इसी ‘NOC’ के नियंत्रण और राखड़ डंपिंग के व्यापारिक वर्चस्व की लड़ाई का परिणाम है।



