रायगढ़। अतिक्रमण और अवैध निर्माण की भेंट चढ़ चुके रायगढ़ के ऐतिहासिक भुजबंधान तालाब को बचाने की स्थानीय लोगों की आखिरी उम्मीद भी अब टूटती नजर आ रही है। मोहल्लेवासियों ने तालाब को भू-माफियाओं से मुक्त कराने के लिए ‘सुशासन तिहार’ और ‘सीएम हेल्पलाइन’ तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सिस्टम की जड़ें इतनी खोखली निकलीं कि अफसरों ने बिना कोई जमीनी कार्रवाई किए कागजों में ही शिकायतों का निराकरण कर दिया। अब शिकायतकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, और टुकड़ों में बंट चुका यह तालाब अपने वजूद की आखिरी सांसें गिन रहा है।
सीमांकन में खुला राज: तालाब की जमीन पर तान दिया अवैध भवन
इस पूरे खेल का पर्दाफाश मई 2025 में तब हुआ था, जब मोहल्लेवासियों की लगातार शिकायतों के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर भुजबंधान तालाब का सीमांकन किया गया। बैकुंठपुर के हल्का नंबर 47 और खसरा नंबर 157 में दर्ज करीब 2.25 हेक्टेयर के इस तालाब का जब आरआई, पटवारी और नगर निगम के अफसरों ने नाप-जोख किया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि तालाब की ही जमीन पर बाकायदा एक अवैध सामुदायिक भवन तान दिया गया है।

- हद तो तब हो गई जब यह भी खुलासा हुआ कि खुद नगर निगम ने भी तालाब की जमीन को मलबे से पाटकर समतल कर दिया और उस पर सीसी रोड का निर्माण कर डाला। इसके अलावा तालाब से सटी डबरी (छोटे तालाब) में भी कई अवैध निर्माण पाए गए।
पार्षदों की ‘रहस्यमयी चुप्पी’ और फाइलों में दफन हुईं शिकायतें
सीमांकन के दौरान तहसील और निगम की टीम के साथ स्थानीय पार्षदों और उनके प्रतिनिधियों के रूप में नेहा देवांगन, अशोक यादव और शाखा यादव भी मौजूद थे। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी किसी ने इन अवैध निर्माणों को हटाने के लिए आवाज नहीं उठाई। पार्षदों की इसी रहस्यमयी जुगलबंदी और निगम की अपनी गलती (तालाब पाटकर रोड बनाने) के कारण निगम आयुक्त और तहसीलदार ने पूरे साल चुप्पी साधे रखी। जब स्थानीय प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली, तो बैकुंठपुर, बावलीकुंआ और धांगरडीपा के लोगों ने सुशासन तिहार और सीएम हेल्पलाइन में दस्तावेजों के साथ शिकायत की। लेकिन वहां भी 90 फीसदी मामलों को बिना कार्रवाई के ही गोलमोल तरीके से बंद कर दिया गया।

तालाब को बनाया ‘एटीएम’, जरा सी बारिश में डूब रहे मोहल्ले
भुजबंधान तालाब और इससे सटी डबरी को स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने हमेशा अपने फायदे के ‘एटीएम’ की तरह इस्तेमाल किया है। सौंदर्यीकरण के नाम पर सरकारी खजाना तो खूब लुटाया गया, लेकिन अतिक्रमण हटाने की कभी जहमत नहीं उठाई गई। भू-माफियाओं के दबाव और डबरी में अवैध कब्जे के कारण यहां जलनिकासी अवरुद्ध हो गई और प्रस्तावित नाला तक नहीं बनने दिया गया। नतीजतन, आज हालत यह है कि महज 15 से 20 मिनट की बारिश में बावलीकुंआ और धांगरडीपा का पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है।
रजिस्ट्री का महा-फर्जीवाड़ा: एक ही जमीन के बना दिए 8-9 मालिक

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा जमीनों की खरीद-बिक्री में हुआ है। भुजबंधान तालाब से लगी ज्यादातर जमीन ‘पाटा’ जमीन है, जिसकी खरीद-बिक्री कानूनी तौर पर नहीं हो सकती। इसके बावजूद शहर के भू-माफियाओं और जनप्रतिनिधियों ने निवेश के अवसर तलाशे और पंजीयन विभाग से सांठगांठ कर कब्जे के आधार पर धड़ल्ले से रजिस्ट्रियां करवा लीं।
- सूत्रों की मानें तो रजिस्ट्री का खर्च बचाने के लिए माफियाओं ने एक ही रजिस्ट्री में 8 से 9 लोगों को मालिक बना दिया। यहां तक कि एक मामले में आधा दर्जन से अधिक अलग-अलग धर्मों के परिवारों की एक साथ संयुक्त रजिस्ट्री करवा दी गई, जो नियमों के बिल्कुल विपरीत है।
कुल मिलाकर, भुजबंधान तालाब का मामला यह बताने के लिए काफी है कि रायगढ़ में भू-माफिया, अफसर और स्थानीय जनप्रतिनिधि मिलकर किस तरह शहर के ऐतिहासिक धरोहर और भविष्य को कागजों में दफन कर रहे हैं।



