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रायगढ़ कैनाल लिंक रोड: ‘बिना सीमांकन और अधिग्रहण के घर कैसे तोड़ेंगे?’ 56 वर्षीय महिला ने निगम को हाईकोर्ट में दी पटखनी, पीड़ितों के लिए बनी नजीर

रायगढ़। शहर में बन रहे ‘कैनाल लिंक रोड’ के रास्ते में आने वाले मकानों और जमीनों को लेकर नगर निगम ताबड़तोड़ एक्शन मूड में है। पहले नोटिस और फिर 15 दिनों के भीतर बुलडोजर! जल्दबाजी ऐसी की सड़क चौड़ीकरण के नाम पर निगम का अमला बिना सही नपती ( सीमांकन) किए लोगों को बेदखल करने की तैयारी में है। लेकिन इंदिरा नगर रोड, कुम्हार पारा की रहने वाली 56 वर्षीय समरिन बाई ने निगम की इस मनमानी को बिलासपुर हाईकोर्ट में चुनौती देकर एक बड़ी जीत हासिल की है। यह फैसला उन सैकड़ों लोगों के लिए एक संजीवनी है, जो कैनाल लिंक रोड के नाम पर अब भी बेघर होने के डर में जी रहे हैं।

याचिकाकर्ता की मुख्य दलील: ‘सड़क के लिए जमीन चाहिए, तो अधिग्रहण करो’

दरअसल, नगर निगम ने 22 मई 2026 को समरिन बाई को प्लाट नंबर 114 पर अवैध कब्जे का नोटिस थमा दिया था। जबकि याचिकाकर्ता की असली और पुश्तैनी जमीन प्लाट नंबर 108 है। जिसका नजूल पट्टा (लीज डिड) उसके नाम पर है।

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने सबसे बड़ा और अहम मुद्दा यह उठाया कि प्रशासन ‘कैनाल लिंक रोड’ बनाने के लिए याचिकाकर्ता की जमीन का इस्तेमाल करना चाहता है, लेकिन वह जमीन का कानूनी रूप से ‘अधिग्रहण’ (Acquisition) नहीं कर रहा है। मुआवजे से बचने के लिए निगम पट्टे वाली वैध जमीन को भी ‘अतिक्रमण’ बताकर सीधे तोड़ने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा, जो नपती (सीमांकन) भी की गई, वह पूरी तरह से गलत और पीठ पीछे की गई थी।

हाईकोर्ट का अहम फैसला: ‘बिना सही नपती के नहीं होगी कार्रवाई’

याचिकाकर्ता की इस दमदार दलील को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि निगम किसी भी वैध जमीन पर यूं ही बुलडोजर नहीं चला सकता। कोर्ट ने नगर निगम रायगढ़ को स्पष्ट निर्देश दिया है कि सबसे पहले नजूल अधिकारी की मौजूदगी में याचिकाकर्ता की असली जमीन (खसरा नंबर 108) का विधिवत सीमांकन (नपती) किया जाए। जब तक जमीन की सही बाउंड्री और पहचान तय नहीं हो जाती, तब तक याचिकाकर्ता की पट्टे वाली जमीन पर निगम कोई कार्रवाई नहीं कर सकेगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि निगम सिर्फ उसी जगह कार्रवाई कर सकता है जो वास्तव में अतिक्रमण के दायरे में आती हो, न कि पट्टे की जमीन पर।

कैनाल लिंक रोड के पीड़ितों के लिए कैसे एक ‘हथियार’ है यह फैसला?

समरिन बाई की यह कानूनी जीत कैनाल लिंक रोड के आस-पास रहने वाले हर उस नागरिक के लिए एक बड़ी नजीर है, जिसे निगम ने अतिक्रमण का नोटिस थमाया है। इस फैसले से उन तमाम लोगों को अपने अधिकारों की रक्षा करने का स्पष्ट रास्ता मिल गया है।

दहशत में न आएं, अपने दस्तावेज दुरुस्त रखें

अक्सर लोग सरकारी नोटिस देखकर डर जाते हैं। लेकिन अगर आपके पास अपनी जमीन का पट्टा या सही राजस्व रिकॉर्ड (नामांतरण) है, तो निगम आपको ‘अतिक्रमणकारी’ बताकर अचानक बेदखल नहीं कर सकता। प्रशासन को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना ही होगा।

एकतरफा ‘सीमांकन’ को कोर्ट में दे सकते हैं चुनौती

हाईकोर्ट के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना भू-स्वामी की मौजूदगी और बिना नजूल या राजस्व अधिकारी के हुए किसी भी एकतरफा सीमांकन (नपती) को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। निगम बंद कमरे में नपती कर किसी का घर नहीं उजाड़ सकता।

मुआवजे से बचने का खेल और आम जनता का हक

सबसे अहम बात यह है कि अगर सरकार या निगम को सड़क (कैनाल लिंक रोड) बनाने के लिए आपकी वैध जमीन चाहिए, तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत ‘अधिग्रहण’ करना होगा और उसका उचित मुआवजा देना होगा। प्रशासन इसे सिर्फ ‘अतिक्रमण’ बताकर मुफ्त में लोगों की जमीन नहीं छीन सकता। समरिन बाई की याचिका ने प्रशासन की इसी मंशा पर सीधे चोट की है।

इस प्रोजेक्ट के आने के पहले से ही कई रसूखदारों को उनकी खबर लग गई थी और सालों पहले ही मुआवजे के लिए, यहां जमीन का खेल शुरू हो चुका है। फिलहाल उसे क्षेत्र में पहले राउंड की तोड़फोड़ हो चुकी है, करीब 30  मकानो निगम का बुलडोजर चल चुका है। अभी सड़क और पूल के लिए चांदनी चौक, इंदिरा नगर जोगीडीपा की 35- 40 मकानो की बारी है। 

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