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रायगढ़: बिना स्वागत-सत्कार ‘चुपके’ से आए CM साय; करोड़ों के सिंदूर पार्क का लोकार्पण… और दफन हो गया इतवारी बाजार का इतिहास!

  • सभा बैठक से लेकर लोकार्पण भी कर गए सीएम, वो भी चुपके—चुपके
  • न कोई सूचना, न कोई सरकारी विज्ञप्ति, होर्डिंग्स व स्वागत द्वार भी नहीं
  • अपने ही पुराने संसदीय क्षेत्र में सीएम के साथ ऐसी बेरूखी पर उठ रहे सवाल
  • तो क्या सीएम के विभाग से हुई चूक, या सरकार में चल रही खींचतान
  • सिंदूर पार्क से लेकर एफएसएल लैब का लोकार्पण, समीक्षा बैठक भी ली

रायगढ। मुख्यमंत्री कल देंगे 155 करोड की सौगात, सीएम आज करेंगे 200 करोड के विकास कार्यों का लोकार्पण व शिलान्यास… ऐसे शीर्षक वाले सरकारी समाचारों से ही आज तक किसी भी सीएम का संबंधित जिले में स्वागत सत्कार होता आया है। मुख्यमंत्री के अधीन रहने वाला जनसंपर्क विभाग ऐसे सूचनात्मक समाचारों के माध्यम से विकास होने, करने और दिखाने का काम करता रहा है।

​लेकिन आज सीएम आए और वो भी बिना किसी सूचना या सरकारी समाचार के! आखिरकार ऐसी क्या बात हो गई जो मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को अपने ही पुराने संसदीय इलाके में समीक्षा बैठक और लोकार्पण के कार्यक्रम के लिए चोरी-छिपे आना पडा? ये जिला प्रशासन व जनसंपर्क विभाग की चूक है, या सीएम हाउस का इनर इंजीनियरिंग वाला दिमाग, या फिर सरकार के भीतर चल रही कोई खींचतान? अब बात कोई भी हो, लेकिन सवाल तो बनता है कि बिना किसी तामझाम और सरकारी सूचना के सीएम करोडों की सौगात देने क्यों आए।

दफन हुआ इतवारी बाजार, अब सिंदूर पार्क

सिंदूर पार्क का लोकार्पण कर आज रायगढ का इतिहास भी बदल दिया गया। शहर का भूगोल सुधारते हुए इतिहास में अपनी पहचान रखने वाले इतवारी बाजार का भी अब हमेशा के लिए नामोनिशान मिट गया। घर के सामने लगने वाली भीड को हटाकर यहां का वास्तु सुधारने के लिए कई गरीबों के पेट पर लात भी मारी गई है। ऐसे में इतवारी बाजार शहीद पार्क हो या सिंदूर पार्क, इससे उन सैकडों पसरा लगाने वाले ग्रामीणों को कोई फर्क नहीं पडने वाला। हां, लेकिन क्रांकीट की सडकों के साथ महंगी स्ट्रीट लाईट व डिजायनर पेड यहां आक्सीजन होने का एहसास जरूर कराएंगे।

अब क्या ही बोले

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री का यह बिना शोर-शराबे वाला ‘सीक्रेट’ दौरा सत्ता के गलियारों में कई सवाल छोड़ गया है। विकास के नाम पर करोड़ों की सौगातें जरूर मिलीं, लेकिन जिस इतवारी बाजार की पहचान मिटाकर यह ‘सिंदूर पार्क’ सजा है, उसकी चमक में उन सैकड़ों गरीबों की आहें कहीं दब सी गई हैं। अब देखना यह है कि सीएम का यह ‘चुपके-चुपके’ आना वाकई सादगी का प्रतीक था, जनसंपर्क विभाग की नाकामी थी, या फिर भाजपा के अंदरूनी ‘चेस-गेम’ का कोई नया दांव? फिलहाल रायगढ़ की जनता और राजनीतिक पंडितो दोनों के बीच इसकी चर्चा है, और दोनों ही अब इसका जवाब तलाश रहे हैं।

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