रायगढ़। जिले में नदियों और भू-जल का दोहन करने वाले उद्योगों पर जल संसाधन विभाग का करीब 132 करोड़ रुपये का जलकर बकाया है। बार-बार नोटिस दिए जाने के बाद भी टैक्स जमा न करने पर विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए 8 कंपनियों के खिलाफ राजस्व वसूली प्रमाण पत्र (RRC) जारी कर दिया है।
विभाग के अनुसार, कुल बकाये में से 114 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि गैर-अनुबंधित औद्योगिक इकाइयों पर लंबित है। प्राकृतिक जल स्रोतों और भू-जल का व्यावसायिक उपयोग करने वाली इन कंपनियों के खिलाफ अब वसूली अभियान तेज कर दिया गया है।
गैर-अनुबंधित उद्योगों पर बढ़ा बकाया, दो कंपनियों पर 93 करोड़ की देनदारी
महानदी, केलो, कुरकेट और सपनई नदी से पानी लेने के लिए जिले के 23 उद्योगों ने जल संसाधन विभाग के साथ अनुबंध किया था। विभाग द्वारा चलाए गए वसूली अभियान के बाद अनुबंधित उद्योगों पर बकाया राशि 60 करोड़ रुपये से घटकर 17 करोड़ रुपये रह गई है।
इसके विपरीत, भू-जल का उपयोग करने वाले 26 गैर-अनुबंधित उद्योगों पर बकाया लगातार बढ़ा है। पहले जहां इनसे 71 लाख रुपये वसूले जाने थे, वहीं अब यह राशि बढ़कर 114 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। इस बकाये में से करीब 93 करोड़ रुपये की राशि अकेले दो बड़ी कंपनियों—इंड सिनर्जी (50.95 करोड़ रुपये) और सालासार स्टील (43.40 करोड़ रुपये) पर बकाया है, जिसका मामला फिलहाल अदालत में लंबित है।
नोटिस के बाद भी भुगतान नहीं, इन 8 कंपनियों पर RRC की कार्रवाई
पुराना बकाया जमा करने के लिए लगातार नोटिस दिए जाने के बावजूद भुगतान न करने पर विभाग ने 8 औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ आरआरसी जारी की है। इनमें नवदुर्गा फ्यूल्स, शिव शक्ति स्टील, रायगढ़ आयरन, केशव इस्पात, आर.आर. एनर्जी, इंड पावर, महामाया रोलिंग मिल और डड पावर शामिल हैं।
जिले के अन्य प्रमुख बकाएदारों में नवदुर्गा फ्यूल्स पर 11.57 करोड़ रुपये, ईबी पावर पर 5.22 करोड़ रुपये, जेएसडब्ल्यू स्टील पर 3.24 करोड़ रुपये और जेपीएल (तमनार) पर 3.00 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके अलावा श्याम इस्पात पर 1.49 करोड़ रुपये, डड पावर पर 1.48 करोड़ रुपये, रायगढ़ आयरन पर 1.20 करोड़ रुपये और शिव शक्ति स्टील पर 73 लाख रुपये की देनदारी है।
जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक जल स्रोतों और भू-जल का व्यावसायिक उपयोग करने वाले सभी बकाएदारों से वसूली की प्रक्रिया को कड़ाई से आगे बढ़ाया जाएगा।









